उन्नाव में व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन:व्यापारियों के लिए बीमा और सुरक्षा की मांग उठी

उन्नाव में व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन:व्यापारियों के लिए बीमा और सुरक्षा की मांग उठी

उन्नाव में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। जिला अध्यक्ष रजनीकांत श्रीवास्तव के नेतृत्व में व्यापारियों ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से यह ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसमें व्यापारियों के हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की गई है। रजनीकांत श्रीवास्तव ने बताया कि यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री तक भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अन्य वर्गों के लिए कई बीमा योजनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जीएसटी पंजीकृत व्यापारी अभी भी ऐसी सुविधाओं से वंचित हैं। व्यापार मंडल ने सभी जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों के लिए स्वास्थ्य बीमा की मांग की, ताकि बीमारी या आकस्मिक स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। दूसरी प्रमुख मांग के रूप में, व्यापार मंडल ने जीएसटी पंजीकृत व्यापारियों की दुकानों के लिए एक करोड़ रुपये तक के अग्नि एवं दुर्घटना बीमा की व्यवस्था करने को कहा। उनका तर्क था कि आगजनी जैसी घटनाओं से व्यापारियों को भारी नुकसान होता है, इसलिए सरकार को इस संबंध में एक विशेष योजना लागू करनी चाहिए। ज्ञापन में जीएसटी और आयकर विभागों द्वारा विलंब से कर जमा करने पर लगाए जाने वाले 18 प्रतिशत ब्याज को कम करने की भी मांग की गई। श्रीवास्तव ने बताया कि सरकार जहां जमा धनराशि पर कम ब्याज देती है, वहीं व्यापारियों से 18 प्रतिशत की दर से शुल्क वसूला जाता है। इसे घटाकर 9 प्रतिशत करने का आग्रह किया गया है। व्यापारियों ने विभिन्न विभागों में लाइसेंस नवीनीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की भी मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि जिन विभागों में आजीवन लाइसेंस की व्यवस्था लागू हो चुकी है, उसी तर्ज पर अन्य विभागों में भी लाइसेंस को आजीवन मान्यता दी जाए। इससे व्यापारियों को बार-बार नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। ज्ञापन में विभागीय सर्वे, छापेमारी और सैंपलिंग के दौरान पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग शामिल है। व्यापार मंडल का कहना है कि आयकर, जीएसटी और अन्य विभागों के अधिकारी बिना स्पष्ट पहचान के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पहुंचते हैं, जिससे भ्रम और उत्पीड़न की स्थिति पैदा होती है।

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