औरंगाबाद के सागर ने ईजाद किया सेल्फ-हीटिंग फूड टेक्नोलॉजी:बिना गैस, आग आराम से बन सकेगी चाय, कॉफी, नूडल्स; इंटर सेकेंड इयर के हैं स्टूडेंट

औरंगाबाद के सागर ने ईजाद किया सेल्फ-हीटिंग फूड टेक्नोलॉजी:बिना गैस, आग आराम से बन सकेगी चाय, कॉफी, नूडल्स; इंटर सेकेंड इयर के हैं स्टूडेंट

औरंगाबाद जिले के हसपुरा के रहने वाले इंटर सेकेंड इयर के छात्र और युवा उद्यमी सागर कुमार ने बिना गैस, बिजली या लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन के चाय, कॉफी और नूडल्स जैसे खाद्य पदार्थ तैयार करने की तकनीक विकसित करने की दिशा में पहल की है। सागर ने टिफिन के आकार का एक उपकरण तैयार किया है, जिसमें रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से गर्मी उत्पन्न होती है। सागर के अनुसार, इस तकनीक की मदद से करीब 10 मिनट में पानी को लगभग 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जा सकता है। हॉस्टल की परेशानी से आया आइडिया सागर के अनुसार, पटना में हॉस्टल में रहने के दौरान रात में पढ़ाई करते समय चाय या मैगी खाने का मन करता था। लेकिन हॉस्टल में गैस या हीटर जलाने की अनुमति नहीं थी। इसी समस्या ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि सियाचिन ग्लेशियर और देश के दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवानों को भी कठिन परिस्थितियों में भोजन गर्म करने में परेशानी होती होगी। इसी सोच के बाद उन्होंने बिना आग या पारंपरिक ईंधन के भोजन गर्म करने की तकनीक तलाशनी शुरू की। इंटरनेट पर शोध के दौरान उन्हें जापान की एक्सोथर्मिक हाइड्रेशन तकनीक के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए इस तकनीक को समझने और अपने स्तर पर विकसित करने का प्रयास शुरू किया। करीब छह महीने तक परीक्षण और प्रयोग करने के बाद तकनीक को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान उन्होंने करीब 50 हजार रुपये खर्च किए हैं। उनके अनुसार, अब तक उन्हें इस काम के लिए कहीं से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। ‘सिपजो’ नाम से विकसित किया प्रोडक्ट सागर कुमार ने अपने प्रोडक्ट का नाम ‘सिपजो’ रखा है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य यात्रा, छात्रावास, कार्यस्थल, आपदा और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में आसानी से गर्म भोजन और पेय उपलब्ध कराना है, जहां गैस, बिजली या अन्य ईंधन की व्यवस्था नहीं हो पाती। प्रारंभिक नमूने का 100 से अधिक लोगों के बीच प्रत्यक्ष ग्राहक परीक्षण भी किया जा चुका है। सागर ने बताया कि इस तकनीक का पेटेंट भी कराया गया है। उनके स्टार्टअप का चयन आईआईटी पटना, एआईसी-नालंदा, इनक्यूबिन फाउंडेशन और एमटीआर विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र से जुड़े स्टार्टअप एवं नवाचार कार्यक्रमों में आगे के अनुसंधान, मार्गदर्शन और उद्यम विकास के लिए हुआ है। सागर का लक्ष्य स्वयं गर्म होने वाले भोजन और पेय की उपयोगी एवं सुरक्षित तकनीक विकसित करना है। उनका मानना है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी मार्गदर्शन, अनुसंधान सुविधाएं और बाजार उपलब्ध हों तो वे भी राष्ट्रीय स्तर के स्टार्टअप खड़े कर सकते हैं। साइकिल दुकान चलाते हैं सागर के पिता सागर एक साधारण परिवार से आता है। उसके पिता महेश हसपुरा बाजार में ही साइकिल दुकान चलाते हैं। जबकि मां अंजू देवी हाउसवाइफ है। सागर शुरू से ही विलक्षण प्रतिभा का है। स्कूल के पढ़ाई के दौरान भी उसने कई ऐसे प्रोजेक्ट बनाए हैं जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। पांचवी कक्षा में एस फोर हंड्रेड का वर्किंग मॉडल तैयार किया था। जिसका मारक क्षमता 50 मीटर था।नौवीं कक्षा में भी 100 मीटर मारक क्षमता वाला रॉकेट लांचर तैयार किया था। सेल्फ-हीटिंग फूड टेक्नोलॉजी के लिए मिलेंगे 2 लाख युवा उद्यमी सागर कुमार की अभिनव पहल का चयन आईआईटी पटना के इन्क्यूबेशन सेंटर ने किया है। सागर को 12 महीने के प्री-इन्क्यूबेशन प्रोग्राम में शामिल होने के लिए ऑफर लेटर जारी किया गया है। 17 जून 2026 को जारी पत्र के अनुसार उनके प्रोजेक्ट “A Portable Self-Heating Food Technology Platform” का चयन किया गया है। सागर की विकसित की जा रही तकनीक के माध्यम से स्मार्ट पैकेजिंग और हीट-जेनरेशन सिस्टम की मदद से मांग के अनुसार गर्म भोजन और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य यात्रियों, विद्यार्थियों और ऐसे लोगों के लिए भोजन-पेय को सुविधाजनक बनाना है, जहां गैस, बिजली या अन्य पारंपरिक ईंधन की उपलब्धता नहीं होती। मिलेंगे दो लाख तक का प्रोटोटाइप ग्रांट आईआईटी पटना के इन्क्यूबेशन सेंटर की ओर से सागर को दो लाख रुपये तक का प्रोटोटाइप ग्रांट दिया जाएगा। यह राशि किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा उन्हें विशेषज्ञ मेंटरशिप, हैंडहोल्डिंग, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट और फंड रेजिंग में सहयोग के साथ इन्क्यूबेशन सेंटर की आधारभूत सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। यह चयन एक जुलाई में आयोजित प्री-इन्क्यूबेशन प्रपोजल इवैल्यूएशन मीटिंग के बाद किया गया। इन्क्यूबेशन सेंटर के जनरल मैनेजर जोसेफ पॉल अरक्कलन ने सागर को उनके उद्यमशील प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दी हैं। ऑफर को 30 जुलाई तक स्वीकार करना था। सागर के चयन से जिले के युवा उद्यमियों में उत्साह है। औरंगाबाद जिले के हसपुरा के रहने वाले इंटर सेकेंड इयर के छात्र और युवा उद्यमी सागर कुमार ने बिना गैस, बिजली या लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन के चाय, कॉफी और नूडल्स जैसे खाद्य पदार्थ तैयार करने की तकनीक विकसित करने की दिशा में पहल की है। सागर ने टिफिन के आकार का एक उपकरण तैयार किया है, जिसमें रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से गर्मी उत्पन्न होती है। सागर के अनुसार, इस तकनीक की मदद से करीब 10 मिनट में पानी को लगभग 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जा सकता है। हॉस्टल की परेशानी से आया आइडिया सागर के अनुसार, पटना में हॉस्टल में रहने के दौरान रात में पढ़ाई करते समय चाय या मैगी खाने का मन करता था। लेकिन हॉस्टल में गैस या हीटर जलाने की अनुमति नहीं थी। इसी समस्या ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि सियाचिन ग्लेशियर और देश के दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवानों को भी कठिन परिस्थितियों में भोजन गर्म करने में परेशानी होती होगी। इसी सोच के बाद उन्होंने बिना आग या पारंपरिक ईंधन के भोजन गर्म करने की तकनीक तलाशनी शुरू की। इंटरनेट पर शोध के दौरान उन्हें जापान की एक्सोथर्मिक हाइड्रेशन तकनीक के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए इस तकनीक को समझने और अपने स्तर पर विकसित करने का प्रयास शुरू किया। करीब छह महीने तक परीक्षण और प्रयोग करने के बाद तकनीक को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान उन्होंने करीब 50 हजार रुपये खर्च किए हैं। उनके अनुसार, अब तक उन्हें इस काम के लिए कहीं से आर्थिक सहायता नहीं मिली है। ‘सिपजो’ नाम से विकसित किया प्रोडक्ट सागर कुमार ने अपने प्रोडक्ट का नाम ‘सिपजो’ रखा है। उनके अनुसार इसका उद्देश्य यात्रा, छात्रावास, कार्यस्थल, आपदा और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में आसानी से गर्म भोजन और पेय उपलब्ध कराना है, जहां गैस, बिजली या अन्य ईंधन की व्यवस्था नहीं हो पाती। प्रारंभिक नमूने का 100 से अधिक लोगों के बीच प्रत्यक्ष ग्राहक परीक्षण भी किया जा चुका है। सागर ने बताया कि इस तकनीक का पेटेंट भी कराया गया है। उनके स्टार्टअप का चयन आईआईटी पटना, एआईसी-नालंदा, इनक्यूबिन फाउंडेशन और एमटीआर विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र से जुड़े स्टार्टअप एवं नवाचार कार्यक्रमों में आगे के अनुसंधान, मार्गदर्शन और उद्यम विकास के लिए हुआ है। सागर का लक्ष्य स्वयं गर्म होने वाले भोजन और पेय की उपयोगी एवं सुरक्षित तकनीक विकसित करना है। उनका मानना है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को तकनीकी मार्गदर्शन, अनुसंधान सुविधाएं और बाजार उपलब्ध हों तो वे भी राष्ट्रीय स्तर के स्टार्टअप खड़े कर सकते हैं। साइकिल दुकान चलाते हैं सागर के पिता सागर एक साधारण परिवार से आता है। उसके पिता महेश हसपुरा बाजार में ही साइकिल दुकान चलाते हैं। जबकि मां अंजू देवी हाउसवाइफ है। सागर शुरू से ही विलक्षण प्रतिभा का है। स्कूल के पढ़ाई के दौरान भी उसने कई ऐसे प्रोजेक्ट बनाए हैं जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। पांचवी कक्षा में एस फोर हंड्रेड का वर्किंग मॉडल तैयार किया था। जिसका मारक क्षमता 50 मीटर था।नौवीं कक्षा में भी 100 मीटर मारक क्षमता वाला रॉकेट लांचर तैयार किया था। सेल्फ-हीटिंग फूड टेक्नोलॉजी के लिए मिलेंगे 2 लाख युवा उद्यमी सागर कुमार की अभिनव पहल का चयन आईआईटी पटना के इन्क्यूबेशन सेंटर ने किया है। सागर को 12 महीने के प्री-इन्क्यूबेशन प्रोग्राम में शामिल होने के लिए ऑफर लेटर जारी किया गया है। 17 जून 2026 को जारी पत्र के अनुसार उनके प्रोजेक्ट “A Portable Self-Heating Food Technology Platform” का चयन किया गया है। सागर की विकसित की जा रही तकनीक के माध्यम से स्मार्ट पैकेजिंग और हीट-जेनरेशन सिस्टम की मदद से मांग के अनुसार गर्म भोजन और पेय पदार्थ उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य यात्रियों, विद्यार्थियों और ऐसे लोगों के लिए भोजन-पेय को सुविधाजनक बनाना है, जहां गैस, बिजली या अन्य पारंपरिक ईंधन की उपलब्धता नहीं होती। मिलेंगे दो लाख तक का प्रोटोटाइप ग्रांट आईआईटी पटना के इन्क्यूबेशन सेंटर की ओर से सागर को दो लाख रुपये तक का प्रोटोटाइप ग्रांट दिया जाएगा। यह राशि किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा उन्हें विशेषज्ञ मेंटरशिप, हैंडहोल्डिंग, प्रोटोटाइप डेवलपमेंट और फंड रेजिंग में सहयोग के साथ इन्क्यूबेशन सेंटर की आधारभूत सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा। यह चयन एक जुलाई में आयोजित प्री-इन्क्यूबेशन प्रपोजल इवैल्यूएशन मीटिंग के बाद किया गया। इन्क्यूबेशन सेंटर के जनरल मैनेजर जोसेफ पॉल अरक्कलन ने सागर को उनके उद्यमशील प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दी हैं। ऑफर को 30 जुलाई तक स्वीकार करना था। सागर के चयन से जिले के युवा उद्यमियों में उत्साह है।  

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