श्रावणी मेला के 18वें दिन रविवार को सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ मंदिर घाट पर डाक बम कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिवभक्तों ने उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल भरा और बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए अपनी यात्रा शुरू की। कंधे पर कांवर, पीठ पर पीठिया और हाथ में लाठी लिए ये कांवरिए लगातार आगे बढ़ते दिखे। डाक बम कांवरियों की यह यात्रा उनके दृढ़ संकल्प और अनुशासन के लिए जानी जाती है। गंगाजल उठाने के बाद, वे बिना रुके लगभग 105 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए निर्धारित समय में देवघर पहुंचने का प्रयास करते हैं। बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करना ही उनका मुख्य लक्ष्य होता है। तेज धूप और शारीरिक थकान के बावजूद कांवरियों के कदम नहीं रुकते। पूरे रास्ते ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहता है। यह यात्रा शिवभक्तों की अटूट आस्था, संकल्प और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है। श्रावणी मेला के 18वें दिन रविवार को सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ मंदिर घाट पर डाक बम कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिवभक्तों ने उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल भरा और बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए अपनी यात्रा शुरू की। कंधे पर कांवर, पीठ पर पीठिया और हाथ में लाठी लिए ये कांवरिए लगातार आगे बढ़ते दिखे। डाक बम कांवरियों की यह यात्रा उनके दृढ़ संकल्प और अनुशासन के लिए जानी जाती है। गंगाजल उठाने के बाद, वे बिना रुके लगभग 105 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए निर्धारित समय में देवघर पहुंचने का प्रयास करते हैं। बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करना ही उनका मुख्य लक्ष्य होता है। तेज धूप और शारीरिक थकान के बावजूद कांवरियों के कदम नहीं रुकते। पूरे रास्ते ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहता है। यह यात्रा शिवभक्तों की अटूट आस्था, संकल्प और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रतीक है।


