विंध्य विकास प्राधिकरण: नए जातीय समीकरणों के बीच शहडोल संभाग की अनदेखी

विंध्य विकास प्राधिकरण: नए जातीय समीकरणों के बीच शहडोल संभाग की अनदेखी

सतना। राज्य शासन ने विंध्य विकास प्राधिकरण के अशासकीय सदस्यों को नामांकित करने से साथ अध्यक्ष पद पर रीवा जिले की मनगवां विधानसभा के पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति को बैठाया है। उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी रीवा जिले से अजय सिंह और सतना जिले से संजय तीर्थवानी को दी गई है। लेकिन इस नियुक्ति के साथ ही विंध्य की राजनीति भी गरमाने लगी है। एक ओर इस नियुक्ति में शहडोल संभाग की अनदेखी करने के आरोप लगने शुरू हो गए हैं तो दूसरी ओर जातीय समीकरणों की नया तानाबाना बुनने के चर्चा भी जोर पकड़ रही है।

एक पूरे संभाग की अनदेखी का किस्सा

दरअसल विंध्य विकास प्राधिकरण में रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के आठ जिलों को शामिल किया गया है। जिसमें रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया एवं डिंडोरी शामिल हैं। प्राधिकरण में हर जिले से एक-एक निजी व्यक्ति को सदस्य बनाया जाता रहा है। साथ ही रीवा, शहडोल संभाग से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के दायित्व भी साझा किए जाते थे। पूर्व की स्थितियों को अगर देखे तो जब अजय प्रताप सिंह अध्यक्ष बने थे वे सीधी जिले के थे। उस दौरान रामदास मिश्रा सतना जिले से और अनूपपुर जिले से अनिल गुप्ता को उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसी तरह सुभाष सिंह जब सीधी जिले से अध्यक्ष बने थे तब रीवा जिले से विमलेश मिश्रा और अनूपपुर जिले से रामदास पुरी को उपाध्यक्ष का जिम्मा दिया गया था। इस तरह इन दोनों कार्यकाल में शहडोल संभाग का प्रतिनिधित्व दिया जाता रहा है। लेकिन इस बार पंचूलाल प्रजापति के अध्यक्षीय कार्यकाल में शहडोल जिले को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया।

जातीय समीकरण से सवर्ण हाशिये पर

विंध्य में जातीय समीकरण राजनीतिक दृष्टिकोण से सदैव प्रभावी भूमिका में रहे हैं। ऐसे में विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन में जातीय समीकरणों का ध्यान रखा जाता रहा है। अजय प्रताप सिंह के कार्यकाल में अध्यक्ष क्षत्रिय, उपाध्यक्ष द्वय ब्राह्मण और वैश्य का समीकरण बनाया गया था। सुभाष सिंह के कार्यकाल में अध्यक्ष क्षत्रिय, उपाध्यक्ष द्वय ब्राह्मण और पिछड़ा का समीकरण बनाया गया था। लेकिन इस बार की नियुक्तियों में अध्यक्ष एससी, उपाध्यक्ष द्वय में अनिल सिंह पिछड़ा और संजय तीर्थवानी सिंधी का समीकरण बनाया गया।

सतना भाजपा के अंदरखाने में असंतोष

इस बार विंध्य विकास प्राधिकरण के पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर सतना जिले की अपेक्षाएं सवर्ण समाज से बनाए जाने की थीं। इसके पीछे भाजपा के अंदरखाने में ही तर्क दिए जा रहे थे कि यहां मंत्री एससी वर्ग से, सांसद पिछड़ा वर्ग से, महापौर पिछड़ा वर्ग से और जिपं अध्यक्ष एसटी वर्ग से है। लिहाजा प्राधिकरण में जब सतना जिले का प्रतिनिधित्व मिलेगा तो उसमें सवर्ण वर्ग को शामिल किया जाएगा। लेकिन जिस तरीके से अल्पसंख्यक सिंधी समाज से वह भी वरिष्ठता क्रम में काफी पीछे रहे भाजपा कार्यकर्ता को मौका दिया गया उससे पार्टी अंदरखाने में असंतोष का ज्वार उबलने लगा है। हालांकि इस पर आधिकारिक तौर से खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है लेकिन अंदरखाने से हवा यह चल रही है कि यूजीसी इफेक्ट के चलते सतना से चयन एक नए चेहरे का किया गया है।

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