अखिलेश यादव ने कहा बेकार तो डिप्टी सीएम ने किया पलटवार, बोले- अगर मिर्ची लगी है, तो मैं क्या करूं?

अखिलेश यादव ने कहा बेकार तो डिप्टी सीएम ने किया पलटवार, बोले- अगर मिर्ची लगी है, तो मैं क्या करूं?

 Akhilesh Yadav vs Brajesh Pathak PDA Politics:  उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बीच शुरू हुई जुबानी जंग अब खुलकर राजनीतिक हमलों में बदल चुकी है। दोनों नेताओं के बयान सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बने हुए हैं।

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एक अलग अंदाज में पत्रकार की भूमिका निभाते हुए अपने ही मंत्रिमंडल के मंत्री नरेंद्र कश्यप से बातचीत की। बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के  PDA   फार्मूले और सपा की राजनीति पर सवाल उठाए गए। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए ब्रजेश पाठक को “बेकार और नाकाम” तक कह दिया। अब यह मामला केवल बयान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक जमीन तैयार करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

Akhilesh Yadav, brajesh pathak, BJP

नरेंद्र कश्यप के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी

ब्रजेश पाठक के सवालों का जवाब देते हुए पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने सपा के  PDA  फार्मूले को “राजनीतिक शिगूफा” बताया। उन्होंने कहा कि यह सामाजिक न्याय का फार्मूला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक परिवार की सत्ता बचाने की रणनीति है। कश्यप ने आरोप लगाया कि पिछड़े वर्ग के नाम पर राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी वास्तव में केवल एक जाति विशेष के हितों को आगे बढ़ाती रही है। यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की राजनीति पर हमला माना गया।

अखिलेश यादव का तीखा पलटवार

नरेंद्र कश्यप और ब्रजेश पाठक के बयान के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो गए बेकार, अब वो बन गए पत्रकार।” अखिलेश ने आगे लिखा कि प्रदेश की जनता गर्मी, बीमारी और बिजली संकट से परेशान है, जबकि भाजपा सरकार के मंत्री “इंटरव्यू-इंटरव्यू” खेल रहे हैं। उन्होंने ब्रजेश पाठक को सरकार और संगठन दोनों में “नाकाम” बताते हुए तंज कसा कि अब समय बिताने के लिए पत्रकारिता कर रहे हैं। अखिलेश के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। भाजपा और सपा समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई।

‘पत्रकारों का अपमान’ बता कर पलटवार

अखिलेश यादव के बयान पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी तुरंत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख ने उन्हें “खलिहर” और “पत्रकार” कहकर पत्रकारिता का अपमान किया है। पाठक ने कहा कि संवाद करना लोकतंत्र की परंपरा है और पत्रकारिता समाज का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. राममनोहर लोहिया जैसे बड़े नेता भी लेखन और पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि एक राजनेता जनता से संवाद करता है तो उसमें गलत क्या है। इस बयान के जरिए पाठक ने खुद को संवादप्रिय नेता के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की।

‘मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं’

ब्रजेश पाठक का सबसे ज्यादा चर्चित बयान वह रहा जिसमें उन्होंने कहा, “मैं संवाद की परंपरा आगे बढ़ा रहा हूं, उन्हें मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं।” इस एक लाइन ने पूरे राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। भाजपा समर्थकों ने इसे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया। वहीं सपा नेताओं ने इसे जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। राजनीतिक सूत्रों  का मानना है कि यह बयान केवल जवाब नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी था। इससे यह संकेत देने की कोशिश की गई कि भाजपा विपक्ष के हर हमले का जवाब आक्रामक तरीके से देने के मूड में है।

2027 की सियासी तैयारी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी भले दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों ही सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटी हैं। सपा जहां  PDA  फार्मूले के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोटों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा अपने सामाजिक विस्तार को बनाए रखने में लगी है। ऐसे में नेताओं के बीच बयानबाजी आने वाले चुनावी माहौल की शुरुआती झलक मानी जा रही है।

क्या है  PDA फार्मूला

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव 2024 में  PDA  यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के राजनीतिक समीकरण को प्रमुख रणनीति बनाया था। इसी फार्मूले के जरिए सपा ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया और भाजपा को कड़ी चुनौती दी।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक राजेश पांडेय का मानना है कि  PDA   फार्मूला सामाजिक न्याय और जातीय समीकरणों पर आधारित राजनीति का नया संस्करण बनकर सामने आया। भाजपा की ओर से भी 60 बनाम 40 का सामाजिक समीकरण तैयार किया गया, जिसमें अगड़ी जातियों के साथ पिछड़े और दलित वर्गों को जोड़ने की रणनीति अपनाई गई।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *