West Bengal Election: कोलकाता का बड़ा-बाजार बना सियासी शक्ति का नया केंद्र, पूरे बंगाल के प्रवासियों तक जाता है यहाँ का संदेश

West Bengal Election: कोलकाता का बड़ा-बाजार बना सियासी शक्ति का नया केंद्र, पूरे बंगाल के प्रवासियों तक जाता है यहाँ का संदेश

West Bengal Election: कोलकाता का बड़ा-बाजार अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता का नया केंद्र बन चुका है। कैसे? आइए नज़र डालते हैं। 

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में आज दूसरे चरण का मतदान है। 142 सीटों पर आज वोटिंग होगी। कोलकाता के बड़ा-बाजार पर गौर करें, तो यह इलाका अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता का नया केंद्र बन चुका है। पिछले एक दशक में ‘मिनी राजस्थान’ के रूप में पहचान बनाने वाला यह इलाका राजनीतिक दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन का सबसे पसंदीदा मंच बनकर सामने आया है। तंग गलियों और भारी भीड़ के बावजूद यहाँ बड़ी जनसभाओं का आयोजन अब लगभग परंपरा बन चुका है।

अर्थव्यवस्था और राजनीति की ‘लाइफलाइन’

18वीं शताब्दी में ‘सूतानुटी हाट’ के रूप में नींव रखने वाला यह क्षेत्र आज भारत की सबसे बड़ी थोक मंडियों में शुमार है और मारवाड़ी, हिंदी भाषी, गुजराती और बंगाली समुदायों के संगम के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था और राजनीति दोनों की ‘लाइफलाइन’ माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने भी इसे ‘बंगाल की आर्थिक आत्मा’ बताया है।

राजनीतिक जमावड़ा और बढ़ती सक्रियता

पिछले वर्षों में सीएम ममता बनर्जी से लेकर अभिषेक बनर्जी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ जैसे दिग्गज नेताओं ने इस इलाके में जनसभाएं कर सियासी पारा बढ़ाया है। सीएम ममता ने व्यापारियों को ‘बंगाल का गौरव’ बताते हुए उनके हितों की रक्षा का भरोसा दिया। वहीं बीजेपी नेताओं ने रोजगार, न्याय और केंद्र की नीतियों को प्रमुख मुद्दा बनाया।

थोक मंडियों का जाल, आर्थिक ताकत का आधार

पोस्ता बाजार, मछुआ मंडी, तुलापट्टी, राजा कटरा और कलकत्ता सर्राफा बाज़ार जैसे खंडों में फैला बड़ा-बाजार दाल, मसाले, फल, कपड़ा और आभूषणों के विशाल कारोबार का केंद्र है। लोहा पट्टी और सुतापट्टी जैसी मंडियाँ इसकी आर्थिक विविधता को और मज़बूत करती हैं।

क्यों है यहाँ सबकी नज़र?

एक्सपर्ट्स के अनुसार बड़ा-बाजार में सभा का मतलब पूरे बंगाल के व्यापारिक समुदाय और प्रवासी मतदाताओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है। राजस्थान, गुजरात, बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े कारोबारी नेटवर्क इसे चुनावी दृष्टि से ‘हाई-इम्पैक्ट ज़ोन’ बनाते हैं। इसलिए हर चुनाव में यहाँ सियासी ताकत झोंकी जाती है।

  

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