Revanth Reddy US visit denied: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को केंद्र सरकार ने अमेरिका जाने की अनुमति नहीं दी। इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया कि अब वह बोस्टन जाने के बजाय 23 अगस्त को लंदन से हैदराबाद लौटेंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आधिकारिक ‘तेलंगाना राइजिंग’ प्रतिनिधिमंडल का अमेरिका दौरा विदेश मंत्रालय से अनुमति नहीं मिलने के कारण रद्द करना पड़ा है।
राज्य सरकार ने नीति और प्रोटोकॉल के तहत ब्रिटेन और अमेरिका, दोनों की यात्रा के लिए केंद्र से अनुमति मांगी थी। हालांकि, केवल ब्रिटेन यात्रा को मंजूरी मिली। राज्य सरकार का दावा है कि केंद्र सरकार ने अमेरिका दौरे की अनुमति नहीं देने के अपने फैसले की जानकारी उस समय दी, जब आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ब्रिटेन पहुंच चुका था।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने क्या कहा?
केंद्र के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा, ‘इस यात्रा का एकमात्र उद्देश्य नई शिक्षा नीति के तहत दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों को भारत, तेलंगाना और हैदराबाद लाना था। इससे हमारे युवाओं की उन आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलती, जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आइवी लीग और शीर्ष वैश्विक संस्थानों से शिक्षा, कौशल और प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘मैंने हमेशा माना है कि राष्ट्र निर्माण और युवाओं के भविष्य के मामले में हम सभी को राजनीति और चुनावों से आगे बढ़कर सोचना चाहिए।’ मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने कहा कि वह अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, लंदन बिजनेस स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन समेत अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात जारी रखेंगे।
रेवंत रेड्डी बोले- ‘राजनीतिक आधार पर रोका गया’
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ‘तेलंगाना राइजिंग’ और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए उनकी अमेरिका यात्रा को ‘राजनीतिक आधार पर रोका जाना’ उनके लिए हैरान करने वाला है। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह केंद्र के फैसले का पालन करेंगे और लंदन से भारत लौटेंगे।
उन्होंने कहा, ‘हम हैदराबाद को वैश्विक ज्ञान केंद्र बनाएंगे। उस्मानिया विश्वविद्यालय से लेकर एचसीयू और जेएनटीयू तक विश्वविद्यालयों की स्थापना ने हैदराबाद को बेहतरीन मानव संसाधन का केंद्र बनाया है। हैदराबाद पब्लिक स्कूल जैसे एक स्कूल ने दिखाया है कि हम दुनिया का नेतृत्व कर सकते हैं और यहां से कुछ सबसे बड़े तकनीकी लीडर निकले हैं।’

