कथित वैद्य का शराब पीते वीडियो वायरल:जमुई में बिना रजिस्ट्रेशन चलाता है क्लीनिक, पेड़-पौधों को तोड़कर बनाते है दवा

कथित वैद्य का शराब पीते वीडियो वायरल:जमुई में बिना रजिस्ट्रेशन चलाता है क्लीनिक, पेड़-पौधों को तोड़कर बनाते है दवा

जमुई के सिकंदरा प्रखंड के लोहसिंघानी गांव निवासी कथित वैद्य श्री साहब वैध जी एक वायरल वीडियो के कारण विवादों में घिर गए हैं। इस वीडियो में वे अपने सहयोगियों के साथ शराब पीते हुए नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो ठंड के मौसम का है, लेकिन इसके वायरल होते ही इलाके में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वीडियो में कथित वैद्य को अपने समर्थकों के साथ जाम टकराते साफ देखा जा सकता है। बिहार में लागू शराबबंदी कानून के मद्देनजर यह मामला गंभीर माना जा रहा है। इसके साथ ही, बिना पंजीकरण के क्लीनिक चलाने और इलाज करने को लेकर भी उन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बेटे ने वीडियो को बताया AI हालांकि, इस पूरे मामले पर वैध जी के परिवार की ओर से सफाई भी सामने आई है। उनके पुत्र रवि कुमार का कहना है कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए बनाया गया है और उनके पिता की छवि खराब करने की साजिश की जा रही है। कथित वैद्य साहब का दावा है कि उन्होंने झारखंड के धनबाद में अपने गुरु के पास आठ वर्षों तक रहकर जड़ी-बूटियों की पहचान और उपचार की विधि सीखी है। उनके अनुसार, गुरु के आदेश पर उन्होंने आठ साल तक मुफ्त में लोगों का इलाज भी किया। पेड़-पौधों को तोड़कर लोगों का करता था इलाज वहीं, उनके पड़ोस में रहने वाले कुरहाडीह निवासी मक्केश्वर महतो सहित अन्य ग्रामीणों ने उनके दावों पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वैध जी पहले जंगलों में मवेशी चराते थे और वहीं से पेड़-पौधों को तोड़कर उन्हें दवा बताकर लोगों का इलाज करते थे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई बार उनके इलाज के बावजूद मरीजों को कोई लाभ नहीं हुआ। यहां तक कि उन पर जड़ी-बूटियों में पेनकिलर मिलाकर असर दिखाने की कोशिश करने का भी आरोप है। पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। बिना रजिस्ट्रेशन चला रहे क्लीनिक स्थानीय लोगों के अनुसार, कथित वैद्य के राज्य के विभिन्न जिलों में दर्जनों क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जिनका कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनके पास इलाज के लिए पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके इलाज के फायदे के दावे किए जाते रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो वास्तविक है या एडिटेड, साथ ही शराबबंदी कानून के उल्लंघन के पहलू पर भी जांच की जा रही है। बिना रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते प्रैक्टिस सीएस अशोक कुमार ने बताया कि आयुर्वेद में बीएनएस डिग्री प्राप्त करने के लिए 12वीं (फिजिक्स केमिस्ट्री और बायो ) से पास होना जरूरी है। इसके बाद बीएएमएस की डिग्री होनी चाहिए। बीएएमएस 5.5 साल का कोर्स होता है जिसमें 1 साल की इंटर्नशिप शामिल होती है। एडमिशन आमतौर पर नीट परीक्षा के आधार पर होता है। बीएएमएस पूरा करने के बाद राज्य आयुर्वेदिक परिषद में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन के आप प्रैक्टिस नहीं कर सकते। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आप आयुर्वेदिक चिकित्सक कहलाते हैं। जमुई के सिकंदरा प्रखंड के लोहसिंघानी गांव निवासी कथित वैद्य श्री साहब वैध जी एक वायरल वीडियो के कारण विवादों में घिर गए हैं। इस वीडियो में वे अपने सहयोगियों के साथ शराब पीते हुए नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो ठंड के मौसम का है, लेकिन इसके वायरल होते ही इलाके में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वीडियो में कथित वैद्य को अपने समर्थकों के साथ जाम टकराते साफ देखा जा सकता है। बिहार में लागू शराबबंदी कानून के मद्देनजर यह मामला गंभीर माना जा रहा है। इसके साथ ही, बिना पंजीकरण के क्लीनिक चलाने और इलाज करने को लेकर भी उन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बेटे ने वीडियो को बताया AI हालांकि, इस पूरे मामले पर वैध जी के परिवार की ओर से सफाई भी सामने आई है। उनके पुत्र रवि कुमार का कहना है कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए बनाया गया है और उनके पिता की छवि खराब करने की साजिश की जा रही है। कथित वैद्य साहब का दावा है कि उन्होंने झारखंड के धनबाद में अपने गुरु के पास आठ वर्षों तक रहकर जड़ी-बूटियों की पहचान और उपचार की विधि सीखी है। उनके अनुसार, गुरु के आदेश पर उन्होंने आठ साल तक मुफ्त में लोगों का इलाज भी किया। पेड़-पौधों को तोड़कर लोगों का करता था इलाज वहीं, उनके पड़ोस में रहने वाले कुरहाडीह निवासी मक्केश्वर महतो सहित अन्य ग्रामीणों ने उनके दावों पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वैध जी पहले जंगलों में मवेशी चराते थे और वहीं से पेड़-पौधों को तोड़कर उन्हें दवा बताकर लोगों का इलाज करते थे। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई बार उनके इलाज के बावजूद मरीजों को कोई लाभ नहीं हुआ। यहां तक कि उन पर जड़ी-बूटियों में पेनकिलर मिलाकर असर दिखाने की कोशिश करने का भी आरोप है। पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। बिना रजिस्ट्रेशन चला रहे क्लीनिक स्थानीय लोगों के अनुसार, कथित वैद्य के राज्य के विभिन्न जिलों में दर्जनों क्लीनिक संचालित हो रहे हैं, जिनका कोई वैध रजिस्ट्रेशन नहीं है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनके पास इलाज के लिए पहुंचते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनके इलाज के फायदे के दावे किए जाते रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वीडियो वास्तविक है या एडिटेड, साथ ही शराबबंदी कानून के उल्लंघन के पहलू पर भी जांच की जा रही है। बिना रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकते प्रैक्टिस सीएस अशोक कुमार ने बताया कि आयुर्वेद में बीएनएस डिग्री प्राप्त करने के लिए 12वीं (फिजिक्स केमिस्ट्री और बायो ) से पास होना जरूरी है। इसके बाद बीएएमएस की डिग्री होनी चाहिए। बीएएमएस 5.5 साल का कोर्स होता है जिसमें 1 साल की इंटर्नशिप शामिल होती है। एडमिशन आमतौर पर नीट परीक्षा के आधार पर होता है। बीएएमएस पूरा करने के बाद राज्य आयुर्वेदिक परिषद में रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन के आप प्रैक्टिस नहीं कर सकते। रजिस्ट्रेशन के बाद ही आप आयुर्वेदिक चिकित्सक कहलाते हैं।  

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