राजस्थान में 274 बीघा भूमि पर बन रहा हाईटेक रेलवे कंटेनर डिपो, 100 km/h से दौड़ेगी मालगाड़ी

राजस्थान में 274 बीघा भूमि पर बन रहा हाईटेक रेलवे कंटेनर डिपो, 100 km/h से दौड़ेगी मालगाड़ी

High-Tech Railway Container Depot: इतिहास अक्सर खुद को दोहराता है और जयपुर से 65 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक कस्बे बधाल के लिए यह कहावत सच साबित हो रही है। जिस भूमि पर कभी ब्रिटिश काल का गुप्त एरोड्रम हुआ करता था, अब वहां अत्याधुनिक रेलवे कंटेनर डिपो आकार ले रहा है।

राज्य सरकार और निजी लॉजिस्टिक्स कंपनी के प्रयासों से इलाके में ना केवल व्यापारिक रौनक लौटेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे।

Badhal Railway Line
फोटो: पत्रिका

पिछले वर्ष राजस्थान सरकार ने ग्लोब कास्ट शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड को 45 हैक्टेयर यानि करीब 274 बीघा भूमि आवंटित की थी। वर्तमान में यहां भूमि समतलीकरण का कार्य जारी है। यह टर्मिनल डिपो सीधे प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लाइन दादरी-मुंबई से जुड़ेगा, जहां मालगाड़ियां 100 किमीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी।

डिपो की रेलवे लाइन मलिकपुर-पचार स्टेशन से जोड़ी जाएगी, जिसका कार्य जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। यहां करीब 2 लाख स्क्वायर फीट में गोदाम बनाए जाएंगे, जिससे सीमेंट, फर्टिलाइजर, कृषि उत्पाद, पत्थर और हैंडीक्राफ्ट के भंडारण में आसानी होगी। सड़क मार्ग को सुदृढ़ करने के लिए बधाल से गोविंदगढ़ तक 22 किलोमीटर लंबा फोरलेन हाईवे बन रहा है, जिसका कार्य जल्द पूरा होगा।

कंटेनर डिपो एक ड्राय पोर्ट की तरह काम करेगा। जिससे निर्यातकों को बंदरगाहों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, सीमा शुल्क निकासी और कागजी कार्रवाई यहीं पूरी हो जाएगी। सड़क मार्ग के मुकाबले रेल कनेक्टिविटी से माल भेजना सस्ता और तेज होगा। कालाडेरा, मंडा और खाटूश्यामजी क्षेत्र के उद्योगों को अपने उत्पाद सीधे मुंबई या गुजरात के बंदरगाहों तक भेजने का नया विकल्प मिलेगा।

रोजगार और आर्थिक विकास की नई लहर

प्रशासक विजय सामोता और कंपनी के गिरीश आचार्य के अनुसार इस डिपो के पूर्ण विकसित होने पर हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। लोडिंग, पैकिंग, हैंडलिंग और स्टोरेज जैसी कई छोटी इकाइयां यहां विकसित होंगी। अनुमान है कि फोरलेन हाईवे पर प्रतिदिन 400 से 500 मालवाहक वाहनों की आवाजाही होगी, जिससे स्थानीय होटल, गैरेज और अन्य छोटे व्यवसायों को भी मजबूती मिलेगी।

इतिहास के पन्नों में बधाल की हवाई पट्टी

मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट के दस्तावेजों के अनुसार यह स्थान कभी मारवाड़ के महाराजा उम्मेद सिंह के विजन का हिस्सा था। 1924-1938 के बीच जोधपुर रियासत में 23 हवाई पट्टियां विकसित की गई थीं, जिनमें कराची-जोधपुर-दिल्ली मार्ग पर बधाल एक महत्वपूर्ण स्टॉप था। द्वितीय विश्व युद्ध में 1941 के दौरान इन हवाई पट्टियों का उपयोग रॉयल एयर फोर्स और अमेरिकी सेना की वायु सेना द्वारा प्रशिक्षण और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया था।

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