Why Share Market Fall Today: शेयर बाजार में आज क्यों देखी जा रही गिरावट? सेंसेक्स 500 पॉइंट से ज्यादा टूटा, IT शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली

Why Share Market Fall Today: शेयर बाजार में आज क्यों देखी जा रही गिरावट? सेंसेक्स 500 पॉइंट से ज्यादा टूटा, IT शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली

Share Market on 17th August 2026: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबारी सत्र आगे बढ़ने के साथ-साथ बिकवाली का दबाव भी साफ नजर आया। सुबह 11 बजकर 25 मिनट पर बीएसई सेंसेक्स 0.66 फीसदी या 510 अंक की गिरावट के साथ 77,509 पर ट्रेड करता दिखा। वहीं, एनएसई निफ्टी इस समय 0.52 फीसदी या 127 अंक की गिरावट के साथ 24,238 पर ट्रेड करता दिखा। इस गिरावट का असर बाजार की कुल वैल्यू पर भी पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब 79,000 करोड़ रुपये घट गया। खासतौर पर IT शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। Infosys, HCL Tech, TCS और Tech Mahindra समेत कई बड़े शेयर दबाव में दिखे।

बाजार की चाल पर इस समय कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर असर डाल रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, अमेरिकी खुदरा बिक्री के आंकड़ों, FOMC मिनट्स और चीन के आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन संकेतों से वैश्विक आर्थिक ग्रोथ और अमेरिकी फेड की आगे की नीति को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

सेंसेक्स के शेयरों का हाल

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PC: BSE, दोपहर 12 बजे

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई चिंता

सोमवार को एशियाई कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1 फीसदी की तेजी आई। इसकी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में टैंकरों की आवाजाही धीमी होना और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए किसी समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ना है। ब्रेंट क्रूड करीब 60 सेंट यानी 0.7 फीसदी बढ़कर 89 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा पिछले हफ्ते दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 5 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई थी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के टैंकरों पर हमले और सऊदी अरामको की रिफाइनरी पर हमले के बाद तेल बाजार में चिंता बढ़ी है।

महंगा कच्चा तेल भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए चिंता की बात है। इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है। यही वजह है कि तेल की तेजी से शेयर बाजार का मूड बिगड़ रहा है।

IT शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली

सोमवार की गिरावट में IT सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। Infosys, HCL Tech, TCS और Tech Mahindra जैसे बड़े IT शेयरों में करीब 3 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक के मिनट्स पर है, जो बुधवार को जारी होने वाले हैं। बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि अमेरिका में ब्याज दरों में आगे कटौती को लेकर फेड का रुख क्या है।

अगर फेड की तरफ से ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर होती है, तो इसका असर IT शेयरों पर पड़ सकता है। ऊंची ब्याज दरों की वजह से अमेरिका और यूरोप की कंपनियां अपने टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती कर सकती हैं। बड़ी क्लाउड, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और दूसरी टेक परियोजनाओं को टाला जा सकता है। इसका सीधा असर भारतीय IT कंपनियों को मिलने वाले नए ऑर्डर, डील और भविष्य की कमाई पर पड़ सकता है।

चीन के आर्थिक आंकड़ों पर भी नजर

निवेशकों की नजर सोमवार को जारी होने वाले चीन के जुलाई के आर्थिक आंकड़ों पर भी है। अनुमान है कि चीन का औद्योगिक उत्पादन बढ़ने की रफ्तार 5.3 फीसदी से घटकर 4.8 फीसदी रह सकती है। खुदरा बिक्री में 1.5 फीसदी की बढ़त का अनुमान है। चीन की अर्थव्यवस्था के लिए वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उत्पादों की मजबूत मांग से निर्यात को फायदा मिला है। अब बाजार यह देखना चाहता है कि घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियों की तस्वीर कैसी रहती है।

FII ने की खरीदारी

विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 508 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। पूरे पिछले सप्ताह में FII ने कुल 1,228.24 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। उधर
घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII बाजार में लगातार खरीदार बने रहे। पिछले सप्ताह DII की शुद्ध खरीदारी 9,285.63 करोड़ रुपये रही।

बाजार को लेकर एक्सपर्ट की राय

जियोजित इन्वेस्टमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, शॉर्ट टर्म में निफ्टी 24,000 से 24,600 के दायरे में रह सकता है। बाजार को इस रेंज से बाहर निकालने के लिए किसी बड़े नए ट्रिगर की जरूरत होगी। उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमत के करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचना और मिडिल ईस्ट में संकट का तुरंत समाधान नजर नहीं आना बाजार की तेजी पर लगाम लगा सकता है। इसके अलावा बड़े IT और बैंकिंग शेयरों का कमजोर प्रदर्शन भी निफ्टी पर दबाव बनाए हुए है। विजयकुमार के मुताबिक, निवेशकों को केवल निफ्टी-50 तक सीमित रहने के बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चुनिंदा मौकों पर नजर रखनी चाहिए। पहली तिमाही के नतीजों के दौरान इन कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है और आगे भी इनके मजबूत बने रहने की उम्मीद है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

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