करनाल के मुनक थाना क्षेत्र में एक गांव में नाबालिग लड़की से शारीरिक संबंध बनाने के मामले में पुलिस ने एक युवक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। मामला तब सामने आया, जब 24 सितंबर को गांव में एक नवजात बच्चा लावारिस हालत में मिली थी। बच्चे को ग्रामीणों ने जांच के लिए अस्पताल पहुंचाया। बाद में सामने आया कि बच्चे की मां की उम्र 18 वर्ष से कम है। बाल कल्याण समिति के हस्तक्षेप के बाद नाबालिग ने अपने बयान में युवक पर संबंध बनाने की बात कही। इसके आधार पर मुनक थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। 24 सितंबर को नवजात बच्ची मिलने की सूचना
जिला बाल कल्याण समिति करनाल की ओर से मुनक थाना प्रभारी को भेजे गए पत्र के अनुसार, 24 सितंबर को बल्ला करनाल की चिकित्सा अधिकारी ने समिति के अध्यक्ष को फोन पर सूचना दी कि मुनक गांव में किसी व्यक्ति के घर के पास एक नवजात बच्चा लावारिस हालत में मिला है। ग्रामीणों ने बच्चे को सामान्य जांच के लिए सिविल अस्पताल पहुंचाया था।
सूत्रों के अनुसार, सूचना मिलने के बाद बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने मेडिकल ऑफिसर को मौखिक निर्देश दिए कि बच्चे की हालत सामान्य होने के बाद उसे बाल कल्याण समिति करनाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद थाना मुनक प्रभारी ने भी समिति को बताया कि बच्चे को इलाज के लिए सिविल अस्पताल करनाल में भर्ती कराया गया है। मां भी अस्पताल में भर्ती मिली
सूत्रों के अनुसार, समिति को सूचना दी गई कि बच्चे की मां की उम्र 18 वर्ष से कम है। वह भी सिविल अस्पताल करनाल में इलाज के लिए भर्ती है। इसके बाद बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष की एक सदस्य को 25 सितंबर को सिविल अस्पताल भेजा गया। समिति के अनुसार, अस्पताल में नाबालिग ने सदस्य के सामने अपने हाथ से लिखित बयान दिया। बयान में उसने कहा कि उसके साथ गलत काम करने वाले युवक का नाम राहुल है। उसने यह भी कहा कि राहुल और उसकी मर्जी से संबंध बने थे और वह अपनी मर्जी से गर्भवती हुई। नाबालिग ने अपने माता-पिता के पास रहने की बात कहते हुए आगे कोई कार्रवाई नहीं कराने की इच्छा जताई। समिति ने पॉक्सो के तहत कार्रवाई को जरूरी बताया
सूत्रों के अनुसार, बाल कल्याण समिति ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के साथ लैंगिक अपराध होने पर पॉक्सो अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं। समिति ने बताया कि इस कानून में बच्चे की सहमति को अपराध से बचाव का आधार नहीं माना जाता।
पत्र में पॉक्सो अधिनियम की धारा 3 में प्रवेशन लैंगिक हमला और धारा 5 में गुरुतर लैंगिक हमले की परिभाषा का उल्लेख किया गया है। समिति ने कहा कि बच्चे की सहमति से भी यौन शोषण होने पर वह कानून के तहत अपराध है। अपराध की जांच और कार्रवाई पुलिस विभाग का दायित्व है। बाल कल्याण समिति ने पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए
समिति ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को बच्चे के साथ इस अधिनियम के तहत अपराध की जानकारी मिलती है तो उसे तुरंत विशेष किशोर पुलिस इकाई या स्थानीय पुलिस को सूचना देनी चाहिए। धारा 21 में अपराध की सूचना नहीं देने को भी दंडनीय बताया गया है।
पत्र में बाल न्याय अधिनियम की धारा 30(2) और 30(15) का भी उल्लेख किया गया। समिति के अनुसार, धारा 30(2) के तहत बाल कल्याण समिति का दायित्व बच्चे की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है, जबकि धारा 30(15) के तहत पुलिस और अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित करना समिति के कार्यों में शामिल है। इसी आधार पर समिति ने आरोपी राहुल के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने और कार्रवाई की रिपोर्ट समिति के साथ साझा करने के लिए पुलिस को पत्र भेजा। 25 सितंबर को दर्ज हुआ केस
पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी राहुल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत मामला दर्ज किया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

