इंदौर में 16 अगस्त को अटल पथ पर प्रतिमा स्थापना के भूमिपूजन समेत विकास कार्यों के लोकार्पण का आयोजन हुआ था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री, भाजपा पदाधिकारी और कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। नगर निगम के इस कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे को भी आमंत्रित किया गया था। वे कार्यक्रम में पहुंचे और मंच पर चले गए। मंच पर मुख्यमंत्री के साथ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, क्षेत्रीय विधायक मालिनी गौड़, विधायक रमेश मेंदोला, गोलू शुक्ला, मधु वर्मा, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और जिला अध्यक्ष श्रवण चावड़ा सहित लगभग सभी जनप्रतिनिधि मौजूद थे। गौरव रणदिवे ने सभी के साथ डायस के पीछे खड़े होकर वंदे मातरम् गाया। इसके कुछ ही देर बाद वे मंच से उतरे और कार्यक्रम छोड़कर चले गए। उनके इस तरह कार्यक्रम छोड़कर जाने को लेकर सियासी गलियारों में चर्चाएं हो रही कुछ देर के लिए डायस के पीछे आए नजर खास बात यह है कि आयोजन में एमआईसी के सभी सदस्य और कई पार्षद भी मौजूद थे। गौरव रणदिवे को बाहर जाते हुए कुछ भाजपाइयों ने देखा, लेकिन किसी को मामला समझ में नहीं आया, क्योंकि यह सब मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुआ था। इसके बाद से ही इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरम है। किसी ने कहा कि रणदिवे को कहीं जाना था, तो किसी ने कहा कि उनके लिए कुर्सी की व्यवस्था नहीं थी। एक दूसरा कारण यह भी बताया जा रहा है कि यह घटनाक्रम उसी दिन हुआ, जब रणदिवे एक मामले को लेकर पार्टी के ही विरोधी गुट में चर्चा में थे। दरअसल, रविवार को इंदौर विधानसभा-3 में रणदिवे की धार्मिक यात्रा से संबंधित एक पोस्टर सामने आया था। यह पोस्टर क्षेत्रीय विधायक गोलू शुक्ला के क्षेत्र में लगा होने के कारण सुबह से ही चर्चा में था। पोस्टर में रणदिवे का बड़ा फोटो लगा था, जबकि विधायक गोलू शुक्ला, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और पार्षद मनीष मामा की फोटो या नाम नजर नहीं आए। वहीं, रणदिवे के समर्थक माने जाने वाले आशीष हार्डिया और सचिन बुढ़ाना की उनके साथ फोटो थी। उनकी सक्रियता भी चर्चा में आ गई थी। पार्टी के एक गुट के लोगों का कहना है कि इसी वजह से रणदिवे ने कार्यक्रम से निकलना ठीक समझा। गौरव रणदिवे बोले- कभी मन का छोटापन नहीं रखा इस मामले में दैनिक भास्कर ने गौरव रणदिवे से बात की। उन्होंने कहा कि ‘उस दिन मैं आयोजन से चला गया था। मैं साढ़े पांच साल अध्यक्ष रहा। पार्टी के महामंत्री हूं। मैं कभी मन का छोटापन नहीं रखा। व्यक्ति का प्रोटोकॉल भले ना करें, लेकिन उसके पद का प्रोटोकॉल करना चाहिए।’ दूसरी ओर, उनके इस बयान से यही मायने निकाले जा रहे हैं कि संभवत: उन्हें मंच पर सम्मान नहीं मिला, इसके चलते वे वहां से रवाना हो गए। भाजपा नगर अध्यक्ष और निगम कमिश्नर क्या बोले… कद्दावर मंत्री और विधायक के थे खास जब गौरव रणदिवे भाजपा नगर अध्यक्ष बने थे, तब वे एक कद्दावर मंत्री और विधायक के खास हुआ करते थे। यही कारण है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वे कुल साढ़े पांच साल तक भाजपा नगर अध्यक्ष के पद पर बने रहे। हालांकि, विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान एक मामले को लेकर वे निशाने पर आ गए। इसके बाद एक-दो मामले और हुए, तो उन्होंने मंत्री खेमे से दूरियां बना लीं। इसके बाद कई मौकों पर उनकी मौजूदगी विधायक मालिनी गौड़ के बेटे एकलव्य गौड़ और सावन सोनकर के साथ देखी गई। यहीं से उनका एक अलग गुट माना जाने लगा। अपने उगाए पौधों को नहीं काटता पिछले साल एक मौके पर कद्दावर मंत्री ने बिना नाम लिए कहा था कि, “मैं अपने लगाए पौधों को नहीं काटता हूं।” इसके बाद से ही राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। माना जाने लगा था कि शहर में अब एक और गुट पूरी तरह से सक्रिय हो गया है, जो विधानसभा चुनाव में अलग भूमिका में होगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता के साथ भी हो चुका है ऐसा यह पहला मामला नहीं है। भाजपा में करीब 5 महीने पहले भी ऐसा ही मामला सामने आया था। तब दशहरा मैदान पर नगर निगम ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था। इसमें भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री तुलसी सिलावट सहित कई पार्षद शामिल हुए थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन को भी आमंत्रित किया गया था। वे भी वहां पहुंचे और जब वे मंच पर गए थे तो किसी कार्यकर्ता ने उन्हें रोक दिया था और कहा था कि कुर्सी और सूची में उनका नाम नहीं है। इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन प्रोग्राम शुरू होने के पहले ही आयोजन स्थल से रवाना हो गए थे। जब मामला सामने आया तो भाजपा खेमे में हलचल मच गई थी। माफी मांगने घर पहुंचे थे भाजपा नगर अध्यक्ष मामला सामने आने के बाद भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, सत्यनारायण सत्तन के घर पहुंच गए। उनसे मुलाकात की थी। दशहरा मैदान के आयोजन हुए घटनाक्रम सहित अन्य विषयों पर उन्होंने उनसे चर्चा की थी। इसके बाद मिश्रा ने मीडिया से चर्चा में कहा था कि वे हमारे वरिष्ठ नेता है। समय-समय पर पार्टी के अभियानों के तहत मुझे उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करने का मौका मिलता है। दशहरा मैदान पर हुए घटनाक्रम को लेकर मिश्रा ने कहा था कि किसी गलतफहमी के कारण यह घटना हुई थी। उस गलतफहमी को गुरुजी से मिलकर दूर किया गया है। गलतफहमी में कई बार त्रुटियां हो जाती हैं, अगर कहीं कोई गलती हुई है तो हम गुरुजी से 25 बार माफी मांगेंगे। वे हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। महापौर ने भी जताया था खेद, मैं क्षमा प्रार्थी हूं तब इस मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी एक बयान जारी करते हुए कहा था कि दशहरा मैदान पर आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता सत्यनारायण सत्तन को विधिवत आदरपूर्वक आमंत्रित किया गया था। व्यवस्था के दौरान मंच पर कुर्सी भी थी, लेकिन उनके नाम की पर्ची कुर्सी पर नहीं लग पाने और कम्युनिकेशन में हुई त्रुटि के कारण असुविधा हुई है। इस त्रुटि के लिए मुझे गहरा खेद है और मैं हृदय से क्षमा प्रार्थी हूं। कांग्रेसियों भेंट किया था तुलसी का पौधा उस वक्त हुए इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के कुछ नेता भी सत्यनारायण सत्तन के घर उसने मिलने पहुंचे थे। जहां उन्होंने तुलसी का पौधा भेंट कर उनका सम्मान किया था। उस वक्त कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि भाजपा अब अनुभवी और समर्पित नेताओं को दरकिनार कर रही हैं।

