औरंगाबाद में रेलवे लाइन के रूट पर किसानों का विरोध:बोले-खेतों के बीच से नहीं गुजरने देंगे, 50 एकड़ से अधिक जमीन प्रभावित होने की आशंका

औरंगाबाद में रेलवे लाइन के रूट पर किसानों का विरोध:बोले-खेतों के बीच से नहीं गुजरने देंगे, 50 एकड़ से अधिक जमीन प्रभावित होने की आशंका

अनुग्रह नारायण रोड से औरंगाबाद टर्मिनल होते हुए सीमेंट प्लांट तक प्रस्तावित रेलवे लाइन को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। जगदीशपुर और जोकहरी गांव के दर्जनों किसान शुक्रवार को समाहरणालय पहुंचे। उन्होंने डीएम अभिलाषा शर्मा और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी शार्दूल हसन खां को आवेदन देकर रेलवे लाइन के मौजूदा रूट पर आपत्ति जताई और इसे बदलने की मांग की। किसानों का आरोप है कि एक निजी सीमेंट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। खेतों के बीच से लाइन गुजरने पर जताई आपत्ति किसानों का नेतृत्व कर रहे रामकरण सिंह ने कहा कि प्रस्तावित रेलवे लाइन जगदीशपुर और जोकहरी गांव के खेतों के बीच से निकाली जा रही है। इससे किसानों की जमीन दो हिस्सों में बंट जाएगी और खेती करना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि इस फैसले से हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है, लेकिन उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसानों ने सवाल उठाया कि जब रेलवे लाइन के लिए दूसरे रास्तों पर विचार किया जा सकता है तो कृषि भूमि से ही लाइन निकालने की योजना क्यों बनाई जा रही है? उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी निजी कंपनी के व्यावसायिक फायदे के लिए किसानों की जमीन और रोजी-रोटी को संकट में नहीं डालना चाहिए। भू-अर्जन के नोटिस में गड़बड़ी का आरोप किसानों ने जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से जारी जमीन अधिग्रहण के नोटिस पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि तीन दिन पहले उन्हें नोटिस मिला है, लेकिन जमीन की विधिवत नापी-पैमाइश किए बिना ही इसे जारी कर दिया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि मापी के दौरान उन्हें मौजूद नहीं रखा गया। कुछ किसानों का यह भी कहना है कि नोटिस में उनकी जमीन का विवरण दूसरे लोगों के नाम पर दर्ज है। किसानों के मुताबिक, कृषि ही उनके परिवारों की आय का मुख्य साधन है। रेलवे लाइन बनने से खेत छोटे-छोटे हिस्सों में बंट जाएंगे। सिंचाई के लिए नहर का पानी पहुंचाने में भी परेशानी होगी। इससे 50 एकड़ से अधिक कृषि भूमि प्रभावित होने और खेती मुश्किल होने की आशंका है। रूट नहीं बदला तो आंदोलन करेंगे किसान किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलवे लाइन का रूट जगदीशपुर और जोकहरी की कृषि भूमि से हटाकर किसी दूसरे रास्ते से तय किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे हाईकोर्ट जाएंगे और परिवार के साथ चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। किसानों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन और भविष्य की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे, लेकिन मौजूदा नक्शे के अनुसार रेलवे लाइन नहीं गुजरने देंगे। अब किसानों की आपत्तियों पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के फैसले का इंतजार है। अनुग्रह नारायण रोड से औरंगाबाद टर्मिनल होते हुए सीमेंट प्लांट तक प्रस्तावित रेलवे लाइन को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। जगदीशपुर और जोकहरी गांव के दर्जनों किसान शुक्रवार को समाहरणालय पहुंचे। उन्होंने डीएम अभिलाषा शर्मा और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी शार्दूल हसन खां को आवेदन देकर रेलवे लाइन के मौजूदा रूट पर आपत्ति जताई और इसे बदलने की मांग की। किसानों का आरोप है कि एक निजी सीमेंट कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। खेतों के बीच से लाइन गुजरने पर जताई आपत्ति किसानों का नेतृत्व कर रहे रामकरण सिंह ने कहा कि प्रस्तावित रेलवे लाइन जगदीशपुर और जोकहरी गांव के खेतों के बीच से निकाली जा रही है। इससे किसानों की जमीन दो हिस्सों में बंट जाएगी और खेती करना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि इस फैसले से हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है, लेकिन उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसानों ने सवाल उठाया कि जब रेलवे लाइन के लिए दूसरे रास्तों पर विचार किया जा सकता है तो कृषि भूमि से ही लाइन निकालने की योजना क्यों बनाई जा रही है? उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का वे विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसी निजी कंपनी के व्यावसायिक फायदे के लिए किसानों की जमीन और रोजी-रोटी को संकट में नहीं डालना चाहिए। भू-अर्जन के नोटिस में गड़बड़ी का आरोप किसानों ने जिला भू-अर्जन कार्यालय की ओर से जारी जमीन अधिग्रहण के नोटिस पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि तीन दिन पहले उन्हें नोटिस मिला है, लेकिन जमीन की विधिवत नापी-पैमाइश किए बिना ही इसे जारी कर दिया गया। किसानों ने आरोप लगाया कि मापी के दौरान उन्हें मौजूद नहीं रखा गया। कुछ किसानों का यह भी कहना है कि नोटिस में उनकी जमीन का विवरण दूसरे लोगों के नाम पर दर्ज है। किसानों के मुताबिक, कृषि ही उनके परिवारों की आय का मुख्य साधन है। रेलवे लाइन बनने से खेत छोटे-छोटे हिस्सों में बंट जाएंगे। सिंचाई के लिए नहर का पानी पहुंचाने में भी परेशानी होगी। इससे 50 एकड़ से अधिक कृषि भूमि प्रभावित होने और खेती मुश्किल होने की आशंका है। रूट नहीं बदला तो आंदोलन करेंगे किसान किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलवे लाइन का रूट जगदीशपुर और जोकहरी की कृषि भूमि से हटाकर किसी दूसरे रास्ते से तय किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे हाईकोर्ट जाएंगे और परिवार के साथ चरणबद्ध आंदोलन करेंगे। किसानों ने साफ कहा कि वे अपनी जमीन और भविष्य की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे, लेकिन मौजूदा नक्शे के अनुसार रेलवे लाइन नहीं गुजरने देंगे। अब किसानों की आपत्तियों पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के फैसले का इंतजार है।  

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