Amitabh Bachchan: बॉलीवुड के ‘शहंशाह’ अमिताभ बच्चन सिर्फ अपनी फिल्मों या बुलंद आवाज के लिए ही नहीं जाने जाते, बल्कि अपने अनुशासन के लिए भी दुनिया भर में मिसाल माने जाते हैं। करीब 6 दशकों से सिनेमा के पर्दे पर राज कर रहे बिग बी आज भी युवाओं से ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग के जरिए काम और जिंदगी को लेकर कुछ ऐसी बातें शेयर की हैं, जो किसी के भी सोए हुए जज्बे को जगा सकती हैं।
अमिताभ इस उम्र में भी क्यों करते हैं काम (Amitabh Bachchan work at 83 big reason reveals)
अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में इस बात पर जोर दिया कि इंसान के लिए काम करना कितना जरूरी है। उन्होंने लिखा, “काम ही असल में जिंदगी का सार है। काम होगा तभी जीवन की गाड़ी आगे बढ़ेगी। यह आपको किसी रोमांचक मंजिल पर ले जाए या न ले जाए, लेकिन जिंदगी के सफर में आगे बढ़ते रहने के लिए काम करना अनिवार्य है।” उनके ये शब्द उन लोगों के लिए एक सीख की तरह हैं जो जल्दी थक कर हार मान लेते हैं।

बिग बी ने शेयर किया पोस्ट (Amitabh Bachchan Post)
बिग बी ने ब्लॉग में एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए लिखा, “मैने एक साथी से सुना कि सुबह का समय क्रिएटिव सोच के लिए सबसे अच्छा होता है। यह उन लोगों के लिए ठीक होगा जो क्रिएटिव हैं, लेकिन मेरे जैसे ‘नॉन-क्रिएटिव’ लोगों का क्या? मेरे लिए तो बस काम ही सब कुछ है।”

अमिताभ बच्चन ने काम पर कही बड़ी बात
83 साल की उम्र में भी एक्टिव रहने वाले अमिताभ ने अपने पुराने पोस्ट का जिक्र करते हुए लिखा कि इंसान को तब तक काम करते रहना चाहिए जब तक उसका शरीर साथ दे। उनके मुताबिक, “काम धीरे-धीरे ही सही लेकिन फल जरूर देता है। सबसे बड़ी बात यह है कि काम आपको व्यस्त रखता है। जब इंसान के पास काम नहीं होता, तो उसके दिमाग में नकारात्मक भावनाएं घर करने लगती हैं। इसलिए एक्टिव रहना ही आपकी असली ताकत है।”
केबीसी से कल्कि तक का सफर
अमिताभ बच्चन के वर्क एथिक्स का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह ‘कौन बनेगा करोड़पति’ जैसे टीवी शो से लेकर ‘कल्कि 2898 AD’ जैसी मेगा-बजट फिल्मों तक, हर जगह अपनी छाप छोड़ रहे हैं। ‘कल्कि’ में उनके अश्वत्थामा के किरदार को दुनियाभर में सराहा गया और फिल्म ने 1000 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया। हाल ही में केबीसी के समापन पर वे काफी भावुक भी नजर आए थे। फिलहाल, वे ‘कल्कि’ के दूसरे पार्ट की तैयारियों में जुटे हैं, जो यह साबित करता है कि महानायक के शब्द सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं हैं, वे उन्हें अपनी असल जिंदगी में भी जी रहे हैं।


