औरंगाबाद के देव थाना क्षेत्र अंतर्गत दधपा गांव के रहने वाले 78 वर्षीय बैजनाथ तिवारी का शव बुधवार की सुबह टेकारी नदी से बरामद कर लिया गया। करीब 24 घंटे तक चले खोजबीन अभियान के बाद नदी किनारे बांस के पेड़ में फंसा उनका शव ग्रामीणों ने देखा। शव मिलने की सूचना गांव में फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गयी। ग्रामीणों ने नदी में उतरकर शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद भेज दिया। जानकारी के अनुसार, बैजनाथ तिवारी मंगलवार की सुबह घर से खेत की ओर निकले थे। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। इसी दौरान नदी के किनारे उनका चप्पल और डंडा मिला। इससे उनके नदी में डूबने की आशंका हुई। परिजनों और ग्रामीणों ने इसकी सूचना देव थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में तलाश शुरू करायी गयी। स्थानीय गोताखोरों ने ढूंढ़कर निकाला मंगलवार की सुबह से ही स्थानीय गोताखोरों की टीम ने नदी में सघन तलाशी अभियान चलाया। टीम ने नदी के विभिन्न हिस्सों में काफी देर तक खोजबीन की, लेकिन वृद्ध का कोई सुराग नहीं मिला। देर शाम करीब साढ़े छह बजे तक तलाश जारी रही। अंधेरा होने के कारण मंगलवार की शाम खोजबीन रोक दी गयी। बुधवार की सुबह फिर से तलाशी अभियान शुरू करने की तैयारी थी।इसी बीच बुधवार की सुबह नदी की ओर पहुंचे ग्रामीणों की नजर नदी किनारे बांस के पेड़ में फंसे शव पर पड़ी। इसके बाद ग्रामीणों ने नदी में उतरकर शव को बाहर निकाला। शव की पहचान बैजनाथ तिवारी के रूप में हुई। मृतक के पुत्र श्रवण कुमार तिवारी ने बताया कि उनके पिता सुबह शौच के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान पैर फिसलने से वह नदी में गिर गये और डूबने से उनकी मौत हो गयी। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से आपदा राहत कोष के तहत मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है। औरंगाबाद के देव थाना क्षेत्र अंतर्गत दधपा गांव के रहने वाले 78 वर्षीय बैजनाथ तिवारी का शव बुधवार की सुबह टेकारी नदी से बरामद कर लिया गया। करीब 24 घंटे तक चले खोजबीन अभियान के बाद नदी किनारे बांस के पेड़ में फंसा उनका शव ग्रामीणों ने देखा। शव मिलने की सूचना गांव में फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गयी। ग्रामीणों ने नदी में उतरकर शव को बाहर निकाला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद भेज दिया। जानकारी के अनुसार, बैजनाथ तिवारी मंगलवार की सुबह घर से खेत की ओर निकले थे। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी खोजबीन शुरू की। इसी दौरान नदी के किनारे उनका चप्पल और डंडा मिला। इससे उनके नदी में डूबने की आशंका हुई। परिजनों और ग्रामीणों ने इसकी सूचना देव थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में तलाश शुरू करायी गयी। स्थानीय गोताखोरों ने ढूंढ़कर निकाला मंगलवार की सुबह से ही स्थानीय गोताखोरों की टीम ने नदी में सघन तलाशी अभियान चलाया। टीम ने नदी के विभिन्न हिस्सों में काफी देर तक खोजबीन की, लेकिन वृद्ध का कोई सुराग नहीं मिला। देर शाम करीब साढ़े छह बजे तक तलाश जारी रही। अंधेरा होने के कारण मंगलवार की शाम खोजबीन रोक दी गयी। बुधवार की सुबह फिर से तलाशी अभियान शुरू करने की तैयारी थी।इसी बीच बुधवार की सुबह नदी की ओर पहुंचे ग्रामीणों की नजर नदी किनारे बांस के पेड़ में फंसे शव पर पड़ी। इसके बाद ग्रामीणों ने नदी में उतरकर शव को बाहर निकाला। शव की पहचान बैजनाथ तिवारी के रूप में हुई। मृतक के पुत्र श्रवण कुमार तिवारी ने बताया कि उनके पिता सुबह शौच के लिए घर से निकले थे। इसी दौरान पैर फिसलने से वह नदी में गिर गये और डूबने से उनकी मौत हो गयी। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से आपदा राहत कोष के तहत मृतक के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की है।

