अमरहा हाई स्कूल में जर्जर भवन और खुले में कुआं:बरामदे में लग रही कक्षाएं, छत से टपकते पानी के बीच हो रही पढ़ाई

अमरहा हाई स्कूल में जर्जर भवन और खुले में कुआं:बरामदे में लग रही कक्षाएं, छत से टपकते पानी के बीच हो रही पढ़ाई

सोहागपुर विकासखंड के अमरहा हाई स्कूल में जर्जर भवन के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूल प्रबंधन ने असुरक्षित कमरों को बंद कर दिया है, जिसके चलते कई कक्षाएं बरामदे में लग रही हैं और बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों को बरामदे में पढ़ाया जा रहा है। वहीं, कक्षा 6 से 10 तक के कमरों की दीवारों में दरारें हैं और छत से पानी टपकता है। जर्जर कमरों में ताले लगे होने के कारण उनमें रखी डेस्क-बेंच का उपयोग नहीं हो पा रहा है। बारिश के दौरान स्थिति और बिगड़ जाती है, जब कक्षा 8वीं और 9वीं में छत से पानी टपकने लगता है। छात्र अपनी किताबें और खुद को पानी से बचाने का प्रयास करते हैं। दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है और दरारें स्पष्ट दिखाई देती हैं। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए जर्जर कमरों को बंद करने की बात कही है। सुरक्षित कमरों की कमी के कारण कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को बरामदे में पढ़ना पड़ता है। जैसे-जैसे कमरों की स्थिति खराब होती गई, उन्हें बंद करना पड़ा, जिसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और बैठने की व्यवस्था पर पड़ रहा है। स्कूल परिसर में एक खुला कुआं भी बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ है। कुएं को पूरी तरह से ढका नहीं गया है, और बच्चे आसानी से उसके अंदर झांक सकते हैं। परिसर में बच्चों की आवाजाही को देखते हुए कुएं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। परिसर में कई अन्य भवन भी जर्जर हालत में हैं। आंगनबाड़ी का एक कमरा, उसमें भी कबाड़
स्कूल परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति भी खराब है। बच्चों के बैठने के लिए एक ही कमरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी कमरे में बड़ी मात्रा में कबाड़ और अन्य सामान रखा हुआ है। इससे बच्चों के लिए बैठने और गतिविधियां करने की जगह और कम हो गई है। दो साल पहले भवन स्वीकृत, भूमि विवाद से अटका निर्माण
स्कूल के प्राचार्य टीके परस्ते के अनुसार नए भवन का निर्माण करीब दो साल पहले स्वीकृत हो चुका है, लेकिन भूमि विवाद के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पाया। गांव में कुछ लोगों की ओर से प्रस्तावित जमीन को लेकर विरोध किया जा रहा है। इस वजह से भवन निर्माण की प्रक्रिया अटकी हुई है। प्रबंधन का कहना है कि इस मामले में विभाग को कई बार पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक विवाद का समाधान नहीं हुआ है।

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