Fixed Deposit Rules: जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो बैंक की FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट सबसे आसान सहारा नजर आता है। लेकिन मैच्योरिटी से पहले एफडी तोड़ना हमेशा फायदे का सौदा नहीं होता। बैंक पेनल्टी लगा सकता है, ब्याज कम मिल सकता है और टैक्स का असर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में जल्दबाजी में एफडी बंद करने के बजाय पहले पूरा हिसाब लगाना जरूरी है। मौजूदा समय में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई निवेशक फिर से एफडी, बॉन्ड और दूसरे फिक्स्ड इनकम विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। कई सरकारी, स्मॉल फाइनेंस और निजी बैंक एफडी पर 8.50% तक ब्याज दे रहे हैं। अगर मेडिकल इमरजेंसी, अचानक आए खर्च या दूसरी जरूरतों के लिए FD तोड़ने की नौबत आ जाए, तो इन 5 बातों को जरूर जान लें।
FD तोड़ने पर कितनी लगेगी पेनल्टी
टैक्स एवं निवेश सलाहकार बलवंत जैन के अनुसार, एफडी समय से पहले बंद करने पर बैंक पेनल्टी लगा सकता है। यह शुल्क हर बैंक में अलग हो सकता है और बैंक की शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए एफडी तोड़ने से पहले बैंक की वेबसाइट, ऐप या कस्टमर केयर से यह जरूर पता करें कि समय से पहले पैसा निकालने पर कितनी पेनल्टी लगेगी। कई बार छोटी सी पेनल्टी भी आपके मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित कर सकती है।
जिस ब्याज दर पर FD कराई थी, जरूरी नहीं वही मिले
यह सबसे अहम बात है। अगर आपने एफडी 7.5% या 8% ब्याज दर पर कराई थी, तो मैच्योरिटी से पहले उसे तोड़ने पर जरूरी नहीं कि आपको उसी दर से ब्याज मिले। बैंक अक्सर उस अवधि के लिए लागू ब्याज दर के आधार पर ब्याज की गणना करता है, जितने समय तक पैसा वास्तव में FD में रहा। इसके अलावा समय से पहले निकासी पर पेनल्टी भी लग सकती है। यानी फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने से पहले सिर्फ जमा रकम मत देखें। यह भी देखें कि अब तक कितना ब्याज मिला और कितना ब्याज हाथ से निकल सकता है।
ब्याज पर लगने वाले टैक्स का भी रखें हिसाब
एफडी से मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। इसलिए समय से पहले एफडी तोड़ने का फैसला करते समय टैक्स का असर भी समझना जरूरी है। आपको यह देखना चाहिए कि एफडी से अब तक कितना ब्याज मिला है और आपकी कुल आय के हिसाब से उस पर कितना टैक्स बन सकता है। सिर्फ बैंक से मिलने वाली रकम देखकर फैसला करना सही नहीं होगा।
लोन या ओवरड्राफ्ट के बारे में पूछें
अगर पैसों की जरूरत कुछ समय के लिए है, तो बिना एफडी तोड़े भी काम चलाया जा सकता है। कई बैंक एफडी के बदले लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देते हैं। इसमें आपकी एफडी चलती रहती है और जरूरत के मुताबिक रकम भी मिल सकती है। हालांकि, इस विकल्प में ब्याज और दूसरी शर्तें लागू होती हैं। इसलिए FD तोड़ने और FD के बदले लोन लेने, दोनों का खर्च पहले जोड़कर देखना चाहिए। कई मामलों में कुछ समय की जरूरत के लिए एफडी को पूरी तरह तोड़ने के बजाय यह विकल्प ज्यादा बेहतर हो सकता है।
FD तोड़ने का पूरा नुकसान जोड़कर देखें
FD तोड़ने का फैसला सिर्फ पेनल्टी देखकर नहीं करना चाहिए। पूरा हिसाब लगाना जरूरी है। इस कैलकुलेशन में ये चीजें शामिल करें:
- समय से पहले FD तोड़ने पर लगने वाली पेनल्टी
- कम ब्याज मिलने से होने वाला नुकसान
- अब तक मिले ब्याज पर टैक्स
- किसी लोन या ओवरड्राफ्ट का ब्याज
- आपको वास्तव में कितनी रकम की जरूरत है
इसके बाद देखें कि एफडी तोड़ने से आपको जितनी रकम मिलेगी, क्या वह इस नुकसान के मुकाबले जरूरी है। अगर बैंक आंशिक निकासी की सुविधा देता है तो उस विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। इससे जरूरत की रकम मिल जाएगी और बाकी पैसा एफडी में बना रह सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

