बिहार में SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच अब एनडीए के सहयोगी दल ने ही सवाल खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि SIR से संबंधित हालिया मीडिया रिपोर्टों के बाद आम लोगों में भ्रम और उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में चुनाव आयोग को अविलंब वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों का कंफ्यूजन दूर हो सके। कुशवाहा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब निजी चैनल द्वारा जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग पर कई सवाल खड़े किये गए है। रिपोर्ट में SIR से जुड़े कई फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। कुशवाहा बोले- जनता के बीच भ्रम की स्थिति उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हाल में मीडिया के जरिए SIR से संबंधित जो बातें सामने आई हैं, उससे आम लोगों में उलझन पैदा हुई है। उनका कहना है कि इस विषय में वास्तविक स्थिति चुनाव आयोग ही स्पष्ट कर सकता है। कुशवाहा ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि पूरे मामले को लेकर तत्काल स्थिति साफ की जाए और आम लोगों को वास्तविक तथ्यों से अवगत कराया जाए। Form 6 में बदलाव पर उठी कानूनी आपत्ति SIR से जुड़ा एक प्रमुख मुद्दा नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव का है। जांच रिपोर्ट के अनुसार Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से जुड़ी एक घोषणा जोड़ी गई थी, जिसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता/दादा-दादी के पिछले SIR की मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी और कहा था कि Form 6 वैधानिक नियमों में निर्धारित है। इसमें बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन और सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस पर सहमति जताई थी। बाद में संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को रिकॉर्ड पर ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताते हुए इसे तत्काल हटाने की बात कही थी। बिहार में SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच अब एनडीए के सहयोगी दल ने ही सवाल खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने भी चुनाव आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि SIR से संबंधित हालिया मीडिया रिपोर्टों के बाद आम लोगों में भ्रम और उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में चुनाव आयोग को अविलंब वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि लोगों का कंफ्यूजन दूर हो सके। कुशवाहा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब निजी चैनल द्वारा जांच रिपोर्ट में चुनाव आयोग पर कई सवाल खड़े किये गए है। रिपोर्ट में SIR से जुड़े कई फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। कुशवाहा बोले- जनता के बीच भ्रम की स्थिति उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हाल में मीडिया के जरिए SIR से संबंधित जो बातें सामने आई हैं, उससे आम लोगों में उलझन पैदा हुई है। उनका कहना है कि इस विषय में वास्तविक स्थिति चुनाव आयोग ही स्पष्ट कर सकता है। कुशवाहा ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि पूरे मामले को लेकर तत्काल स्थिति साफ की जाए और आम लोगों को वास्तविक तथ्यों से अवगत कराया जाए। Form 6 में बदलाव पर उठी कानूनी आपत्ति SIR से जुड़ा एक प्रमुख मुद्दा नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में किए गए बदलाव का है। जांच रिपोर्ट के अनुसार Form 6 के ऑनलाइन संस्करण में SIR से जुड़ी एक घोषणा जोड़ी गई थी, जिसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता/दादा-दादी के पिछले SIR की मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी और कहा था कि Form 6 वैधानिक नियमों में निर्धारित है। इसमें बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन और सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस पर सहमति जताई थी। बाद में संधू ने 13 अगस्त को इस बदलाव को रिकॉर्ड पर ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताते हुए इसे तत्काल हटाने की बात कही थी।

