Varun Sanyal ने Asian Games से हटने पर तोड़ी चुप्पी, चयन प्रक्रिया और टीम व्यवस्था पर उठाए सवाल

Varun Sanyal ने Asian Games से हटने पर तोड़ी चुप्पी, चयन प्रक्रिया और टीम व्यवस्था पर उठाए सवाल

एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद भारतीय एमएमए खिलाड़ी वरुण सान्याल ने पहली बार पूरे मामले पर खुलकर बात की है। उन्होंने माना कि अकेले वजन कम करने की कोशिश करना पीछे मुड़कर देखने पर गलत फैसला था, लेकिन उनके मुताबिक हालात ऐसे थे कि उन्हें यह सब खुद ही करना पड़ा। इस बीच उन्होंने निराशा के साथ अपनी टीम की उपलब्धि पर गर्व भी जताया है।वरुण सान्याल ने एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद पहली बार अपनी स्थिति पर खुलकर बात की है। 27 वर्षीय वरुण को जापान के आइची-नागोया में पुरुषों की 77 किलोग्राम स्पर्धा में हिस्सा लेना था, लेकिन मुकाबले से पहले वजन कम करने की कोशिश के दौरान वह बेहोश हो गए। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें खेलने के लिए पूरी तरह फिट नहीं माना और उन्हें प्रतियोगिता से हटना पड़ा।वरुण ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि अकेले वजन कम करने की कोशिश करना उनकी गलती थी। हालांकि, उनका कहना है कि उनके पास दूसरा रास्ता भी नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें वजन कम करने की प्रक्रिया के दौरान अकेले क्यों रहना पड़ा। वरुण ने कहा कि वह इस घटना को लेकर खुद को लगातार दोष देने के बजाय आगे बढ़ना चाहते हैं।मौजूद जानकारी के अनुसार वरुण को एशियाई खेलों की भारतीय टीम में 2 सितंबर को शामिल किया गया था। चयन प्रक्रिया काफी देर से पूरी हुई थी और उन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने की जानकारी करीब दो सप्ताह पहले मिली। वरुण के मुताबिक वह जनवरी में एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई कर चुके थे, लेकिन चयन को लेकर लंबे समय तक स्थिति साफ नहीं थी। इसके बाद उन्होंने अपना ध्यान पेशेवर मुकाबलों पर लगा दिया था।उन्होंने बताया कि मई में एक अन्य भारतीय खिलाड़ी ने भी उज्बेकिस्तान में चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, लेकिन एशिया में उसकी रैंकिंग पर्याप्त ऊंची नहीं रही। वरुण उस समय एशिया में चौथे स्थान पर थे और पेशेवर मुकाबले की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच उन्हें अचानक एशियाई खेलों के लिए चुने जाने की जानकारी मिली और वह टीम के साथ जापान पहुंच गए।गौरतलब है कि एशियाई खेलों में भारतीय एमएमए दल के साथ सहयोगी कर्मचारियों की मौजूदगी भी नहीं थी। इससे वरुण को वजन कम करने जैसी अहम प्रक्रिया खुद संभालनी पड़ी। इससे पहले वह खेलों की व्यवस्था को लेकर भी अपनी परेशानी बता चुके थे। उन्होंने खिलाड़ियों के कमरे मिलने में देरी और भोजन के बिना कई घंटे इंतजार करने जैसी समस्याओं का जिक्र किया था।रविवार को वजन कम करने के दौरान वह जहाज पर बने खिलाड़ियों के ठहरने के स्थान में सौना कक्ष में बेहोश हो गए थे। एमएमए स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष निखिल कुंदर के अनुसार, एक नेपाली खिलाड़ी ने वरुण को बेहोशी की हालत में देखा, उन्हें जगाया और अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद वरुण को अस्पताल ले जाया गया।भारतीय ओलंपिक संघ के अनुसार वरुण को सौना के दौरान शरीर में ऐंठन और बदन दर्द की शिकायत हुई थी। उनकी चिकित्सकीय जांच और एहतियाती रक्त जांच कराई गई, जिनके परिणाम सामान्य रहे। हालांकि, अगले दिन भी वह मुकाबले जैसे कठिन खेल के लिए पूरी तरह ठीक महसूस नहीं कर रहे थे। कोच से बातचीत के बाद उन्होंने प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया।वरुण ने माना कि वह पदक के लिए मुकाबला करना चाहते थे और इस मौके को गंवाने से निराश हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय एमएमए दल ने तमाम चुनौतियों के बावजूद पदक जीता, जो बड़ी उपलब्धि है। सुचिका तारियाल ने महिलाओं की पारंपरिक 60 किलोग्राम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए एमएमए का पहला पदक हासिल किया है। वरुण ने कहा कि अब वह निराशा पर ध्यान देने के बजाय इस उपलब्धि पर गर्व करना चाहते हैं और अपने पेशेवर करियर पर आगे बढ़ना चाहते हैं। 

एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद भारतीय एमएमए खिलाड़ी वरुण सान्याल ने पहली बार पूरे मामले पर खुलकर बात की है। उन्होंने माना कि अकेले वजन कम करने की कोशिश करना पीछे मुड़कर देखने पर गलत फैसला था, लेकिन उनके मुताबिक हालात ऐसे थे कि उन्हें यह सब खुद ही करना पड़ा। इस बीच उन्होंने निराशा के साथ अपनी टीम की उपलब्धि पर गर्व भी जताया है।

वरुण सान्याल ने एशियाई खेलों से बाहर होने के बाद पहली बार अपनी स्थिति पर खुलकर बात की है। 27 वर्षीय वरुण को जापान के आइची-नागोया में पुरुषों की 77 किलोग्राम स्पर्धा में हिस्सा लेना था, लेकिन मुकाबले से पहले वजन कम करने की कोशिश के दौरान वह बेहोश हो गए। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें खेलने के लिए पूरी तरह फिट नहीं माना और उन्हें प्रतियोगिता से हटना पड़ा।

वरुण ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें लगता है कि अकेले वजन कम करने की कोशिश करना उनकी गलती थी। हालांकि, उनका कहना है कि उनके पास दूसरा रास्ता भी नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें वजन कम करने की प्रक्रिया के दौरान अकेले क्यों रहना पड़ा। वरुण ने कहा कि वह इस घटना को लेकर खुद को लगातार दोष देने के बजाय आगे बढ़ना चाहते हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार वरुण को एशियाई खेलों की भारतीय टीम में 2 सितंबर को शामिल किया गया था। चयन प्रक्रिया काफी देर से पूरी हुई थी और उन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने की जानकारी करीब दो सप्ताह पहले मिली। वरुण के मुताबिक वह जनवरी में एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई कर चुके थे, लेकिन चयन को लेकर लंबे समय तक स्थिति साफ नहीं थी। इसके बाद उन्होंने अपना ध्यान पेशेवर मुकाबलों पर लगा दिया था।

उन्होंने बताया कि मई में एक अन्य भारतीय खिलाड़ी ने भी उज्बेकिस्तान में चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, लेकिन एशिया में उसकी रैंकिंग पर्याप्त ऊंची नहीं रही। वरुण उस समय एशिया में चौथे स्थान पर थे और पेशेवर मुकाबले की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच उन्हें अचानक एशियाई खेलों के लिए चुने जाने की जानकारी मिली और वह टीम के साथ जापान पहुंच गए।

गौरतलब है कि एशियाई खेलों में भारतीय एमएमए दल के साथ सहयोगी कर्मचारियों की मौजूदगी भी नहीं थी। इससे वरुण को वजन कम करने जैसी अहम प्रक्रिया खुद संभालनी पड़ी। इससे पहले वह खेलों की व्यवस्था को लेकर भी अपनी परेशानी बता चुके थे। उन्होंने खिलाड़ियों के कमरे मिलने में देरी और भोजन के बिना कई घंटे इंतजार करने जैसी समस्याओं का जिक्र किया था।

रविवार को वजन कम करने के दौरान वह जहाज पर बने खिलाड़ियों के ठहरने के स्थान में सौना कक्ष में बेहोश हो गए थे। एमएमए स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष निखिल कुंदर के अनुसार, एक नेपाली खिलाड़ी ने वरुण को बेहोशी की हालत में देखा, उन्हें जगाया और अधिकारियों को जानकारी दी। इसके बाद वरुण को अस्पताल ले जाया गया।

भारतीय ओलंपिक संघ के अनुसार वरुण को सौना के दौरान शरीर में ऐंठन और बदन दर्द की शिकायत हुई थी। उनकी चिकित्सकीय जांच और एहतियाती रक्त जांच कराई गई, जिनके परिणाम सामान्य रहे। हालांकि, अगले दिन भी वह मुकाबले जैसे कठिन खेल के लिए पूरी तरह ठीक महसूस नहीं कर रहे थे। कोच से बातचीत के बाद उन्होंने प्रतियोगिता से हटने का फैसला किया।

वरुण ने माना कि वह पदक के लिए मुकाबला करना चाहते थे और इस मौके को गंवाने से निराश हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय एमएमए दल ने तमाम चुनौतियों के बावजूद पदक जीता, जो बड़ी उपलब्धि है। सुचिका तारियाल ने महिलाओं की पारंपरिक 60 किलोग्राम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए एमएमए का पहला पदक हासिल किया है। वरुण ने कहा कि अब वह निराशा पर ध्यान देने के बजाय इस उपलब्धि पर गर्व करना चाहते हैं और अपने पेशेवर करियर पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

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