किशनगंज की रमजान नदी की बदहाली ने 9.87 करोड़ रुपये की सौंदर्याकरण योजना और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी के घाटों पर गंदे पानी और गंदगी की स्थिति सामने आने के बाद अब छठ महापर्व से पहले नदी की सफाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी नदी के घाटों पर छठ व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। ऐसे में सवाल है कि करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद नदी की बदहाली दूर क्यों नहीं हुई और श्रद्धालुओं को स्वच्छ घाट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? रमजान नदी के सौंदर्याकरण के तहत ढेकरारा पुल से माझिया तक करीब 9.5 किलोमीटर क्षेत्र में सर्विस रोड, पेवर ब्लॉक सड़क और छठ घाटों के निर्माण की योजना बनाई गई थी। योजना का उद्देश्य नदी के आसपास के क्षेत्र को बेहतर बनाने के साथ घाटों को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाना भी था। स्कीम के तहत कितने काम हुए यह करना चाहिए स्पष्ट हालांकि, नदी में गंदगी, दुर्गंध और सिकुड़ती जलधारा की स्थिति योजना के वास्तविक लाभ और रखरखाव पर सवाल खड़े करती है। सड़क और घाटों का निर्माण ही सौंदर्याकरण की सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। नदी का पानी गंदा रहे और धार्मिक आयोजनों के दौरान भी सफाई की समस्या बनी रहे, तो योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा जरूरी हो जाती है। संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि योजना के तहत अब तक कितने कार्य पूरे हुए हैं और नदी की सफाई तथा रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग के पास है। घाटों की साफ-सफाई पर भी देना होगा विशेष ध्यान दुर्गा पूजा संपन्न होने के बाद अब छठ महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस दौरान व्रती नदी और जलाशयों में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसे में जल की स्वच्छता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा और जनस्वास्थ्य से भी जुड़ी है। प्रशासन को छठ से पहले विशेष सफाई अभियान चलाकर घाटों से कचरा हटाने, आसपास की गंदगी साफ करने और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित पहुंच मार्ग सुनिश्चित करने की जरूरत है। नदी में गंदा पानी पहुंचने के स्रोतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। केवल अस्थायी सजावट, रोशनी और अन्य व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि घाटों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देना होगा। निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की भी जांच जरूरी रमजान नदी की सिकुड़ती जलधारा, कथित अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नदी की वास्तविक चौड़ाई का सीमांकन कर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और प्रदूषण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। संबंधित विभागों को नदी की वर्तमान स्थिति और सफाई व्यवस्था को लेकर अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, जुलाई में भारी बारिश के बाद सौंदर्याकरण कार्य के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचने की खबरों के मद्देनजर निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की भी जांच जरूरी है। पूजा आयोजनों पर श्रद्धालु खर्च करते लाखों रुपये विभाग को योजना पर खर्च की गई राशि, पूरे और अधूरे कार्यों, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत तथा नियमित सफाई की व्यवस्था से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। रमजान नदी के सौंदर्याकरण पर खर्च किए गए 9.87 करोड़ रुपये का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब नदी की स्थिति में वास्तविक सुधार दिखे और श्रद्धालुओं को स्वच्छ घाट उपलब्ध हों। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान सामने आई स्थिति के बाद छठ महापर्व से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। सवाल यह भी है कि जब मां दुर्गा की आराधना और पूजा आयोजनों पर श्रद्धालु लाखों रुपये खर्च करते हैं, तो प्रतिमा विसर्जन के लिए स्वच्छ घाटों की व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाती? करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद नदी की बदहाली बनी रहना संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग करता है। किशनगंज की रमजान नदी की बदहाली ने 9.87 करोड़ रुपये की सौंदर्याकरण योजना और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान नदी के घाटों पर गंदे पानी और गंदगी की स्थिति सामने आने के बाद अब छठ महापर्व से पहले नदी की सफाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी नदी के घाटों पर छठ व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। ऐसे में सवाल है कि करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद नदी की बदहाली दूर क्यों नहीं हुई और श्रद्धालुओं को स्वच्छ घाट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? रमजान नदी के सौंदर्याकरण के तहत ढेकरारा पुल से माझिया तक करीब 9.5 किलोमीटर क्षेत्र में सर्विस रोड, पेवर ब्लॉक सड़क और छठ घाटों के निर्माण की योजना बनाई गई थी। योजना का उद्देश्य नदी के आसपास के क्षेत्र को बेहतर बनाने के साथ घाटों को श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाना भी था। स्कीम के तहत कितने काम हुए यह करना चाहिए स्पष्ट हालांकि, नदी में गंदगी, दुर्गंध और सिकुड़ती जलधारा की स्थिति योजना के वास्तविक लाभ और रखरखाव पर सवाल खड़े करती है। सड़क और घाटों का निर्माण ही सौंदर्याकरण की सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। नदी का पानी गंदा रहे और धार्मिक आयोजनों के दौरान भी सफाई की समस्या बनी रहे, तो योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा जरूरी हो जाती है। संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि योजना के तहत अब तक कितने कार्य पूरे हुए हैं और नदी की सफाई तथा रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग के पास है। घाटों की साफ-सफाई पर भी देना होगा विशेष ध्यान दुर्गा पूजा संपन्न होने के बाद अब छठ महापर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस दौरान व्रती नदी और जलाशयों में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसे में जल की स्वच्छता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा और जनस्वास्थ्य से भी जुड़ी है। प्रशासन को छठ से पहले विशेष सफाई अभियान चलाकर घाटों से कचरा हटाने, आसपास की गंदगी साफ करने और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित पहुंच मार्ग सुनिश्चित करने की जरूरत है। नदी में गंदा पानी पहुंचने के स्रोतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई भी की जानी चाहिए। केवल अस्थायी सजावट, रोशनी और अन्य व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि घाटों की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देना होगा। निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की भी जांच जरूरी रमजान नदी की सिकुड़ती जलधारा, कथित अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। नदी की वास्तविक चौड़ाई का सीमांकन कर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट करने और प्रदूषण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है। संबंधित विभागों को नदी की वर्तमान स्थिति और सफाई व्यवस्था को लेकर अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, जुलाई में भारी बारिश के बाद सौंदर्याकरण कार्य के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचने की खबरों के मद्देनजर निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की भी जांच जरूरी है। पूजा आयोजनों पर श्रद्धालु खर्च करते लाखों रुपये विभाग को योजना पर खर्च की गई राशि, पूरे और अधूरे कार्यों, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत तथा नियमित सफाई की व्यवस्था से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। रमजान नदी के सौंदर्याकरण पर खर्च किए गए 9.87 करोड़ रुपये का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब नदी की स्थिति में वास्तविक सुधार दिखे और श्रद्धालुओं को स्वच्छ घाट उपलब्ध हों। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान सामने आई स्थिति के बाद छठ महापर्व से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। सवाल यह भी है कि जब मां दुर्गा की आराधना और पूजा आयोजनों पर श्रद्धालु लाखों रुपये खर्च करते हैं, तो प्रतिमा विसर्जन के लिए स्वच्छ घाटों की व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाती? करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद नदी की बदहाली बनी रहना संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग करता है।

