बांका में गलत शव दफनाया,अगले दिन घर लौटा मृत व्यक्ति:दूसरे बुजुर्ग की निकली लाश; कब्र खोदकर निकाली गई बॉडी, पुलिस की पहचान प्रक्रिया पर उठे सवाल

बांका में गलत शव दफनाया,अगले दिन घर लौटा मृत व्यक्ति:दूसरे बुजुर्ग की निकली लाश; कब्र खोदकर निकाली गई बॉडी, पुलिस की पहचान प्रक्रिया पर उठे सवाल

बांका के रजौन थाना क्षेत्र में शव की पहचान को लेकर हुई एक बड़ी चूक ने पुलिस और दो परिवारों को असमंजस में डाल दिया। एक परिवार ने जिस व्यक्ति के शव को अपना परिजन समझकर धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार दफना दिया, वह व्यक्ति अगले ही दिन बुधवार को जिंदा अपने घर लौट आया। इसके बाद प्रशासन को धोरैया थाना क्षेत्र के कुरमा कब्रिस्तान में दफनाए गए शव को कब्र खोदकर बाहर निकालना पड़ा। जांच के बाद शव की वास्तविक पहचान एक हिंदू वृद्ध के रूप में हुई। घटना के बाद पुलिस की शव पहचान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पर्याप्त जांच के शव को परिजनों को सौंपना बड़ी लापरवाही है। पुनसिया बाजार के पास गिरने से हुई थी वृद्ध की मौत जानकारी के अनुसार, सन्हौला थाना क्षेत्र के गोविंदपुर निवासी करीब 60 वर्षीय रामकिशन मोहली सोमवार को अपनी बहन के घर मकदुमा गए थे। वहां से लौटने के दौरान रजौन थाना क्षेत्र के पुनसिया बाजार के पास एक दुकान के समीप अचानक भीषण गर्मी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रामकिशन मोहली अचानक सड़क किनारे गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान नहीं होने पर रजौन पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बांका भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने पहचान के लिए शव की तस्वीरें सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित कराई। तस्वीर देखकर दूसरे परिवार ने कर दी पहचान शव की तस्वीर वायरल होने के बाद मंगलवार को धोरैया थाना क्षेत्र के भगवानपुर निवासी मुजाहिद अंसारी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने तस्वीर देखकर शव की पहचान अपने पिता सगीर अंसारी के रूप में कर दी। बताया गया कि पुलिस ने भी बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए उनकी पहचान को सही मान लिया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव उन्हें सौंप दिया। इसके बाद सगीर अंसारी के परिवार वाले शव को लेकर गांव पहुंचे और मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार धोरैया थाना क्षेत्र के कुरमा कब्रिस्तान में दफना दिया। बुधवार को घर लौट आया ‘मृत’ व्यक्ति मामले में सबसे बड़ा मोड़ बुधवार को तब आया, जब जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत मान लिया था, वही सगीर अंसारी सकुशल अपने घर पहुंच गए। उन्हें जिंदा देखकर परिवार और ग्रामीणों के बीच हैरानी फैल गई। परिजनों को समझ नहीं आया कि जिस शव का उन्होंने अंतिम संस्कार कर दिया, वह आखिर किसका था। परिजनों ने बताया कि सगीर अंसारी मानसिक रूप से कमजोर हैं और कई बार बिना बताए घर से निकल जाते हैं। इसी कारण परिवार ने तस्वीर देखकर शव को उनका मान लिया। असली परिवार ने किया शव पर दावा इधर, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर देखने के बाद भागलपुर जिले के सन्हौला थाना क्षेत्र के गोविंदपुर निवासी एक युवक ने पुलिस से संपर्क किया। उसने दावा किया कि वायरल तस्वीर में दिख रहा शव उसके पिता रामकिशन मोहली का है। सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद धोरैया और रजौन थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। कब्र खोदकर निकाला गया शव, हुई दोबारा पहचान प्रशासनिक निगरानी में कुरमा कब्रिस्तान में दफन शव को कब्र खोदकर बाहर निकाला गया। इसके बाद मृतक के वास्तविक परिजनों को बुलाकर पहचान कराई गई। जांच के बाद पुष्टि हुई कि कब्र में दफन शव वास्तव में रामकिशन मोहली का ही था। इसके बाद पुलिस ने शव को उनके वास्तविक परिजनों को सौंप दिया। परिजन शव को अपने गांव लेकर गए, जहां हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। पहचान प्रक्रिया पर उठे सवाल पूरे मामले के सामने आने के बाद शव पहचान की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अज्ञात शव मिलने के बाद पहचान के लिए केवल तस्वीर के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए था। स्थानीय लोगों ने कहा कि पुलिस को शव सौंपने से पहले परिवार के अन्य सदस्यों से मिलान, पहचान के अन्य प्रमाण और पूरी जांच करनी चाहिए थी। इस घटना से दोनों परिवारों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। एक परिवार ने जीवित व्यक्ति को मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि दूसरे परिवार को अपने परिजन का शव मिलने के लिए कब्र खुलवाने तक की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। थानाध्यक्ष ने मानी पहचान में गलती रजौन थानाध्यक्ष राजरतन ने बताया कि शव की पहचान में गलती के कारण यह स्थिति बनी। वास्तविक पहचान होने के बाद शव को उसके सही परिजनों को सौंप दिया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। बांका के रजौन थाना क्षेत्र में शव की पहचान को लेकर हुई एक बड़ी चूक ने पुलिस और दो परिवारों को असमंजस में डाल दिया। एक परिवार ने जिस व्यक्ति के शव को अपना परिजन समझकर धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार दफना दिया, वह व्यक्ति अगले ही दिन बुधवार को जिंदा अपने घर लौट आया। इसके बाद प्रशासन को धोरैया थाना क्षेत्र के कुरमा कब्रिस्तान में दफनाए गए शव को कब्र खोदकर बाहर निकालना पड़ा। जांच के बाद शव की वास्तविक पहचान एक हिंदू वृद्ध के रूप में हुई। घटना के बाद पुलिस की शव पहचान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना पर्याप्त जांच के शव को परिजनों को सौंपना बड़ी लापरवाही है। पुनसिया बाजार के पास गिरने से हुई थी वृद्ध की मौत जानकारी के अनुसार, सन्हौला थाना क्षेत्र के गोविंदपुर निवासी करीब 60 वर्षीय रामकिशन मोहली सोमवार को अपनी बहन के घर मकदुमा गए थे। वहां से लौटने के दौरान रजौन थाना क्षेत्र के पुनसिया बाजार के पास एक दुकान के समीप अचानक भीषण गर्मी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रामकिशन मोहली अचानक सड़क किनारे गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान नहीं होने पर रजौन पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बांका भेज दिया। इसके बाद पुलिस ने पहचान के लिए शव की तस्वीरें सोशल मीडिया और विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित कराई। तस्वीर देखकर दूसरे परिवार ने कर दी पहचान शव की तस्वीर वायरल होने के बाद मंगलवार को धोरैया थाना क्षेत्र के भगवानपुर निवासी मुजाहिद अंसारी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उन्होंने तस्वीर देखकर शव की पहचान अपने पिता सगीर अंसारी के रूप में कर दी। बताया गया कि पुलिस ने भी बिना ज्यादा जांच-पड़ताल किए उनकी पहचान को सही मान लिया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव उन्हें सौंप दिया। इसके बाद सगीर अंसारी के परिवार वाले शव को लेकर गांव पहुंचे और मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार धोरैया थाना क्षेत्र के कुरमा कब्रिस्तान में दफना दिया। बुधवार को घर लौट आया ‘मृत’ व्यक्ति मामले में सबसे बड़ा मोड़ बुधवार को तब आया, जब जिस व्यक्ति को परिवार ने मृत मान लिया था, वही सगीर अंसारी सकुशल अपने घर पहुंच गए। उन्हें जिंदा देखकर परिवार और ग्रामीणों के बीच हैरानी फैल गई। परिजनों को समझ नहीं आया कि जिस शव का उन्होंने अंतिम संस्कार कर दिया, वह आखिर किसका था। परिजनों ने बताया कि सगीर अंसारी मानसिक रूप से कमजोर हैं और कई बार बिना बताए घर से निकल जाते हैं। इसी कारण परिवार ने तस्वीर देखकर शव को उनका मान लिया। असली परिवार ने किया शव पर दावा इधर, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर देखने के बाद भागलपुर जिले के सन्हौला थाना क्षेत्र के गोविंदपुर निवासी एक युवक ने पुलिस से संपर्क किया। उसने दावा किया कि वायरल तस्वीर में दिख रहा शव उसके पिता रामकिशन मोहली का है। सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद धोरैया और रजौन थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। कब्र खोदकर निकाला गया शव, हुई दोबारा पहचान प्रशासनिक निगरानी में कुरमा कब्रिस्तान में दफन शव को कब्र खोदकर बाहर निकाला गया। इसके बाद मृतक के वास्तविक परिजनों को बुलाकर पहचान कराई गई। जांच के बाद पुष्टि हुई कि कब्र में दफन शव वास्तव में रामकिशन मोहली का ही था। इसके बाद पुलिस ने शव को उनके वास्तविक परिजनों को सौंप दिया। परिजन शव को अपने गांव लेकर गए, जहां हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। पहचान प्रक्रिया पर उठे सवाल पूरे मामले के सामने आने के बाद शव पहचान की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अज्ञात शव मिलने के बाद पहचान के लिए केवल तस्वीर के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहिए था। स्थानीय लोगों ने कहा कि पुलिस को शव सौंपने से पहले परिवार के अन्य सदस्यों से मिलान, पहचान के अन्य प्रमाण और पूरी जांच करनी चाहिए थी। इस घटना से दोनों परिवारों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। एक परिवार ने जीवित व्यक्ति को मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि दूसरे परिवार को अपने परिजन का शव मिलने के लिए कब्र खुलवाने तक की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। थानाध्यक्ष ने मानी पहचान में गलती रजौन थानाध्यक्ष राजरतन ने बताया कि शव की पहचान में गलती के कारण यह स्थिति बनी। वास्तविक पहचान होने के बाद शव को उसके सही परिजनों को सौंप दिया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।  

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