कुमार सर्वजीत बोले- पार्टी जो फैसला लेगी वही होगा:गया में RJD प्रदेश अध्यक्ष बनने के सवाल पर कहा- प्रमोशन कौन नहीं चाहता, हम तो पार्टी के सिपाही हैं

कुमार सर्वजीत बोले- पार्टी जो फैसला लेगी वही होगा:गया में RJD प्रदेश अध्यक्ष बनने के सवाल पर कहा- प्रमोशन कौन नहीं चाहता, हम तो पार्टी के सिपाही हैं

बिहार में आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर सियासी हलचल तेज है। संगठन में बदलाव की चर्चा के बीच कई नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इनमें आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत का नाम भी तेजी से चर्चा में है। हालांकि, खुद सर्वजीत ने प्रदेश अध्यक्ष की रेस को लेकर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। गया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या वे प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में सबसे आगे हैं। इस पर सर्वजीत ने कहा कि यह फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को करना है। उन्होंने कहा, जनहित के मुद्दों पर बात होती तो ज्यादा अच्छा होता। पार्टी के शीर्ष नेता जो तय करेंगे, वही हमारी पॉलिसी है। वे क्या करेंगे, क्या नहीं करेंगे, हम तो पार्टी के सिपाही हैं। नेतृत्व के फैसले को सर्वोपरि बताया
सर्वजीत के इस बयान को संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच अहम माना जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर पद की दावेदारी नहीं की। साथ ही नेतृत्व के फैसले को सर्वोपरि बताया। पद की चाहत पर सवाल, मुस्कुराकर बोले- कौन नहीं रखता
बात यहीं नहीं रुकी। दैनिक भास्कर के पत्रकार ने उनसे पूछा कि अगर वे पार्टी के सिपाही हैं तो क्या आगे बढ़ने यानी ‘प्रमोशन’ की उम्मीद रखते हैं। सर्वजीत ने मुस्कुराते हुए कहा, “कौन नहीं रखता है” रखना भी चाहिए। संजीदा सवाल का उनका यह छोटा सा जवाब चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, उन्होंने पद की इच्छा से इनकार भी नहीं किया। लेकिन इसे लेकर कोई दावा भी नहीं किया। मतलब साफ है कि जिम्मेदारी मिलेगी तो निभाएंगे। फैसला नेतृत्व करेगा तो स्वीकार भी करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर आरजेडी में अंदरखाने की सियासत के बीच सर्वजीत का यह रुख फिलहाल संतुलित है। वे एक तरफ नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दिखा रहे हैं। दूसरी तरफ ‘प्रमोशन’ की इच्छा को भी सहज अंदाज में स्वीकार कर रहे हैं। ‘पद की रेस नहीं, जनता के मुद्दों पर हो बहस’
सर्वजीत ने राजनीतिक चर्चा का फोकस संगठन और पद से हटाकर जनता के मुद्दों पर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बिहार में आरक्षण, किसानों की समस्या, सुखाड़ और बाढ़ जैसे कई गंभीर सवाल हैं। दबे-कुचले, दलित और पिछड़े वर्ग के अधिकार भी बड़े मुद्दे हैं। इन पर गंभीर बहस और काम की जरूरत है। आरक्षण को लेकर चल रही बहस का भी उन्होंने जिक्र किया। कहा कि आरक्षण की समीक्षा और उसमें बदलाव को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। आने वाले दिनों में इस पर विस्तार से चर्चा की जरूरत है। सर्वजीत के बयान से एक बात तो साफ है। बेशक वे पार्टी के भरोसेमंद सिपाही हैं पर कुर्सी पर नजर हो सकती है, लेकिन दावा करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में छोड़कर सर्वजीत फिलहाल खुद को सिपाही ही बता रहे हैं। बिहार में आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर सियासी हलचल तेज है। संगठन में बदलाव की चर्चा के बीच कई नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। इनमें आरजेडी विधायक कुमार सर्वजीत का नाम भी तेजी से चर्चा में है। हालांकि, खुद सर्वजीत ने प्रदेश अध्यक्ष की रेस को लेकर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। गया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या वे प्रदेश अध्यक्ष पद की रेस में सबसे आगे हैं। इस पर सर्वजीत ने कहा कि यह फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को करना है। उन्होंने कहा, जनहित के मुद्दों पर बात होती तो ज्यादा अच्छा होता। पार्टी के शीर्ष नेता जो तय करेंगे, वही हमारी पॉलिसी है। वे क्या करेंगे, क्या नहीं करेंगे, हम तो पार्टी के सिपाही हैं। नेतृत्व के फैसले को सर्वोपरि बताया
सर्वजीत के इस बयान को संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच अहम माना जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर पद की दावेदारी नहीं की। साथ ही नेतृत्व के फैसले को सर्वोपरि बताया। पद की चाहत पर सवाल, मुस्कुराकर बोले- कौन नहीं रखता
बात यहीं नहीं रुकी। दैनिक भास्कर के पत्रकार ने उनसे पूछा कि अगर वे पार्टी के सिपाही हैं तो क्या आगे बढ़ने यानी ‘प्रमोशन’ की उम्मीद रखते हैं। सर्वजीत ने मुस्कुराते हुए कहा, “कौन नहीं रखता है” रखना भी चाहिए। संजीदा सवाल का उनका यह छोटा सा जवाब चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, उन्होंने पद की इच्छा से इनकार भी नहीं किया। लेकिन इसे लेकर कोई दावा भी नहीं किया। मतलब साफ है कि जिम्मेदारी मिलेगी तो निभाएंगे। फैसला नेतृत्व करेगा तो स्वीकार भी करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर आरजेडी में अंदरखाने की सियासत के बीच सर्वजीत का यह रुख फिलहाल संतुलित है। वे एक तरफ नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दिखा रहे हैं। दूसरी तरफ ‘प्रमोशन’ की इच्छा को भी सहज अंदाज में स्वीकार कर रहे हैं। ‘पद की रेस नहीं, जनता के मुद्दों पर हो बहस’
सर्वजीत ने राजनीतिक चर्चा का फोकस संगठन और पद से हटाकर जनता के मुद्दों पर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बिहार में आरक्षण, किसानों की समस्या, सुखाड़ और बाढ़ जैसे कई गंभीर सवाल हैं। दबे-कुचले, दलित और पिछड़े वर्ग के अधिकार भी बड़े मुद्दे हैं। इन पर गंभीर बहस और काम की जरूरत है। आरक्षण को लेकर चल रही बहस का भी उन्होंने जिक्र किया। कहा कि आरक्षण की समीक्षा और उसमें बदलाव को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है। आने वाले दिनों में इस पर विस्तार से चर्चा की जरूरत है। सर्वजीत के बयान से एक बात तो साफ है। बेशक वे पार्टी के भरोसेमंद सिपाही हैं पर कुर्सी पर नजर हो सकती है, लेकिन दावा करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में छोड़कर सर्वजीत फिलहाल खुद को सिपाही ही बता रहे हैं।  

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