अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्र संघ की बहाली और उसके चुनाव की घोषणा कराने की मांग को लेकर चल रहा छात्रों का धरना और छात्र यासिर की भूख हड़ताल सोमवार को आठवें दिन भी जारी रही। सोमवार दोपहर करीब तीन बजे लॉ फैकल्टी के करीब 200-250 छात्र आंदोलन के समर्थन में उतर आए। छात्रों ने पहले बाबे सैयद पर एकत्र होकर नारेबाजी की और वहां से जुलूस निकालते हुए डक प्वाइंट स्थित धरना स्थल पर पहुंचे। यहां छात्रों ने आंदोलन और भूख हड़ताल को अपना समर्थन दिया।
छात्रों ने कहा कि उनकी मांगें स्पष्ट हैं। एएमयू छात्र संघ की बहाली के साथ उसके चुनाव की घोषणा की जाए और भूख हड़ताल पर बैठे छात्र यासिर के निलंबन को वापस लिया जाए। छात्रों का कहना था कि जब तक दोनों मांगों को लेकर विश्वविद्यालय स्तर से आदेश नहीं होता, तब तक धरना और आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक करने की बात भी छात्रों ने कही।
‘मांगें पूरी होने तक कैंपस के सभी छात्र जुड़ेंगे’
समर्थन देने पहुंचे लॉ फैकल्टी के छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक छात्र या एक फैकल्टी तक सीमित नहीं है। छात्र संघ यूनियन की बहाली और चुनाव की घोषणा पूरे छात्र समुदाय की मांग है। छात्रों ने कहा कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन लगातार बड़ा किया जाएगा और कैंपस की अन्य फैकल्टी के छात्रों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।
रात में पुलिस से कहासुनी के बाद डक प्वाइंट पर बढ़ा तनाव
इधर, रविवार रात डक प्वाइंट पर पुलिस और छात्रों के बीच सड़क पर धरना देने तथा आवागमन बाधित होने को लेकर कहासुनी हुई। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस ने छात्रों को सड़क पर धरना देने और रास्ता बाधित नहीं करने को लेकर रोक-टोक की। इसको लेकर छात्रों और पुलिस के बीच नाराजगी की स्थिति बनी।
इसके बाद छात्रों ने डक प्वाइंट के दोनों ओर बाइकें खड़ी कर घेराबंदी कर दी। इससे डक प्वाइंट वाले रास्ते से आवागमन भी बंद हो गया। सोमवार को दिनभर धरना स्थल पर छात्रों की मौजूदगी रही और लॉ फैकल्टी के छात्रों के समर्थन के बाद आंदोलन में संख्या और बढ़ गई।
आठ दिन से भूख हड़ताल पर यासिर
छात्र यासिर छात्र संघ की बहाली समेत अपनी मांगों को लेकर आठ दिन से भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक छात्र संघ की बहाली और चुनाव की घोषणा नहीं होती तथा यासिर के निलंबन को वापस लेने का आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। सोमवार को लॉ फैकल्टी के छात्रों के समर्थन के बाद आंदोलनकारियों ने इसे और व्यापक रूप देने का ऐलान किया।

