बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने कहा है कि शिक्षकों के हितों के लिए जो भी जरूरत पड़ेगी, वह हर लड़ाई लड़ेंगे। शिक्षकों को ओरिजिनल वेतनमान और पुरानी पेंशन दिलाने के लिए भी संघर्ष किया जाएगा। ये बातें उन्होंने नालंदा के रहुई प्रखंड स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय पतासंग (हाई स्कूल) में आयोजित ‘शिक्षक सम्मान समारोह’ में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहीं। इससे पहले विद्यालय परिसर पहुंचने पर शिक्षकों की ओर से उनका गाजे-बाजे और धूमधाम के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यालय के छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे। मीडिया से मुखातिब होते हुए प्रो. यादव ने राजनीति, शिक्षा और शिक्षकों के मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी। विपक्ष की ‘लुटिया’ इस बार भी साफ होगी चुनावों में विपक्ष की दावेदारी के सवाल पर चुटकी लेते हुए नवल किशोर यादव ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को दावा करने का अधिकार है, लेकिन असली फैसला मतदाताओं के हाथ में होता है। उन्होंने कहा, “पिछले विधानसभा चुनाव में भी सारे लोगों ने बड़ी-बड़ी दावेदारी की थी, लेकिन सबकी लुटिया साफ हो गई। इस बार के चुनाव में भी उनकी लुटिया पूरी तरह साफ हो जाएगी।” सरकारी आवास कोई परमानेंट जगह नहीं राबड़ी आवास को खाली करने के लिए दिए गए नोटिस और उस पर हो रही ओछी राजनीति के सवाल पर प्रो. यादव ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी आवास किसी का परमानेंट नहीं होता। उन्होंने मुख्यमंत्री का उदाहरण देते हुए कहा कि नीतीश कुमार भी जब एक नंबर में थे, तो उन्होंने उसे खाली किया था। सरकारी आवास या लुटियंस जोन आने-जाने की चीज है। राबड़ी से पहले भी वहां लोग थे और उनके बाद भी लोग रहेंगे। उपद्रव करने वालों पर होता है बल प्रयोग, शिक्षकों पर नहीं शिक्षकों के प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज के मुद्दे पर सरकार का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने ही 5-6 हजार रुपये पर बहाल हुए शिक्षकों को ‘विशिष्ट शिक्षक’ का दर्जा देकर उनका मान बढ़ाया है। लाठीचार्ज की बात को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक अभ्यर्थियों के नाम पर कुछ लोग अनावश्यक रूप से गदर मचाते हैं, जिसके कारण पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग करना पड़ता है। जांच के लिए ढोल पीटने की जरूरत नहीं, काम करें विभाग सूबे में फर्जी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को बंद करने के शिक्षा मंत्री के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नवल किशोर यादव ने अपनी ही सरकार के मंत्री को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि जांच के लिए इतना ढोल पीटने की क्या जरूरत है? उन्हें जांच करने से कौन रोक रहा है? राज्य में पहले भी एनडीए की ही सरकार थी और आज भी है। आपको जहां ठीक लगता है, वहां जांच कीजिए और काम कीजिए।” जब उनसे फर्जी मदरसों के विशेष कारणों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इससे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वे शिक्षा मंत्री के प्रवक्ता नहीं हैं, इस बारे में मंत्री ही बेहतर बता पाएंगे। बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) प्रोफेसर नवल किशोर यादव ने कहा है कि शिक्षकों के हितों के लिए जो भी जरूरत पड़ेगी, वह हर लड़ाई लड़ेंगे। शिक्षकों को ओरिजिनल वेतनमान और पुरानी पेंशन दिलाने के लिए भी संघर्ष किया जाएगा। ये बातें उन्होंने नालंदा के रहुई प्रखंड स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय पतासंग (हाई स्कूल) में आयोजित ‘शिक्षक सम्मान समारोह’ में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहीं। इससे पहले विद्यालय परिसर पहुंचने पर शिक्षकों की ओर से उनका गाजे-बाजे और धूमधाम के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यालय के छात्र-छात्राएं भी मौजूद रहे। मीडिया से मुखातिब होते हुए प्रो. यादव ने राजनीति, शिक्षा और शिक्षकों के मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी। विपक्ष की ‘लुटिया’ इस बार भी साफ होगी चुनावों में विपक्ष की दावेदारी के सवाल पर चुटकी लेते हुए नवल किशोर यादव ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को दावा करने का अधिकार है, लेकिन असली फैसला मतदाताओं के हाथ में होता है। उन्होंने कहा, “पिछले विधानसभा चुनाव में भी सारे लोगों ने बड़ी-बड़ी दावेदारी की थी, लेकिन सबकी लुटिया साफ हो गई। इस बार के चुनाव में भी उनकी लुटिया पूरी तरह साफ हो जाएगी।” सरकारी आवास कोई परमानेंट जगह नहीं राबड़ी आवास को खाली करने के लिए दिए गए नोटिस और उस पर हो रही ओछी राजनीति के सवाल पर प्रो. यादव ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी आवास किसी का परमानेंट नहीं होता। उन्होंने मुख्यमंत्री का उदाहरण देते हुए कहा कि नीतीश कुमार भी जब एक नंबर में थे, तो उन्होंने उसे खाली किया था। सरकारी आवास या लुटियंस जोन आने-जाने की चीज है। राबड़ी से पहले भी वहां लोग थे और उनके बाद भी लोग रहेंगे। उपद्रव करने वालों पर होता है बल प्रयोग, शिक्षकों पर नहीं शिक्षकों के प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज के मुद्दे पर सरकार का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने ही 5-6 हजार रुपये पर बहाल हुए शिक्षकों को ‘विशिष्ट शिक्षक’ का दर्जा देकर उनका मान बढ़ाया है। लाठीचार्ज की बात को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक अभ्यर्थियों के नाम पर कुछ लोग अनावश्यक रूप से गदर मचाते हैं, जिसके कारण पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग करना पड़ता है। जांच के लिए ढोल पीटने की जरूरत नहीं, काम करें विभाग सूबे में फर्जी मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को बंद करने के शिक्षा मंत्री के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नवल किशोर यादव ने अपनी ही सरकार के मंत्री को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि जांच के लिए इतना ढोल पीटने की क्या जरूरत है? उन्हें जांच करने से कौन रोक रहा है? राज्य में पहले भी एनडीए की ही सरकार थी और आज भी है। आपको जहां ठीक लगता है, वहां जांच कीजिए और काम कीजिए।” जब उनसे फर्जी मदरसों के विशेष कारणों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इससे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वे शिक्षा मंत्री के प्रवक्ता नहीं हैं, इस बारे में मंत्री ही बेहतर बता पाएंगे।


