गयाजी- फल्गु नदी में फिर बहेगी जलधारा:पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले उड़ाही से बदलेगी तस्वीर, दिल्ली में बनी योजना

गयाजी- फल्गु नदी में फिर बहेगी जलधारा:पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले उड़ाही से बदलेगी तस्वीर, दिल्ली में बनी योजना

गयाजी में लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रही फल्गु नदी को फिर से जीवंत करने की पहल शुरू हो गई है। दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों की अहम बैठक में फल्गु नदी के पुनर्जीवन के ब्लू प्रिंट पर चर्चा हुई। जल्द ही नदी की उड़ाही का काम शुरू किए जाने की बात कही गई है। पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले इसे शहर के लिए बड़ी खबर माना जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसी नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करते हैं। ऐसे में नदी में सालभर जलधारा रहने से धार्मिक गतिविधियों के साथ शहर की तस्वीर भी बदल सकती है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने फल्गु नदी के पुनर्जीवन को लेकर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि गयाजी के समग्र विकास के लिए एक और सार्थक शुरुआत हुई है। केंद्र सरकार की पहल जल्द जमीन पर दिखाई देगी। फल्गु नदी में धाराप्रवाह पानी लाना आसान काम नहीं है। पुरानी मान्यताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक नदी में लगातार पानी की धारा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से यह संकल्प पूरा होगा। नदी की उड़ाही को लेकर हुई चर्चा केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कहा कि जिस तरह गयाजी की सड़कों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया गया है, उसी तरह अब नदियों को जोड़ने की दिशा में काम होगा। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा। फल्गु नदी के पुनर्जीवन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे। बैठक में फल्गु नदी की उड़ाही को लेकर आगे की कार्य योजना पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री मांझी के अनुसार बैठक में जल्द उड़ाही का काम शुरू करने पर सहमति बनी है। हालांकि नदी में जलधारा किस व्यवस्था से और किस स्तर तक सुनिश्चित होगी, इसका विस्तृत खाका आगे सामने आएगा। फल्गु नदी सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है। गयाजी शहर की बड़ी आबादी के लिए इसका सीधा संबंध पानी और पर्यावरण से भी है। नदी में पानी रहने से आसपास के इलाकों के भूजल स्तर पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा नदी के किनारे का क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी विकसित किया जा सकता है। पूरे साल लोग गयाजी आते हैं सांसद प्रतिनिधि ई. नंदलाल मांझी ने कहा कि फल्गु जिले के लिए जीवनदायिनी नदी है। सालभर पानी रहने से पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले लोगों को सुविधा होगी। शहर की पेयजल समस्या में भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है। फल्गु में जलधारा लौटने से पर्यटन को भी नया विस्तार मिल सकता है। नदी का किनारा व्यवस्थित होने पर धार्मिक पर्यटन के साथ पर्यटकों के लिए आकर्षण बढ़ेगा। इससे स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिल सकता है।
गयाजी में हर साल पितृपक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं। फल्गु नदी के तट पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान इस आयोजन का सबसे अहम हिस्सा हैं। ऐसे में पितृपक्ष से पहले फल्गु के पुनर्जीवन की पहल सामने आने से लोगों की उम्मीद बढ़ी है। जल्द बदलेगी फल्गु की तस्वीर अब सबसे बड़ी चुनौती योजना को जमीन पर उतारने की होगी। नदी की उड़ाही, जलधारा का स्थायी प्रबंध और नदी क्षेत्र का संरक्षण साथ-साथ करना होगा। अगर योजना तय समय पर आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में फल्गु की तस्वीर बदल सकती है। अब बात सिर्फ फल्गु की उड़ाही तक सीमित नहीं है। कोशिश यह है कि गयाजी की जीवनरेखा कही जाने वाली नदी में फिर से पानी बहे। श्रद्धालुओं को तर्पण के लिए बेहतर सुविधा मिले। शहर को पानी के संकट से राहत मिले। साथ ही फल्गु का किनारा पर्यटन और पर्यावरण के लिहाज से भी नया रूप ले। गयाजी में लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रही फल्गु नदी को फिर से जीवंत करने की पहल शुरू हो गई है। दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों की अहम बैठक में फल्गु नदी के पुनर्जीवन के ब्लू प्रिंट पर चर्चा हुई। जल्द ही नदी की उड़ाही का काम शुरू किए जाने की बात कही गई है। पितृपक्ष मेला शुरू होने से पहले इसे शहर के लिए बड़ी खबर माना जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु इसी नदी के तट पर पिंडदान और तर्पण करते हैं। ऐसे में नदी में सालभर जलधारा रहने से धार्मिक गतिविधियों के साथ शहर की तस्वीर भी बदल सकती है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने फल्गु नदी के पुनर्जीवन को लेकर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि गयाजी के समग्र विकास के लिए एक और सार्थक शुरुआत हुई है। केंद्र सरकार की पहल जल्द जमीन पर दिखाई देगी। फल्गु नदी में धाराप्रवाह पानी लाना आसान काम नहीं है। पुरानी मान्यताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक नदी में लगातार पानी की धारा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से यह संकल्प पूरा होगा। नदी की उड़ाही को लेकर हुई चर्चा केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कहा कि जिस तरह गयाजी की सड़कों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम किया गया है, उसी तरह अब नदियों को जोड़ने की दिशा में काम होगा। इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा। फल्गु नदी के पुनर्जीवन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे। बैठक में फल्गु नदी की उड़ाही को लेकर आगे की कार्य योजना पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री मांझी के अनुसार बैठक में जल्द उड़ाही का काम शुरू करने पर सहमति बनी है। हालांकि नदी में जलधारा किस व्यवस्था से और किस स्तर तक सुनिश्चित होगी, इसका विस्तृत खाका आगे सामने आएगा। फल्गु नदी सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है। गयाजी शहर की बड़ी आबादी के लिए इसका सीधा संबंध पानी और पर्यावरण से भी है। नदी में पानी रहने से आसपास के इलाकों के भूजल स्तर पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा नदी के किनारे का क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी विकसित किया जा सकता है। पूरे साल लोग गयाजी आते हैं सांसद प्रतिनिधि ई. नंदलाल मांझी ने कहा कि फल्गु जिले के लिए जीवनदायिनी नदी है। सालभर पानी रहने से पिंडदान और तर्पण के लिए आने वाले लोगों को सुविधा होगी। शहर की पेयजल समस्या में भी इससे राहत मिलने की उम्मीद है। फल्गु में जलधारा लौटने से पर्यटन को भी नया विस्तार मिल सकता है। नदी का किनारा व्यवस्थित होने पर धार्मिक पर्यटन के साथ पर्यटकों के लिए आकर्षण बढ़ेगा। इससे स्थानीय कारोबार को भी फायदा मिल सकता है।
गयाजी में हर साल पितृपक्ष के दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं। फल्गु नदी के तट पर होने वाले धार्मिक अनुष्ठान इस आयोजन का सबसे अहम हिस्सा हैं। ऐसे में पितृपक्ष से पहले फल्गु के पुनर्जीवन की पहल सामने आने से लोगों की उम्मीद बढ़ी है। जल्द बदलेगी फल्गु की तस्वीर अब सबसे बड़ी चुनौती योजना को जमीन पर उतारने की होगी। नदी की उड़ाही, जलधारा का स्थायी प्रबंध और नदी क्षेत्र का संरक्षण साथ-साथ करना होगा। अगर योजना तय समय पर आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में फल्गु की तस्वीर बदल सकती है। अब बात सिर्फ फल्गु की उड़ाही तक सीमित नहीं है। कोशिश यह है कि गयाजी की जीवनरेखा कही जाने वाली नदी में फिर से पानी बहे। श्रद्धालुओं को तर्पण के लिए बेहतर सुविधा मिले। शहर को पानी के संकट से राहत मिले। साथ ही फल्गु का किनारा पर्यटन और पर्यावरण के लिहाज से भी नया रूप ले।  

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