Thyroid Anxiety Symptoms: जब भी थायराइड की बात होती है, तो लोगों के दिमाग में सबसे पहले वजन का बढ़ना या घटना, थकान और गले में सूजन जैसी बातें आती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि थायराइड का सीधा असर आपके दिमाग पर भी पड़ता है? कई बार लोग डिप्रेशन (अवसाद), बहुत ज्यादा घबराहट (Anxiety) या बात-बात पर मूड बदलने (Mood Swings) को केवल मानसिक तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि इसके पीछे की असली वजह थायराइड हार्मोन का असंतुलन हो सकती है।
विश्व थायराइड दिवस (World Thyroid Day) के मौके पर आइए डॉक्टरों से समझते हैं कि यह साइलेंट बीमारी आपके मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के साथ कैसे खिलवाड़ करती है।
जब थायराइड के कारण दिमाग में छाने लगता है धुंध (Brain Fog)
वरिष्ठ एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (Thyroid Specialist) डॉ. विकास अरोड़ा के अनुसार, “थायराइड ग्रंथि से निकलने वाले हार्मोन हमारे पूरे शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं, जिसमें हमारा दिमाग भी शामिल है। जब शरीर में थायराइड हार्मोन कम बनने लगता है (जिसे हाइपोथायराइडिज्म कहते हैं), तो दिमाग की कार्यप्रणाली धीमी हो जाती है। इसे मेडिकल भाषा में ब्रेन फॉग (Brain Fog) कहा जाता है। इसमें मरीज को ध्यान लगाने में दिक्कत होती है, वह छोटी-छोटी बातें भूलने लगता है और हर वक्त दिमाग में एक अजीब सा भारीपन रहता है।” अक्सर लोग इसे काम का प्रेशर या उम्र का बढ़ना मान लेते हैं, जो कि एक बड़ी भूल है।
डिप्रेशन और थायराइड: एक गहरा और डरावना रिश्ता
डॉ. अरोड़ा आगे बताते हैं कि उनके पास कई ऐसे मरीज आते हैं जो लंबे समय से डिप्रेशन या एंग्जायटी की दवाइयां खा रहे होते हैं, लेकिन जब उनका ब्लड टेस्ट कराया जाता है, तो पता चलता है कि उन्हें गंभीर रूप से थायराइड है।
हाइपोथायराइडिज्म (Hypothyroidism): इसमें हार्मोन कम होने से शरीर सुस्त पड़ता है, जिससे हर वक्त उदासी, रोने का मन करना, नींद ज्यादा आना और किसी काम में मन न लगने जैसे लक्षण दिखते हैं, जो बिल्कुल डिप्रेशन जैसे होते हैं।
हाइपरथायराइडिज्म (Hyperthyroidism): इसके उलट, जब हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगता है, तो इंसान का नर्वस सिस्टम ओवर-एक्टिव हो जाता है। ऐसे में बिना वजह दिल की धड़कन बढ़ना, हाथों का कांपना, घबराहट होना, पैनिक अटैक आना और बहुत ज्यादा गुस्सा आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
क्यों जरूरी है सही समय पर TSH टेस्ट?
चिकित्सीय रिपोर्ट्स मानती हैं कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में थायराइड होने की संभावना 8 गुना ज्यादा होती है, और यही वजह है कि महिलाओं में मूड स्विंग्स और एंग्जायटी के मामलों को अक्सर केवल हार्मोनल बदलाव कहकर छोड़ दिया जाता है।डॉक्टर की सीधी सलाह है कि अगर आप पिछले कुछ समय से लगातार बिना किसी बड़ी वजह के उदास महसूस कर रहे हैं, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ गया है, या रात को नींद ठीक से नहीं आ रही है, तो मनोचिकित्सक के पास जाने से पहले एक बार अपना TSH (Thyroid Stimulating Hormone) टेस्ट जरूर करवा लें। थायराइड की एक छोटी सी गोली आपके बिगड़े हुए मूड और दिमागी सेहत को वापस पटरी पर ला सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


