भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 20वीं पुण्यतिथि आज मनाई जा रही है। ऐसे में उनके मकबरे पर उनके परिजनों ने सबसे पहले कुरानख्वानी की। इसके बाद फातेहा पढ़ा गया। और पुष्प अर्पित किया गया। इस दौरान कई संगीत प्रेमियों ने दरगाह फातमान स्थित मकबरे पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित किया। उस्ताद के मकबरे पर उनके प्रपौत्र आफाक हैदर और उनके साथियों ने शहनाई पर आंसुओं का नजराना भी पेश किया। उस्ताद को दी गई श्रद्धांजलि शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की 20वीं पुण्यतिथि पर उनके मकबरे पर शुक्रवार को उनके चाहने वालों की भीड़ उमड़ी। उनके घर के लोगों ने उनकी कब्र पर शहनाई का नजराना पेश किया। शहनाई पर उस्ताद द्वारा बजाया जाने वाला नौहा मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का बजाया गया। जिसे सुनकर वहां के लोग गैंगों हो गए। इसके बाद उनकी कब्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। बालाजी मंदिर पर करते थे रियाज इस दौरान इनके प्रपौत्र आफाक हैदर ने बताया दादा हुजूर अपनी शहनाई का रियाज रोजाना गंगा जी के स्नान कर बालाजी मंदिर के बगल में करते थे। बालाजी मंदिर पर उन्होंने जब तक वो ठीक रहे तब तक रियाज किया। उन्होंने कई देशों ने अपनी नागरिकता के लिए कहा पर उन्होंने भारत से प्यार था और वो यहीं बस गए। साल 2006 में हुआ था देहांत बिस्मिल्लाह खां की मौत लंबी बीमारी के बाद 21 अगस्त 2006 में हुई थी। उन्हें राष्ट्रीय सम्मान के साथ सेना ने दरगाह फातमान में दफन किया था।

