कैमूर के भभुआ स्थित गुलजार वाटिका में हरियाली तीज महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। नगर परिषद की सभापति रविता पटेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर लोकगीत, संगीत और नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने तीज महोत्सव की रौनक बढ़ा दी। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धा राय ने बताया कि हरियाली तीज सावन माह में भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। पारंपरिक गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां दीं यह पर्व अखंड सौभाग्य की कामना के साथ महिलाओं को आपसी मेलजोल और आनंद का अवसर प्रदान करता है। अनामिका मिश्रा ने कहा कि व्यस्त जीवन से समय निकालकर महिलाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं, जिससे रिश्ते मजबूत होते हैं और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ता है। इस दौरान शिल्पी अग्रवाल सहित अन्य महिलाओं ने सावन के पारंपरिक गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का संदेश महोत्सव में मधु गुप्ता, माधुरी देवी, अल्का, रीमा, सोनी, रिंकी, बंदना और सविता सहित कई महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजक मंडल ने बताया कि ऐसे आयोजन लोक-परंपराओं के संरक्षण के साथ महिला सहभागिता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं। बच्चों और युवाओं ने भी इस पारंपरिक उत्सव का भरपूर आनंद लिया। अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक मंच उपलब्ध कराने की बात कही। कैमूर के भभुआ स्थित गुलजार वाटिका में हरियाली तीज महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। नगर परिषद की सभापति रविता पटेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर लोकगीत, संगीत और नृत्य प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने तीज महोत्सव की रौनक बढ़ा दी। कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धा राय ने बताया कि हरियाली तीज सावन माह में भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। पारंपरिक गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां दीं यह पर्व अखंड सौभाग्य की कामना के साथ महिलाओं को आपसी मेलजोल और आनंद का अवसर प्रदान करता है। अनामिका मिश्रा ने कहा कि व्यस्त जीवन से समय निकालकर महिलाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं, जिससे रिश्ते मजबूत होते हैं और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ता है। इस दौरान शिल्पी अग्रवाल सहित अन्य महिलाओं ने सावन के पारंपरिक गीतों की संगीतमय प्रस्तुतियां दीं। सामाजिक एकता को बढ़ावा देने का संदेश महोत्सव में मधु गुप्ता, माधुरी देवी, अल्का, रीमा, सोनी, रिंकी, बंदना और सविता सहित कई महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। आयोजक मंडल ने बताया कि ऐसे आयोजन लोक-परंपराओं के संरक्षण के साथ महिला सहभागिता और सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं। बच्चों और युवाओं ने भी इस पारंपरिक उत्सव का भरपूर आनंद लिया। अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक मंच उपलब्ध कराने की बात कही।

