किशनगंज में शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर दिगंबर जैन मुनि श्री 108 अरिजीत सागर जी महाराज के साथ एक धार्मिक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। पूरे रास्ते में धार्मिक नारे और भजन गूंजते रहे, जिससे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया। जुलूस में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कई श्रद्धालुओं ने दशलक्षण पर्व के दौरान तपस्या और व्रत रखे थे। समाज के लोगों ने बताया कि कुछ श्रद्धालुओं ने तीन दिन का तेला व्रत रखा, जबकि कुछ ने लगातार 10 दिनों तक बिना कुछ खाए साधना की। इन तपस्वियों को जुलूस में खास सम्मान दिया गया। आत्मशुद्धि, क्षमा, सत्य, संयम और त्याग का संदेश व्रत रखने वाले इन लोगों को रथों और सजे हुए वाहनों में बैठाकर झांकियों के रूप में दिखाया गया। ये झांकियां लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र थीं। जुलूस में लोग भगवान महावीर और जैन धर्म के नारे लगाते हुए चल रहे थे। रास्ते में कई जगहों पर लोगों ने तपस्वियों का स्वागत किया और उनके त्याग के लिए सम्मान जताया। समाज के बड़े सदस्यों ने बताया कि दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि, क्षमा, सत्य, संयम और त्याग का संदेश देता है। अनंत चतुर्दशी को इस पर्व का आखिरी दिन माना जाता है। सुख-समृद्धि की कामना की इस धार्मिक कार्यक्रम में महिलाएं, युवा और बच्चे भी शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और भक्ति का माहौल बना रहा। मुनि श्री 108 अरिजीत सागर जी महाराज के साथ हुए इस जुलूस से जैन समाज की धार्मिक आस्था और परंपरा को बढ़ावा मिला। अनंत चतुर्दशी का यह आयोजन तपस्या और धर्म के प्रति समर्पण का एक उदाहरण बना। जुलूस खत्म होने पर लोगों ने धर्म की प्रार्थना की और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। इस पूरे आयोजन से शहर में धार्मिक माहौल और मजबूत हुआ। किशनगंज में शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर दिगंबर जैन मुनि श्री 108 अरिजीत सागर जी महाराज के साथ एक धार्मिक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। पूरे रास्ते में धार्मिक नारे और भजन गूंजते रहे, जिससे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया। जुलूस में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कई श्रद्धालुओं ने दशलक्षण पर्व के दौरान तपस्या और व्रत रखे थे। समाज के लोगों ने बताया कि कुछ श्रद्धालुओं ने तीन दिन का तेला व्रत रखा, जबकि कुछ ने लगातार 10 दिनों तक बिना कुछ खाए साधना की। इन तपस्वियों को जुलूस में खास सम्मान दिया गया। आत्मशुद्धि, क्षमा, सत्य, संयम और त्याग का संदेश व्रत रखने वाले इन लोगों को रथों और सजे हुए वाहनों में बैठाकर झांकियों के रूप में दिखाया गया। ये झांकियां लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र थीं। जुलूस में लोग भगवान महावीर और जैन धर्म के नारे लगाते हुए चल रहे थे। रास्ते में कई जगहों पर लोगों ने तपस्वियों का स्वागत किया और उनके त्याग के लिए सम्मान जताया। समाज के बड़े सदस्यों ने बताया कि दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि, क्षमा, सत्य, संयम और त्याग का संदेश देता है। अनंत चतुर्दशी को इस पर्व का आखिरी दिन माना जाता है। सुख-समृद्धि की कामना की इस धार्मिक कार्यक्रम में महिलाएं, युवा और बच्चे भी शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और भक्ति का माहौल बना रहा। मुनि श्री 108 अरिजीत सागर जी महाराज के साथ हुए इस जुलूस से जैन समाज की धार्मिक आस्था और परंपरा को बढ़ावा मिला। अनंत चतुर्दशी का यह आयोजन तपस्या और धर्म के प्रति समर्पण का एक उदाहरण बना। जुलूस खत्म होने पर लोगों ने धर्म की प्रार्थना की और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। इस पूरे आयोजन से शहर में धार्मिक माहौल और मजबूत हुआ।

