गया जिले के गुरुआ प्रखंड के चकजलपा हायर सेकेंड्री स्कूल की एक तस्वीर सामने आई है। दरअसल, स्कूल के टीचरों का दावा है कि क्लासरूम में ब्लैकबोर्ड तक नहीं है। ऐसे में टीचर्स ने स्कूल के लोहे के दरवाजे को ही ब्लैकबोर्ड बना लिया है। लोहे के गेट पर ही चॉक से लिखकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। पूरे मामले का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में स्कूल के क्लास में शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही हैं। शिक्षक और शिक्षिका का कहना है कि हम लोग कम संसाधनों के बीच अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लोहे के गेट बच्चों के लिए रोजमर्रा की पढ़ाई का हिस्सा बन गए हैं। स्कूल में बेंच-डेस्क की भी पर्याप्त सुविधा नहीं विद्यालय में बेंच-डेस्क की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं होने की बात सामने आई है। कई बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। यानी एक तरफ ब्लैकबोर्ड नहीं है। दूसरी तरफ बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। जबकि स्कूल में 200 से अधिक बच्चों का दाखिला है। ऐसे में स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को किस माहौल में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। हर साल विकास के नाम पर राशि, फिर भी बदहाली विद्यालयों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए विभाग की ओर से हर साल राशि उपलब्ध कराई जाती है। हर स्कूल का अलग अलग रख रखाव का वार्षिक फंड विभाग की ओर से जारी किया जाता है। इसके बावजूद चकजलपा स्कूल में ब्लैकबोर्ड जैसी सुविधा का नहीं होना गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर विद्यालय की जरूरतों पर राशि खर्च कैसे होती है। अगर राशि मिलती है तो उसका असर स्कूल में क्यों नहीं दिखता। मामले की जांच होने पर ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। दूरस्थ स्कूलों पर निगरानी का भी सवाल चकजलपा समेत कई विद्यालय गुरुआ प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर हैं। ऐसे दूरस्थ विद्यालयों में विभागीय निगरानी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। खास बात यह भी कि प्रखंड में करीब ढाई वर्षों से स्थायी बीईओ की पदस्थापना नहीं है। जुगाड़ से ही काम चल रहा है। मध्याह्न भोजन को लेकर भी सवाल विद्यालय में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि नामांकित बच्चों में से कुछ बच्चे दोपहर में स्कूल का भोजन नहीं करते और घर जाकर खाना खाते हैं। अब लोगों ने शेरघाटी के नए एसडीएम जतिन कुमार से स्कूल का स्वयं निरीक्षण करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ब्लैकबोर्ड, बेंच-डेस्क, मध्याह्न भोजन और विद्यालय के रखरखाव की जांच होनी चाहिए। प्रभारी बीईओ बोले- जांच कर कार्रवाई होगी प्रभारी बीईओ जयशंकर सिंह ने बताया कि चकजलपा स्कूल में किवाड़ पर लिखकर पढ़ाने का मामला संज्ञान में आया है। मामला गम्भीर है लेकिन किन परिस्थितियों में ऐसा किया गया। यह जानना महत्वपूर्ण है। पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। जांच के बाद यदि कोई दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। गया जिले के गुरुआ प्रखंड के चकजलपा हायर सेकेंड्री स्कूल की एक तस्वीर सामने आई है। दरअसल, स्कूल के टीचरों का दावा है कि क्लासरूम में ब्लैकबोर्ड तक नहीं है। ऐसे में टीचर्स ने स्कूल के लोहे के दरवाजे को ही ब्लैकबोर्ड बना लिया है। लोहे के गेट पर ही चॉक से लिखकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। पूरे मामले का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में स्कूल के क्लास में शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही हैं। शिक्षक और शिक्षिका का कहना है कि हम लोग कम संसाधनों के बीच अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लोहे के गेट बच्चों के लिए रोजमर्रा की पढ़ाई का हिस्सा बन गए हैं। स्कूल में बेंच-डेस्क की भी पर्याप्त सुविधा नहीं विद्यालय में बेंच-डेस्क की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं होने की बात सामने आई है। कई बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। यानी एक तरफ ब्लैकबोर्ड नहीं है। दूसरी तरफ बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं है। जबकि स्कूल में 200 से अधिक बच्चों का दाखिला है। ऐसे में स्कूल पहुंचने वाले बच्चों को किस माहौल में पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। हर साल विकास के नाम पर राशि, फिर भी बदहाली विद्यालयों के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए विभाग की ओर से हर साल राशि उपलब्ध कराई जाती है। हर स्कूल का अलग अलग रख रखाव का वार्षिक फंड विभाग की ओर से जारी किया जाता है। इसके बावजूद चकजलपा स्कूल में ब्लैकबोर्ड जैसी सुविधा का नहीं होना गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर विद्यालय की जरूरतों पर राशि खर्च कैसे होती है। अगर राशि मिलती है तो उसका असर स्कूल में क्यों नहीं दिखता। मामले की जांच होने पर ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। दूरस्थ स्कूलों पर निगरानी का भी सवाल चकजलपा समेत कई विद्यालय गुरुआ प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर हैं। ऐसे दूरस्थ विद्यालयों में विभागीय निगरानी को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। खास बात यह भी कि प्रखंड में करीब ढाई वर्षों से स्थायी बीईओ की पदस्थापना नहीं है। जुगाड़ से ही काम चल रहा है। मध्याह्न भोजन को लेकर भी सवाल विद्यालय में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि नामांकित बच्चों में से कुछ बच्चे दोपहर में स्कूल का भोजन नहीं करते और घर जाकर खाना खाते हैं। अब लोगों ने शेरघाटी के नए एसडीएम जतिन कुमार से स्कूल का स्वयं निरीक्षण करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ब्लैकबोर्ड, बेंच-डेस्क, मध्याह्न भोजन और विद्यालय के रखरखाव की जांच होनी चाहिए। प्रभारी बीईओ बोले- जांच कर कार्रवाई होगी प्रभारी बीईओ जयशंकर सिंह ने बताया कि चकजलपा स्कूल में किवाड़ पर लिखकर पढ़ाने का मामला संज्ञान में आया है। मामला गम्भीर है लेकिन किन परिस्थितियों में ऐसा किया गया। यह जानना महत्वपूर्ण है। पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। जांच के बाद यदि कोई दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

