Diabetes Patients Mango Eating Rule: गर्मियों का सीजन आते ही हर तरफ रसीले आमों की बहार आ जाती है। लेकिन डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए आम खाना किसी बड़े रिस्क जैसा होता है। ज्यादातर मरीजों को लगता है कि मीठा होने के कारण वे आम बिल्कुल नहीं खा सकते। लेकिन मेडिकल साइंस और हालिया न्यूट्रिशन रिसर्च इसके उलट एक कमाल का तरीका बताते हैं।
अगर डायबिटीज के मरीज आम खाते समय 3-स्टेप ईटिंग सीक्वेंस (3-Step Eating Sequence) का नियम अपनाएं, तो उनका ब्लड शुगर अचानक से स्पाइक (शूट अप) नहीं होगा और वे बिना डर के आम के स्वाद का मजा ले सकेंगे। आइए एक्सपर्ट से सीधे और आसान शब्दों में समझते हैं कि यह पूरा फॉर्मूला क्या है और काम कैसे करता है।
क्या है यह 3-स्टेप ईटिंग रूल?
अक्सर लोग आम को खाली पेट या सीधे स्नैक के तौर पर खा लेते हैं, जिससे इसमें मौजूद नेचुरल शुगर (फ्रुक्टोज) तेजी से खून में मिलकर शुगर लेवल बढ़ा देती है। इस खतरे को रोकने के लिए आपको अपनी प्लेट में भोजन का क्रम (Sequence) बदलना होगा:
स्टेप 1: सबसे पहले खाएं फाइबर (Fibre): आम को हाथ लगाने से पहले अपनी मील में मौजूद हरी सब्जियां, सलाद या खीरा-ककड़ी खाएं। फाइबर पेट में जाकर एक जेल जैसी लेयर बना देता है, जिससे पेट में खाना पचने की गति धीमी हो जाती है।
स्टेप 2: दूसरे नंबर पर खाएं प्रोटीन और फैट (Protein & Fats): सलाद के ठीक बाद अपनी मील का प्रोटीन हिस्सा खाएं (जैसे दाल, पनीर, टोफू, अंडा या अंकुरित अनाज)। प्रोटीन और गुड फैट्स को पचने में सबसे ज्यादा समय लगता है, जो इंसुलिन को अचानक बढ़ने से रोकते हैं।
स्टेप 3: सबसे आखिरी में खाएं आम (Carbs/Sugar): जब आप फाइबर और प्रोटीन खा चुके हों, तब सबसे अंत में आम के टुकड़ों को खाएं। चूंकि पेट में पहले से ही फाइबर और प्रोटीन मौजूद हैं, इसलिए आम की शुगर बहुत धीरे-धीरे और कम मात्रा में खून में रिलीज होगी।
सीनियर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल अग्रवाल की राय
एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल अग्रवाल (एमडी) बताते हैं कि यह 3-स्टेप रूल डायबिटीज मैनेजमेंट में बेहद असरदार है, लेकिन इसके साथ ‘पोर्शन कंट्रोल’ यानी मात्रा का ध्यान रखना सबसे बड़ा गेम-चेंजर है।
“इस 3-स्टेप रूल का वैज्ञानिक लॉजिक यह है कि यह पूरी मील के ग्लाइसेमिक लोड (Glycemic Load) को कम कर देता है। जब शुगर से पहले फाइबर और प्रोटीन पेट में जाते हैं, तो ग्लूकोज का एब्जॉर्प्शन धीमा हो जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मरीज भरपेट आम खाएं। डायबिटीज के मरीज एक बार में केवल आधे छोटे आम (लगभग 3-4 स्लाइस) का ही सेवन करें। साथ ही, आम को कभी भी मैंगो शेक, स्मूदी या जूस के रूप में न लें, क्योंकि जूसिंग प्रोसेस से उसका बचा-कुचा फाइबर भी खत्म हो जाता है और शुगर सीधे ब्लड में घुलती है।”
इन बातों का भी रखें खास ख्याल
- अगर शाम को आम खाने का मन है, तो इसे अकेला न खाएं। आम के 3 टुकड़ों के साथ 4-5 बादाम या अखरोट जरूर लें (नट्स का फैट शुगर स्पाइक को रोकेगा)।
- आम खाने के आधे घंटे बाद 15 से 20 मिनट की नॉर्मल वॉक जरूर करें। इससे जो भी ग्लूकोज शरीर में बना है, मसल्स उसे तुरंत एनर्जी के रूप में इस्तेमाल कर लेंगी।
- हर मरीज की बॉडी आम पर अलग तरह से रिएक्ट करती है, इसलिए आम खाने के 2 घंटे बाद ग्लूकोमीटर से अपनी शुगर जरूर चेक करें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


