लखनऊ में सुबह से मौसम साफ बना हुआ है। चटक धूप के लगातार सतही हवा चल रही है। मौसम विभाग का अनुमान है आज लखनऊ का अधिकतम तापमान 36 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री के आसपास दर्ज किया जाएगा। सोमवार को अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री रहा है। यह सामान्य से 3.5 डिग्री अधिक रहा। न्यूनतम तापमान 26.02 डिग्री रहा। यह सामान्य से 1.6 डिग्री अधिक रहा। अधिकतम आर्द्रता 63 फीसदी और न्यूनतम आर्द्रता 36 फीसदी रही। मार्च से लेकर अभी तक हुई अधिक बरसात लखनऊ में गुरुवार को 1581 फीसदी अधिक बरसात हुई है। इस बीच दिन में कुल 6.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश का औसत 0.4 मिलीमीटर है। 1 मार्च से लेकर अभी तक लखनऊ में कुल 65.2 मिलीमीटर बारिश हुई है। जबकि सामान्य बारिश का औसत 13.8 मिलीमीटर है। यह सामान्य बारिश की तुलना में 372 फीसदी अधिक है। कल से फिर बारिश की संभावना लखनऊ में फिलहाल मौसम सामान्य बने रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव कम होने से अब मौसम साफ रहेगा। इसके चलते तापमान में अगले कुछ दिनों में 8 डिग्री तक के बढ़त की संभावना है। इस बीच भीषण गर्मी में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। 13 मई से नया पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव होने से फिर से बारिश होने के आसार कई इलाकों में बन रहे हैं। इस बीच मौसम विभाग ने बारिश के साथ में बादलों की गरज चमक का अलर्ट भी जारी किया है। कम बारिश का अनुमान, खेती पर पड़ेगा असर मौसम विभाग के ताजा दीर्घकालिक पूर्वानुमान के मुताबिक, साल 2026 में उत्तर प्रदेश में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार कई वैश्विक मौसम कारक बारिश को प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी गोलार्द्ध और यूरेशिया में सर्दियों व वसंत के दौरान बर्फ का फैलाव सामान्य से थोड़ा कम रहा है। वहीं, हिंद महासागर में अभी तटस्थ स्थिति है, जो मानसून के अंत तक सकारात्मक रूप ले सकती है। इसके बावजूद प्रशांत महासागर में चल रही कमजोर ला-नीना स्थिति जून तक खत्म होकर तटस्थ हो जाएगी। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि इसके बाद मानसून के दौरान अल-नीनो जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका है, जो आमतौर पर भारत में बारिश कम करती हैं। यही वजह है कि मौसम विभाग ने यूपी और लखनऊ में इस बार कुल मानसूनी बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो इसका असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ सकता है।


