Noida Workers’ Movement: उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्धनगर (नोएडा) में मजदूर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार की गई छात्र नेता आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाना जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम को भारी पड़ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति पर लगे रासुका को रद्द करते हुए DM मेधा रूपम, पुलिस और सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने ना सिर्फ छात्रा को 5 लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया है बल्कि यह पूरी रकम NSA लगाने की प्रक्रिया में शामिल सभी अफसरों के वेतन से वसूलने का सख्त निर्देश भी दिया है।
सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज होगी कोर्ट की नाराजगी
हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने 2 सितंबर को ही आकृति पर लगे रासुका को रद्द कर दिया था जिसका विस्तृत आदेश सोमवार को जारी हुआ। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस मामले में DM मेधा रूपम से लेकर SHO तक जितने भी अफसर शामिल हैं उन सभी के सर्विस रिकॉर्ड में कोर्ट की नाराजगी और उनके निरंकुश आचरण को दर्ज किया जाए।
बता दें कि IAS अफसर मेधा रूपम मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। वह उत्तर प्रदेश कैडर से 2014 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं। वर्तमान में वह गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) में DM के पद पर तैनात हैं और वह इस जिले की पहली महिला DM भी हैं।
बिना सबूत लगा दिया गया NSA
यह पूरा मामला अप्रैल महीने में नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन से जुड़ा है। मजदूर न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और साप्ताहिक छुट्टी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई में पाया कि पुलिस ने आकृति चौधरी को 11 अप्रैल की शाम ही हिरासत में ले लिया था और 12 अप्रैल को उनकी गिरफ्तारी दिखाई थी। जबकि आंदोलन में हिंसा 13 अप्रैल को भड़की थी। इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन ने बिना किसी ठोस सबूत के 2 दिन पहले से हिरासत में मौजूद छात्रा पर रासुका लगा दिया।
DM के फैसले को बताया उपहास के लायक
हाईकोर्ट ने डीएम मेधा रूपम के NSA लगाने के फैसले को उपहास के लायक बताया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अफसरों की निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए ना कि किसी राजनीतिक नेतृत्व के प्रति। कोर्ट ने कहा कि डीएम ने पुलिस रिपोर्ट पर निष्पक्ष तरीके से गौर नहीं किया और बिना दिमाग लगाए रासुका का आदेश पारित कर दिया ताकि जनता के बीच एक डर का माहौल बने और लोग अधिकारों की मांग के लिए सड़क पर ना आएं। कोर्ट ने डीएम को अपनी शपथ के उल्लंघन का सीधा दोषी माना है।
अफसरों के वेतन से वसूला जाएगा 5 लाख का हर्जाना
आकृति चौधरी की ओर से 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि प्रशासन ने जिस अभिमानपूर्ण तरीके से छात्रा को रासुका में बंद किया उसके लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना उचित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह हर्जाना सरकारी खजाने से नहीं दिया जाएगा बल्कि रासुका की रिपोर्ट बनाने वाले SHO से लेकर इसे बिना सोचे-समझे मंजूर करने वाली DM मेधा रूपम तक सभी जवाबदेह अफसरों की सैलरी से काटा जाएगा।
अन्य मुकदमों में जमानत के बाद ही होगी रिहाई
एनएसए हटने के बावजूद आकृति चौधरी की तुरंत जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी। उन्हें जेल से बाहर आने के लिए आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए अन्य मुकदमों में भी अदालत से जमानत हासिल करनी होगी। रासुका लगने के कारण उन्हें बिना मुकदमा चलाए एक साल तक जेल में बंद रखा जा सकता था जिससे अब हाईकोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत दे दी है।

