स्वाति नक्षत्र और सिद्धि योग में आज बुद्ध पूर्णिमा:श्रद्धालु स्नान-दान के साथ करेंगे श्रीहरि विष्णु की पूजा, गंगाजी के घाटों में उमड़ी आस्था

स्वाति नक्षत्र और सिद्धि योग में आज बुद्ध पूर्णिमा:श्रद्धालु स्नान-दान के साथ करेंगे श्रीहरि विष्णु की पूजा, गंगाजी के घाटों में उमड़ी आस्था

आज स्वाति नक्षत्र और सिद्धि योग में बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है। सनातन धर्मावलंबियो के लिए मई का महीना खास होने वाला है। इस महीने की शुरुआत पूर्णिमा से और समापन भी पूर्णिमा पर ही होने वाला है। इस पूर्णिमा पर श्रद्धालु आज हरिद्वार, काशी और गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य करेंगे। वैशाख पूर्णिमा को जल से परिपूर्ण घट, तिल, घी, स्वर्ण, अन्न, ऋतुफल, वस्त्र, छाता आदि का दान करना अतिपुण्यकारी माना जाता है। मई मास के समापन पर 31 मई को मलमास की पूर्णिमा है। सिद्धि योग में आज होगी पूजा-अर्चना ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि, ‘वैशाख पूर्णिमा पर ग्रह नक्षत्रों की शुभ स्थिति होने से कई शुभ संयोग बन रहे हैं। आज चन्द्रमा अपने उच्चतम राशि तुला में विद्यमान रहेंगे। एकादशी से पूर्णिमा तक की तिथियां शुभ स्कन्द पुराण के मुताबिक, वैशाख मास को ब्रह्मा जी ने सब मासों में उत्तम सिद्ध किया है। इस मास के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि से पूर्णिमा तक की तिथियां पुष्करणी है। इन तिथियों में स्नान-दान करने से पूरे वैशाख मास का पुण्य फल मिलता है। वैशाख मास की एकादशी तिथि को अमृत प्रकट हुआ, द्वादशी को श्रीहरि विष्णु ने उसकी रक्षा की, त्रयोदशी को भगवान नारायण ने मोहिनी रूप में देवताओं को सुधापान कराया और चतुर्दशी को देव विरोधी दैत्यों का संहार किया था। फिर वैशाख पूर्णिमा को समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य मिल गया। सभी देवताओं ने प्रसन्न होकर इन तिथियों को वर दिया। आज स्वाति नक्षत्र और सिद्धि योग में बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है। सनातन धर्मावलंबियो के लिए मई का महीना खास होने वाला है। इस महीने की शुरुआत पूर्णिमा से और समापन भी पूर्णिमा पर ही होने वाला है। इस पूर्णिमा पर श्रद्धालु आज हरिद्वार, काशी और गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य करेंगे। वैशाख पूर्णिमा को जल से परिपूर्ण घट, तिल, घी, स्वर्ण, अन्न, ऋतुफल, वस्त्र, छाता आदि का दान करना अतिपुण्यकारी माना जाता है। मई मास के समापन पर 31 मई को मलमास की पूर्णिमा है। सिद्धि योग में आज होगी पूजा-अर्चना ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि, ‘वैशाख पूर्णिमा पर ग्रह नक्षत्रों की शुभ स्थिति होने से कई शुभ संयोग बन रहे हैं। आज चन्द्रमा अपने उच्चतम राशि तुला में विद्यमान रहेंगे। एकादशी से पूर्णिमा तक की तिथियां शुभ स्कन्द पुराण के मुताबिक, वैशाख मास को ब्रह्मा जी ने सब मासों में उत्तम सिद्ध किया है। इस मास के शुक्लपक्ष की त्रयोदशी तिथि से पूर्णिमा तक की तिथियां पुष्करणी है। इन तिथियों में स्नान-दान करने से पूरे वैशाख मास का पुण्य फल मिलता है। वैशाख मास की एकादशी तिथि को अमृत प्रकट हुआ, द्वादशी को श्रीहरि विष्णु ने उसकी रक्षा की, त्रयोदशी को भगवान नारायण ने मोहिनी रूप में देवताओं को सुधापान कराया और चतुर्दशी को देव विरोधी दैत्यों का संहार किया था। फिर वैशाख पूर्णिमा को समस्त देवताओं को उनका साम्राज्य मिल गया। सभी देवताओं ने प्रसन्न होकर इन तिथियों को वर दिया।  

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