UPSC 2025 Selection: OBC Creamy Layer नियमों पर Supreme Court में Special Bench के गठन की तैयारी

UPSC 2025 Selection: OBC Creamy Layer नियमों पर Supreme Court में Special Bench के गठन की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को इस बात पर विचार करने के लिए सहमत हो गया कि क्या OBC क्रीमी-लेयर क्राइटेरिया पर 11 मार्च के उसके फैसले को सिविल सेवा परीक्षा 2025 के ज़रिए चुने गए उम्मीदवारों पर लागू किया जाना चाहिए। डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा रिकमेंड किए गए 958 उम्मीदवारों को सेवाएँ आवंटित करने की अनुमति मांगी है। यह आवंटन फैसले से पहले लागू क्रीमी-लेयर नियमों के तहत किया जाना है। केंद्र ने तर्क दिया कि 2025 की पूरी हो चुकी चयन प्रक्रिया पर इस फैसले को लागू करने से एक जैसी स्थिति वाले उम्मीदवारों के साथ असमान व्यवहार हो सकता है और उनकी ट्रेनिंग व कैडर आवंटन में देरी हो सकती है। दिन की कार्यवाही की शुरुआत में, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने यह मामला उठाया। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

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मेहता ने कहा कि सरकार ने एक निपट चुके मामले में अर्ज़ी दाखिल की है और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच से तत्काल सुनवाई की मांग की है। एक पक्षकार की ओर से पेश हुए सीनियर वकील संजय हेगड़े ने बताया कि 11 मार्च का फ़ैसला जस्टिस नरसिम्हा और आर महादेवन ने सुनाया था, जो अब अलग-अलग बेंच में बैठते हैं। चीफ़ जस्टिस ने कहा हमें एक स्पेशल बेंच बनानी होगी, और साथ ही कहा कि वह जजों से सलाह-मशविरा करेंगे। 

11 मार्च के फ़ैसले में क्या कहा गया था

सरकार की यह अर्ज़ी ‘यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि 14 अक्टूबर 2004 को जारी किया गया स्पष्टीकरण वाला पत्र, OBC क्रीमी लेयर की पहचान तय करने वाले 8 सितंबर 1993 के ऑफ़िस मेमोरेंडम (कार्यालय ज्ञापन) से ऊपर नहीं हो सकता। कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि पब्लिक सेक्टर की कंपनी या प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले माता-पिता की सैलरी या आय के आधार पर अकेले यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आता है या नहीं। 1993 के मेमोरेंडम में बताई गई आय और संपत्ति की शर्तों के साथ-साथ माता-पिता के पद और नौकरी की श्रेणी की भी जाँच की जानी चाहिए।

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केंद्र सरकार छूट क्यों चाहती है?

सिविल सेवा परीक्षा 2025 का नोटिफिकेशन 22 जनवरी, 2025 को जारी किया गया था। प्रारंभिक परीक्षा 25 मई को हुई थी, जबकि मुख्य परीक्षा 22 से 31 अगस्त के बीच आयोजित की गई थी। UPSC ने 6 मार्च, 2026 को अंतिम परिणाम घोषित किए और IAS, IFS, IPS तथा अन्य केंद्रीय सेवाओं में नियुक्ति के लिए 958 उम्मीदवारों की सिफारिश की। इसके पांच दिन बाद, 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने रोहित नाथन मामले में फैसला सुनाया। केंद्र सरकार का कहना है कि उम्मीदवारों ने फैसले से पहले लागू प्रशासनिक व्याख्या के आधार पर आवेदन किया था और परीक्षा में भाग लिया था।

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