इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस, बॉम्बे हाईकोर्ट में होगी सुनवाई; केंद्र की ओर से तुषार मेहता रखेंगे पक्ष

इमरान खान को देश छोड़ने का नोटिस, बॉम्बे हाईकोर्ट में होगी सुनवाई; केंद्र की ओर से तुषार मेहता रखेंगे पक्ष

Imran Khan News: अभिनेता इमरान खान को जारी ‘लीव इंडिया नोटिस’ का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुंबई के विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) की ओर से जारी इस नोटिस को अभिनेता ने अदालत में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर आज दोपहर 3 बजे सुनवाई होनी है। यह मामला मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से जुड़ा है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी की अगुवाई वाली पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में पेश होंगे। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सामने आने की उम्मीद है।

CEC के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा मामला

यह विवाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में इमरान खान की भागीदारी से जुड़ा बताया गया है। FRRO ने उन्हें ‘लीव इंडिया नोटिस’ जारी किया था। अभिनेता ने इस कदम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

हालांकि, नोटिस जारी करने के पीछे क्या-क्या आधार दिए गए हैं और इमरान खान ने अपनी याचिका में कौन से सवाल उठाए हैं, इसका पूरा ब्योरा अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में अदालत में होने वाली सुनवाई से मामले के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार भी रखेगी अपना पक्ष

इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से तुषार मेहता के पेश होने को अहम माना जा रहा है। सुनवाई के दौरान सरकार नोटिस जारी करने से जुड़े अपने पक्ष को रख सकती है। वहीं, इमरान खान की ओर से नोटिस को चुनौती देने के आधार बताए जाएंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अदालत इस नोटिस को लेकर क्या रुख अपनाती है। क्या अभिनेता को कोई अंतरिम राहत मिलेगी या मामले में आगे सुनवाई होगी, यह अदालत की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फैसले पर टिकी नजरें

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन से जुड़ा यह मामला अब कानूनी स्तर पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट की सुनवाई से यह साफ होने की उम्मीद है कि नोटिस को चुनौती देने के लिए अभिनेता ने क्या आधार रखे हैं और केंद्र सरकार का इस पर क्या जवाब है।

फिलहाल अदालत के आदेश से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा। सुनवाई के बाद सामने आने वाली जानकारी से ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

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