गोंडा में भूमि विवाद से जुड़े एक मुकदमे में सिविल जज को फोन कर कथित तौर पर प्रभावित करने के आरोप में मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू हुई है। इस मामले पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हालांकि, समय की कमी के कारण कोर्ट सुनवाई पूरी नहीं कर सका। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की बेंच के सामने मामले से जुड़े आरोपों पर विचार किया गया। आरोप है कि 15 जुलाई को तत्कालीन गोंडा मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शबीना खान को फोन किया था। जब जज ने लंबित मुकदमे के बारे में बात करने से मना किया, तो मंडलायुक्त ने कथित तौर पर उन्हें भला-बुरा कहा। पीठासीन अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश का संदेह इस घटना के बाद सिविल जज ने गोंडा के जनपद न्यायाधीश को पत्र लिखकर पूरी जानकारी दी थी। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि संबंधित मुकदमे को उनकी अदालत से दूसरी अदालत में ट्रांसफर कर दिया जाए। यह मामला हाईकोर्ट के सामने तब आया, जब एक ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई हो रही थी। सिंगल बेंच ने टिप्पणी की थी कि जज ने फोन पर बातचीत का जो तरीका और भाषा बताई, उससे पहली नजर में लगता है कि पीठासीन अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। इस मामले में 3 सितंबर को सुनवाई कर रही बेंच के न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था। इसके बाद मुख्य न्यायमूर्ति के निर्देश पर मामले को मौजूदा बेंच के सामने सुनवाई के लिए भेजा गया।

