30,000 करोड़ का कौन सा Family Dispute, जिस पर Supreme Court ने कहा- ‘महाभारत छोटा पड़ जाएगा’

30,000 करोड़ का कौन सा Family Dispute, जिस पर Supreme Court ने कहा- ‘महाभारत छोटा पड़ जाएगा’
सुप्रीम कोर्ट ने कपूर परिवार की 30,000 करोड़ रुपये की संपत्ति को लेकर चल रहे विस्फोटक विवाद की तुलना महाभारत से की। न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत के समक्ष चल रहे इस विवाद के सामने महाभारत का युद्ध भी छोटा प्रतीत होगा। यह तीखी टिप्पणी तब आई जब सर्वोच्च न्यायालय दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की माता रानी कपूर की एक नई याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें विवादित आरके फैमिली ट्रस्ट से जुड़े कार्यों को रोकने की मांग की गई थी। इस बीच, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व में मध्यस्थता की कार्यवाही जारी है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने 12 मई को संजय कपूर की 80 वर्षीय माता रानी कपूर द्वारा आरके फैमिली ट्रस्ट और परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़े विवाद में दायर एक नई याचिका की सुनवाई के दौरान की। न्यायपालकों द्वारा फैमिली ट्रस्ट के कामकाज और प्रस्तावित कंपनी बोर्ड की बैठक से जुड़े नए आरोपों को पेश करने के दौरान न्यायमूर्ति परदीवाला ने टिप्पणी की, “हम एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं जहां महाभारत भी छोटा लगेगा। हम इसकी जांच करेंगे।

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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 मई को तय की। यह नया मुकदमा तब सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले, 7 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने रानी कपूर और दिवंगत व्यवसायी की तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच बढ़ते जटिल विवाद को सुलझाने में मदद के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था।

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ट्रस्ट और बोर्ड की बैठक को लेकर नई याचिका

सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपनी नई याचिका में रानी कपूर ने मध्यस्थता की कार्यवाही समाप्त होने तक प्रिया सचदेव कपूर और कुछ अन्य प्रतिवादियों को “आरके फैमिली ट्रस्ट” के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोकने के निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जारी नोटिस के मद्देनजर 18 मई को निर्धारित बोर्ड बैठक पर रोक लगाने की भी मांग की, जिस पर विवादित संपत्ति के एक बड़े हिस्से पर कथित तौर पर नियंत्रण है। याचिका के अनुसार, प्रस्तावित बैठक का उद्देश्य बोर्ड में अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति करना था। रानी कपूर की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मध्यस्थता की कार्यवाही जारी रहने के बावजूद, इन घटनाक्रमों से परिवार से जुड़ी संस्थाओं के नियंत्रण संतुलन में बदलाव आ सकता है।

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