West Bengal Bypolls 2026: पश्चिम बंगाल में रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले TMC के दोनों गुट आमने-सामने आ गए हैं। चुनाव आयोग के चुनाव चिह्न को लेकर असमंजस के बीच दोनों गुटों ने खुद को असली TMC बताते हुए चुनावी तैयारी शुरू कर दी है।
West Bengal Bypolls 2026 : कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों के बीच सियासी जंग तेज हो गई है। रेजीनगर और नंदीग्राम सीट पर होने वाले उपचुनाव दोनों गुटों के लिए पहली बड़ी चुनावी परीक्षा माने जा रहे हैं। वहीं, पार्टी के चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग किस गुट को TMC का आधिकारिक चुनाव चिह्न देता है।
चुनाव आयोग ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की रेजीनगर और पूर्व मेदिनीपुर की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को परिणाम घोषित किए जाएंगे। नामांकन प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू होकर 16 सितंबर तक चलेगी।
दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व राज्य मंत्री और कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले फिरहाद हकीम अब रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट में हैं। यह गुट खुद को ‘असली TMC’ बता रहा है। हकीम ने दावा किया कि उनका गुट रेजीनगर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेगा। हकीम ने कहा कि हम ही TMC हैं और दोनों सीटों पर जीत हासिल करेंगे। इसी गुट के विधानसभा में मुख्य सचेतक अखरुज्जमां ने बताया कि उम्मीदवारों के नाम तय करने के लिए गुरुवार को कार्यसमिति की बैठक होगी।
ममता गुट ने नहीं खोले पत्ते
ममता बनर्जी के गुट ने अब तक उम्मीदवारों के चयन को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रशासन पर नियंत्रण का इस्तेमाल कर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा पुलिस का इस्तेमाल कर चुनाव पर नियंत्रण कर सकती है और TMC समर्थकों पर हमले हो सकते हैं।
नंदीग्राम में उम्मीदवार उतारना ममता गुट के लिए चुनौती
ममता बनर्जी गुट के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नंदीग्राम में मजबूत उम्मीदवार उतारना पार्टी के लिए चुनौती हो सकता है। उन्होंने कहा कि शेख सूफियान वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम से ममता बनर्जी के चुनाव एजेंट थे। उस चुनाव में ममता बनर्जी को भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
रेजीनगर में हिंदू-मुस्लिम समीकरण अहम
दोनों सीटों पर चुनावी मुकाबला बेहद ध्रुवीकरण होने की संभावना है। रेजीनगर सीट पर करीब 27-30 प्रतिशत हिंदू मतदाता हैं, जबकि बाकी मतदाता मुस्लिम हैं। 2025 में निलंबित किए गए TMC के पूर्व भरतपुर विधायक हुमायूं कबीर ने कहा कि यदि अन्य दल हिंदू मतदाताओं से संपर्क करते हैं तो वह मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन मांगेंगे।
वहीं, नंदीग्राम में मतदाताओं का धार्मिक समीकरण रेजीनगर के लगभग उलट है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने उपचुनाव की घोषणा के बाद कहा कि नंदीग्राम की जनता उनकी जीत बड़े अंतर से सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।
फाल्टा के नतीजों से बढ़ी चिंता
राजनीतिक दलों की नजर इन उपचुनावों पर इसलिए भी है क्योंकि हाल में फाल्टा विधानसभा सीट के परिणामों ने सियासी समीकरणों को प्रभावित किया है। भाजपा ने फाल्टा सीट 1,09,021 मतों के अंतर से जीती थी। 2011 के बाद तीन बार यह सीट जीत चुकी TMC इस बार चौथे स्थान पर रही।
तय होगा असली TMC कौन?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक रेजीनगर और नंदीग्राम के उपचुनाव सिर्फ दो सीटों की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि इनसे यह भी संकेत मिल सकता है कि जनता किस गुट को असली TMC के तौर पर स्वीकार करती है। राजनीतिक स्तंभकार सुवाशिस मैत्रा ने कहा कि चुनाव चिह्न इस मुकाबले में बेहद महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि वाम दल और कांग्रेस कितना प्रभाव छोड़ पाते हैं। फाल्टा में इन दलों के प्रदर्शन पर भी नजर गई थी। इन उपचुनावों के नतीजों का असर आगामी कोलकाता और जिलों के नगर निकाय चुनावों पर भी पड़ सकता है।

