गुरुग्राम में प्रवर्तन निदेशालय के चंडीगढ़ जोन-I ने बहुचर्चित मानेसर भूमि घोटाले मामले में टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और टीडीआई इन्फ्राटेक के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीमों ने टीडीआई ग्रुप के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर रविंदर तनेजा और कंपनी के अन्य डायरेक्टरों से जुड़े गुरुग्राम, दिल्ली और मोहाली स्थित आवास और व्यावसायिक परिसरों पर लगातार तीन दिनों तक सघन तलाशी अभियान चलाया। इस व्यापक छापेमारी के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने टीडीआई ग्रुप के ठिकानों से 8 करोड़ रुपए कीमत की आलीशान लग्जरी गाड़ियां और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कई आपत्तिजनक डिजिटल व वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं। दरअसल 2005 – 2007 के बीच तीन गांवों मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला में भूमि अधिग्रहण की अवधि के दौरान, टीडीआई ग्रुप ने किसानों से लगभग 33 एकड़ जमीन खरीदने और उन्हें भारी मुनाफे पर अतुल बंसल ग्रुप को बेचने के लिए तीन कंपनियों मेसर्स इंडो एशियन कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एनसीआर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स दिव्य ज्योति एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड का माध्यम के रूप में उपयोग किया था। 8 करोड़ रुपए की लग्जरी गाड़ियां जब्त ED की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, टीडीआई ग्रुप के प्रमोटरों के परिसरों से जब्त की गई लग्जरी गाड़ियों में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के बेहद महंगे मॉडल शामिल हैं। रेंज रोवर: इसकी अनुमानित कीमत लगभग 4.50 करोड़ रुपए है। मर्सिडीज-बेंज एस-क्लास: यह लग्जरी सेडान लगभग 1.80 करोड़ रुपए मूल्य की है। मर्सिडीज-बेंज ई-क्लास: इसकी कीमत करीब 90 लाख रुपए आंकी गई है। लेक्सस ईएस: टीडीआई ग्रुप के ठिकाने से 72 लाख रुपए की यह प्रीमियम कार भी ED ने अपने कब्जे में ली है। डिजिटल सबूत और प्रोजेक्ट फाइल मिली तीन दिनों तक चली इस सर्च ऑपरेशन में सिर्फ लग्जरी गाड़ियां ही नहीं, बल्कि टीडीआई ग्रुप द्वारा किए जा रहे कई अन्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में भी भारी वित्तीय गड़बड़ियों और इलीगल गतिविधियों के पुख्ता रिकॉर्ड हाथ लगे हैं। ED की टीम ने मौके से दर्जनों महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट फाइलें, डिजिटल डिवाइसेज, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और मुख्य सर्वर को जब्त कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इन जब्त किए गए दस्तावेजों और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड्स की गहनता से स्क्रूटनी की जा रही है, जिससे इस घोटाले से जुड़े अन्य बड़े चेहरों और मनी ट्रेल का खुलासा होने की पूरी उम्मीद है। जानिए जमीन घोटाले में TDI ग्रुप पर आरोप…………….. बिचौलिए की भूमिका: केंद्रीय जांच एजेंसी के खुलासे के मुताबिक, यह पूरा मामला वर्ष 2005 से 2007 के बीच का है, जब गुरुग्राम और मानेसर के नौरंगपुर व लखनौला गांवों में सरकार द्वारा करीब 400 एकड़ जमीन को अधिग्रहण के लिए अधिसूचित (नोटीफाइड) किया गया था। इस बड़े घोटाले में टीडीआई ग्रुप ने एक बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। तीन डमी कंपनियां बनाई: टीडीआई ग्रुप ने चाल चलते हुए 3 डमी कंपनियां बनाईं। इन डमी कंपनियों के जरिए मानेसर और आसपास के भोले-भाले किसानों को सरकारी अधिग्रहण का डर दिखाया गया कि उनकी जमीन बेहद सस्ते दामों पर सरकार ले लेगी। इस डर का फायदा उठाकर टीडीआई ने किसानों से लगभग 33 एकड़ जमीन बेहद कम और औने-पौने दामों पर खरीद ली। जमीन खरीदते ही अधिग्रहण प्रक्रिया रद्द: साजिश के अगले हिस्से के तहत, बाद में जब सरकार और संबंधित विभागों द्वारा इस 400 एकड़ अधिसूचित जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया को अचानक रद्द कर दिया गया, तो टीडीआई ग्रुप ने कम रेट पर हड़पी गई इसी 33 एकड़ जमीन को अतुल बंसल ग्रुप (एबीवीडब्ल्यू ग्रुप) को कई गुना ऊंचे दामों पर बेचकर भारी-भरकम और अवैध मुनाफा कमाया। 2015 में सीबीआई ने दर्ज किया केस साल 2015 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानि सीबीआई ने हरियाणा के इस हाई-प्रोफाइल मानेसर लैंड स्कैम में टीडीआई ग्रुप, उसके प्रमोटरों और अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआई की इसी एफआईआर (FIR) को आधार बनाते हुए ED ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच शुरू की थी। ED के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि किसानों को डराकर और सरकारी नीतियों का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपए का जो अवैध धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) कमाया गया, उसे ही इन लग्जरी गाड़ियों और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया था। इस 3 दिवसीय रेड के बाद टीडीआई ग्रुप के चेयरमैन रविंदर तनेजा और अन्य अधिकारियों की मुश्किलें आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने वाली हैं।

