प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने मध्यप्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अमित शर्मा ने शुक्रवार को पीसीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन के दीपोत्सव का टेंडर नियमों के विपरीत जल्दबाजी में जारी किया गया। उन्होंने दावा किया कि प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा खत्म होने के छह मिनट बाद अहमदाबाद की गो बनाना कंपनी का प्रस्ताव आया, इसके बावजूद कंपनी को करीब 4.27 करोड़ रुपए का काम दे दिया गया। शर्मा ने उज्जैन के टेंडर को पूरे प्रदेश में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रमों में कथित अनियमितताओं का उदाहरण बताया। उन्होंने दावा किया कि मध्यप्रदेश में अलग-अलग जगह हुए आयोजनों पर कुल खर्च 100 से 150 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। ईमेल में 5:15 बजे की समय-सीमा, प्रस्ताव 5:21 बजे का पर्यटन विभाग के 16 सितंबर 2026 के ईमेल में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के लिए वित्तीय प्रस्ताव जमा करने की अंतिम समय-सीमा शाम 5:15 बजे लिखी है। गो बनाना कंपनी के प्रस्ताव से जुड़े ईमेल पर उसी दिन शाम 5:21 बजे का समय दर्ज है। यानी उपलब्ध ईमेल रिकॉर्ड के अनुसार, प्रस्ताव निर्धारित समय से छह मिनट बाद भेजा गया। विभाग के ईमेल में वित्तीय प्रस्ताव पासवर्ड-सुरक्षित एक्सेल या पीडीएफ फाइल में भेजने और पासवर्ड समिति की बैठक के दौरान साझा करने की बात लिखी गई है। चयन का आधार एल-1 यानी सबसे कम वित्तीय प्रस्ताव बताया गया है। अमित शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में टेंडर जारी होने का समय शाम 3:46 बजे और प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा शाम 5 बजे बताई। यहां उनके बयान और ईमेल में दर्ज समय में 15 मिनट का अंतर है। हालांकि, दोनों के अनुसार गो बनाना का प्रस्ताव समय-सीमा के बाद आया था। गो बनाना का प्रस्ताव 4.27 करोड़, दूसरी कंपनी का 8.18 करोड़ शर्मा के मुताबिक, गो बनाना ने करीब 4.28 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया, जबकि दूसरी कंपनी दीपाली डिजाइन का प्रस्ताव 8.18 करोड़ रुपए का था। उन्होंने दोनों प्रस्तावों के बीच लगभग 3.90 करोड़ रुपए के अंतर पर सवाल उठाए और इसे कथित मिलीभगत से जोड़ा। गो बनाना के विस्तृत खर्च-पत्रक में सभी मदों का कुल योग 4 करोड़ 26 लाख 82 हजार रुपए दर्ज है। इसमें जीएसटी और प्रबंधन शुल्क शामिल नहीं हैं। मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के 16 सितंबर के कार्यादेश में गो बनाना को एल-1 आधार पर चयनित बताया गया है। कलाकारों से आतिशबाजी तक खर्च का ब्योरा गो बनाना के छह पेज के खर्च-पत्रक में मंच, ध्वनि, रोशनी, कलाकारों, आतिशबाजी, घाट की सजावट, बिजली, बैठने की व्यवस्था और कार्यक्रम के प्रसारण तक की मदें दर्ज हैं। यह पत्रक सांकेतिक बजट आवंटन बताता है, सत्यापित विक्रेता कोटेशन या अंतिम भुगतान का विवरण नहीं। पत्रक के अनुसार, कवि शैलेश लोढ़ा के कार्यक्रम के लिए 22 लाख रुपए, भाविन शास्त्री की प्रस्तुति के लिए 6 लाख रुपए और 75 कलाकारों वाले नृत्य कार्यक्रम के लिए 15 लाख रुपए रखे गए। नृत्य निर्देशन और रचनात्मक कार्य के लिए 5 लाख रुपए तथा कलाकारों की यात्रा, ठहरने और भोजन के लिए 27.50 लाख रुपए का प्रावधान था। मंच, ध्वनि और रोशनी के लिए 28 लाख रुपए, वर्षा-रोधी मंच संरचना के लिए 18 लाख रुपए, विशेष प्रभावों के लिए 15 लाख रुपए और हवाई आतिशबाजी के लिए 35 लाख रुपए रखे गए। घाट की रोशनी, लेजर और सजावट की भी अलग-अलग मदें हैं। अमित शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरियोग्राफर के लिए 2.75 लाख रुपए, डांस टीम के लिए 5 लाख रुपए, कपड़े बदलने की व्यवस्था के लिए 2 लाख रुपए और साउंड के लिए 3.75 लाख रुपए का उल्लेख किया। उन्होंने स्थानीय कलाकारों को अवसर नहीं देने और खर्च की दरें अधिक होने का आरोप लगाया। पूरे प्रदेश के दीपोत्सव की जांच की मांग अमित शर्मा ने कहा कि उज्जैन का मामला केवल एक स्थान के टेंडर का उदाहरण है। उनके मुताबिक, प्रदेश में भोपाल सहित अलग-अलग जगहों पर भी दीपोत्सव आयोजित हुए और इनकी कुल लागत 100 से 150 करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है। उन्होंने दावा किया कि इन आयोजनों में लगभग 3.5 करोड़ दीये जलाने की बात कही गई थी। शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन की तारीख पहले से तय होने के बावजूद कार्यक्रमों की व्यवस्था के लिए आखिरी समय में टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अलग-अलग जिलों में कार्यक्रम किस प्रक्रिया से तय किए गए, कितना बजट स्वीकृत हुआ और वास्तविक खर्च कितना आया। पर्यटन विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों राहुल अर्गल और देवेंद्र राय की भूमिका पर भी सवाल उठाए। शर्मा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों का उल्लंघन हुआ। उन्होंने इन आरोपों की जांच की मांग की है। अमित शर्मा ने कहा कि मामला सरकारी धन और प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े आयोजन का है, इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उज्जैन सहित प्रदेश के सभी संबंधित आयोजनों की निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, खर्च के बिल और भुगतान की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि उज्जैन के टेंडर की राशि से अधिक के पूरक बिल लगाए जा सकते हैं और अंतिम बिल 8 से 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक तक पहुंच सकता है।

