गुमला जिले में बरसात शुरू होते ही जहरीले सांपों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर ग्रामीण इलाकों में सांप काटने से कई लोगों की जान चली जाती है। हालांकि, समय पर अस्पताल पहुंचने से कई लोगों को बचाया भी गया है। साल 2026 में मार्च से सितंबर तक 181 लोग सांप के काटने का शिकार हुए हैं, जिनमें से 16 लोगों की मौत हो चुकी है। जुलाई में सबसे ज्यादा 68 लोगों को सांप ने काटा था। इनमें से करीब छह लोगों की मौत हो गई। ज्यादातर मामलों में लोग जमीन पर सोते समय या खेत में काम करते समय सांप के शिकार हुए हैं। सांप काटने के बाद ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर अंधविश्वास में पड़कर झाड़-फूंक कराने लगते हैं। इसके बाद वे मरीज को अस्पताल ले जाते हैं। इस देरी के कारण भी कई लोगों की जान चली जाती है। जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान सांप काटने की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं। परिजनों ने सांप के शिकार मरीजों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों की देखरेख में एक महिला का इलाज चल रहा है। वहीं, दूसरी महिला को अस्पताल लाने में देरी होने के कारण उसकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे रिम्स रेफर कर दिया गया। पहली घटना बसिया प्रखंड के सरूडु गांव में हुई। यहां 45 साल की करमी इंदवार जमीन पर सो रही थीं, तभी उन्हें सांप ने काट लिया। परिजनों ने पहले झाड़-फूंक कराई, लेकिन जब हालत नहीं सुधरी तो उन्हें सदर अस्पताल ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें रिम्स रेफर कर दिया। दूसरा मामला टांगर टोली का है। यहां सुमति देवी खेत में धान की निराई कर रही थीं, तभी उनके पैर में सांप ने काट लिया। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे समय पर इलाज शुरू हो सका और उनकी हालत में सुधार है। सिविल सर्जन शंभू चौधरी ने लोगों से झाड़-फूंक और अंधविश्वास में समय बर्बाद न करने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से कहा है कि सांप काटने पर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें। मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। गुमला जिले में बरसात शुरू होते ही जहरीले सांपों का खतरा बढ़ जाता है। खासकर ग्रामीण इलाकों में सांप काटने से कई लोगों की जान चली जाती है। हालांकि, समय पर अस्पताल पहुंचने से कई लोगों को बचाया भी गया है। साल 2026 में मार्च से सितंबर तक 181 लोग सांप के काटने का शिकार हुए हैं, जिनमें से 16 लोगों की मौत हो चुकी है। जुलाई में सबसे ज्यादा 68 लोगों को सांप ने काटा था। इनमें से करीब छह लोगों की मौत हो गई। ज्यादातर मामलों में लोग जमीन पर सोते समय या खेत में काम करते समय सांप के शिकार हुए हैं। सांप काटने के बाद ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर अंधविश्वास में पड़कर झाड़-फूंक कराने लगते हैं। इसके बाद वे मरीज को अस्पताल ले जाते हैं। इस देरी के कारण भी कई लोगों की जान चली जाती है। जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान सांप काटने की दो अलग-अलग घटनाएं सामने आई हैं। परिजनों ने सांप के शिकार मरीजों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों की देखरेख में एक महिला का इलाज चल रहा है। वहीं, दूसरी महिला को अस्पताल लाने में देरी होने के कारण उसकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे रिम्स रेफर कर दिया गया। पहली घटना बसिया प्रखंड के सरूडु गांव में हुई। यहां 45 साल की करमी इंदवार जमीन पर सो रही थीं, तभी उन्हें सांप ने काट लिया। परिजनों ने पहले झाड़-फूंक कराई, लेकिन जब हालत नहीं सुधरी तो उन्हें सदर अस्पताल ले गए। वहां से डॉक्टरों ने उन्हें रिम्स रेफर कर दिया। दूसरा मामला टांगर टोली का है। यहां सुमति देवी खेत में धान की निराई कर रही थीं, तभी उनके पैर में सांप ने काट लिया। उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे समय पर इलाज शुरू हो सका और उनकी हालत में सुधार है। सिविल सर्जन शंभू चौधरी ने लोगों से झाड़-फूंक और अंधविश्वास में समय बर्बाद न करने की अपील की है। स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से कहा है कि सांप काटने पर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के चक्कर में न पड़ें। मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं।

