संयुक्त राष्ट्र महासभा की द्वितीय समिति में चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों, आसान वित्त व्यवस्था और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे को लेकर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को किफायती वित्त के साथ फैसलों में अधिक प्रभावी आवाज की जरूरत है। भारत में डिजिटल व्यवस्था के जरिए बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच बढ़ने का अनुभव भी साझा किया। जोशी ने ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी, सतत विकास परियोजनाओं और स्वच्छ ऊर्जा व आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे में सहयोग का भी जिक्र किया। 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से जुड़े कार्यक्रमों में भारत की ओर से पहुंचे 15 सांसदों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई जोशी कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल 5 से 9 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा और 11 अक्टूबर को भारत लौटेगा। द्वितीय समिति में विकासशील देशों की चुनौतियों का मुद्दा उठाया सांसद सीपी जोशी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की द्वितीय समिति में भारत की ओर से संबोधित करते हुए कहा – भारत ग्रुप ऑफ 77 एंड चाइना की ओर से दिए गए वक्तव्य का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि आज भी कई विकासशील देशों के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। साल 2025 में ऑफिशियल डेवलपमेंट असिस्टेंस में भारी गिरावट आई। खाद्य पदार्थों, ईंधन और उर्वरकों की आपूर्ति में रुकावट का असर संघर्ष वाले क्षेत्रों से दूर स्थित देशों पर भी पड़ता है। जोशी ने कहा – जिन देशों के पास पहले से सीमित संसाधन हैं, उनके लिए आयात पर बढ़ता खर्च अपने लोगों के विकास पर कम निवेश का कारण बन सकता है। ऐसे में कई देशों के सामने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में आगे बढ़ने के साथ अब तक की मेहनत से हासिल उपलब्धियों को बनाए रखने की भी चुनौती है। विकासशील देशों के लिए आसान और सस्ता वित्त जरूरी बताया सांसद जोशी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां वैश्विक स्तर पर एक बड़े असंतुलन को दिखाती हैं। विकासशील देश वैश्विक अस्थिरता की बड़ी कीमत चुकाते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में उनका प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अधिक किफायती वित्त पोषण और उसकी उपलब्धता को लेकर अधिक निश्चितता की जरूरत है। साथ ही इन फैसलों में उनकी आवाज को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत इस चर्चा में 140 करोड़ से अधिक लोगों के विकास के लिए वित्त जुटाने का अपना अनुभव लेकर आया है। भारत ने देश के भीतर संसाधन जुटाने की क्षमता बढ़ाई है। इसमें कर प्रशासन को डिजिटल बनाना भी शामिल है। डिजिटल व्यवस्था से बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक पहुंच बढ़ी अपने संबोधन में जोशी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल व्यवस्था ने अधिक लोगों को बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ी है और छोटे व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने तथा वित्त प्राप्त करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि भारत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए नई परियोजनाएं तैयार कर रहा है और बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए वित्तीय साधन विकसित कर रहा है। निजी निवेश विकास में सबसे अधिक योगदान तब देता है, जब वह देश की प्राथमिकताओं के अनुसार हो और उसे मजबूत सार्वजनिक संस्थाओं का समर्थन मिले। ग्लोबल साउथ के साथ साझेदारी का भी जिक्र सांसद जोशी ने ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इंडिया-यूएन डेवलपमेंट पार्टनरशिप फंड और इंडिया-ब्राजील-साउथ अफ्रीका फंड यानी आईबीएसए फंड साझेदार देशों की प्राथमिकताओं के अनुसार चुनी गई परियोजनाओं को समर्थन देते हैं। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संस्थाएं स्वच्छ ऊर्जा और आपदाओं से सुरक्षित बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने में मदद कर रही हैं। 15 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क पहुंचा संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भारत से 15 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल न्यूयॉर्क पहुंचा है। इसमें लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ संबंधित अधिकारी भी शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल 81वें महासभा सत्र से जुड़े अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहा है। यात्रा के दौरान भारत की संसदीय व्यवस्था, लोकतांत्रिक अनुभव और विकास मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने का प्रयास किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा दुनिया के देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा का प्रमुख मंच है। यहां वैश्विक शांति और सुरक्षा, विकास, पर्यावरण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बदलती वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर चर्चा होती है। इस सत्र की थीम ‘Restoring Trust, Managing Transformation: A United Nations That Delivers for All’ रखी गई है। 11 अक्टूबर को भारत लौटेगा प्रतिनिधिमंडल भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की मुख्य गतिविधियां 5 से 9 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित हैं। यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय और लोकसभा सचिवालय की ओर से जरूरी समन्वय किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ विभिन्न विषयों पर संवाद कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल 11 अक्टूबर को भारत लौटेगा। चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी के नेतृत्व में हो रही इस यात्रा के दौरान भारत के विकास अनुभवों और संसदीय व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा जा रहा है।

