TRAI ड्राफ्ट: टेलीकॉम कंपनियों को बोर्ड से पास करानी होगी AI नीति

TRAI ड्राफ्ट: टेलीकॉम कंपनियों को बोर्ड से पास करानी होगी AI नीति

दूरसंचार नियामक ट्राई ने दूरसंचार नेटवर्क और सेवाओं में कृत्रिम मेधा (एआई) के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए शुक्रवार को व्यापक दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किए। इसके तहत दूरसंचार कंपनियों को निदेशक मंडल से स्वीकृत एआई नीति बनानी होगी, विशेष निगरानी एवं सुरक्षा समितियां गठित करनी होंगी और एआई से जुड़ी गंभीर घटनाओं की जानकारी ट्राई को देनी होगी। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने संबंधित पक्षों से सुझाव मांगने के लिए जारी मसौदे में कहा है कि कंपनियां अपने नेटवर्क और सेवाओं में इस्तेमाल होने वाली एआई प्रणालियों के परिणामों के लिए जवाबदेह होंगी।

यह जिम्मेदारी इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि एआई प्रणाली कंपनी ने खुद विकसित की है, किसी तीसरे पक्ष से खरीदी है या आउटसोर्स की है। ट्राई ने मसौदा दिशानिर्देशों पर हितधारकों से 27 नवंबर तक सुझाव मांगे हैं। मसौदा दिशानिर्देशों के मुताबिक, एआई का इस्तेमाल करने वाली दूरसंचार कंपनियों और अन्य अधिकृत इकाइयों को अपनी एआई प्रणालियों को उच्च, मध्यम और निम्न जोखिम वाली श्रेणियों में बांटना होगा।

यह वर्गीकरण नेटवर्क परिचालन, वित्तीय एवं परिचालन परिणामों और उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक कंपनी को अपने निदेशक मंडल या समकक्ष संचालन निकाय से मंजूर एक आंतरिक एआई नीति बनानी होगी। इसमें जोखिम का वर्गीकरण, एआई प्रणाली को इस्तेमाल की मंजूरी, घटनाओं का प्रबंधन, मानवीय निगरानी, डेटा का प्रबंधन और उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था शामिल होगी।

मसौदे में कहा गया है कि जोखिम कम करने के लिए सभी एआई प्रणालियों पर पहले से तय व्यवस्था के तहत उचित मानवीय निगरानी अनिवार्य होगी। ट्राई ने एआई से जुड़ी घटनाओं को गंभीरता के आधार पर चार श्रेणियों-गंभीर, उच्च, मध्यम और निम्न में बांटने का प्रस्ताव किया है। गंभीर और उच्च श्रेणी की घटनाओं की जानकारी निर्धारित प्रारूप, तरीके और समयसीमा के भीतर ट्राई को देना अनिवार्य होगा।

दूरसंचार कंपनियों को एआई से जुड़ी घटनाओं और इसके कारण उपभोक्ताओं को हुए नुकसान की शिकायतों का केंद्रीय रिकॉर्ड भी रखना होगा। इसके साथ ही ऐसी घटनाओं की जांच, नुकसान कम करने और समाधान के लिए व्यवस्था बनानी होगी। मसौदे में एआई संचालन एवं सुरक्षा समिति (एजीएससी) गठित करने का भी प्रस्ताव है।

इसकी अध्यक्षता कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी करेंगे, जिन्हें एआई संचालन एवं सुरक्षा अधिकारी (एजीएसओ) नामित किया जाएगा। समिति एआई प्रणालियों के इस्तेमाल की निगरानी करने के साथ उनकी कमजोरियों, भेदभाव संबंधी चिंताओं और उभरते प्रणालीगत जोखिमों की पहचान करेगी। समिति को प्रत्येक वित्त वर्ष में कम-से-कम एक बार एआई प्रणालियों के प्रदर्शन की समीक्षा करनी होगी।

जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त समीक्षा भी की जा सकेगी। इसके आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। इनमें संबंधित एआई प्रणाली में बदलाव करना या जरूरत पड़ने पर उसे बंद करना भी शामिल है।

दिशानिर्देशों में नई एआई प्रणाली लागू करने या मौजूदा प्रणाली में बदलाव करने से पहले उसका सत्यापन, निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की जांच और प्रभाव का आकलन अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इसमें प्रणाली की सटीकता, मजबूती, उसके कामकाज को समझने की क्षमता, निष्पक्षता, समय के साथ मॉडल के प्रदर्शन में बदलाव के प्रति उसकी संवेदनशीलता और मानवीय निगरानी की व्यवस्था का आकलन शामिल होगा। दूरसंचार कंपनियों को अपनी सभी एआई प्रणालियों की सूची भी रखनी होगी।

इसमें सक्रिय, निष्क्रिय और बंद की जा चुकी प्रणालियों का ब्योरा शामिल होगा। प्रत्येक प्रणाली के स्रोत, उद्देश्य और जोखिम श्रेणी की जानकारी दर्ज करनी होगी। इस सूची में शामिल एआई प्रणाली का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा।

किसी तीसरे पक्ष से एआई आधारित समाधान खरीदने से पहले कंपनियों को उसकी उचित जांच-पड़ताल भी करनी होगी। ट्राई ने कहा कि दूरसंचार नेटवर्क में एआई का इस्तेमाल बढ़ने से कामकाज की दक्षता बेहतर हो सकती है, लेकिन इससे मॉडल के अप्रत्याशित व्यवहार, भेदभाव और साइबर हमलों जैसे जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। इनसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और मजबूती प्रभावित हो सकती है।

नियामक ने कहा कि दूरसंचार क्षेत्र में भारत के एआई संचालन दिशानिर्देशों को एकसमान और जिम्मेदार तरीके से लागू करने तथा व्यवस्था में स्पष्टता, पूर्वानुमान और जवाबदेही बढ़ाने के लिए संबंधित पक्षों से परामर्श के बाद ये दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। प्रस्तावित दिशानिर्देश भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के तहत लाइसेंस रखने वाली या दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत प्राधिकार रखने वाली उन सभी इकाइयों पर लागू होंगे, जो दूरसंचार सेवाएं देने या संचार नेटवर्क स्थापित करने, संचालन, रखरखाव या विस्तार के लिए अधिकृत हैं और दूरसंचार नेटवर्क या सेवाओं में एआई प्रणालियों का इस्तेमाल करती हैं या करने की योजना बना रही हैं।

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