अंबेडकरनगर में रिश्वतखोरी के एक मामले में राजस्व निरीक्षक राम जियावन शर्मा को सात साल कैद की सजा सुनाई गई है। एंटी करप्शन कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह एंटी करप्शन कोर्ट की स्थापना के बाद आया पहला फैसला है। विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि दोषी राम जियावन शर्मा जुर्माना अदा नहीं करते हैं, तो उन्हें 120 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन अधिकारी कृष्ण चंद्र वर्मा ने बताया कि यह मामला अंबेडकर नगर जिले के महरुआ थाना क्षेत्र से संबंधित है। बरामदपुर गांव निवासी शिकायतकर्ता मनोज मिश्रा ने अपनी दादी की भूमि के बगल के चक मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए पैमाइश का अनुरोध किया था। इसी कार्य के लिए राजस्व निरीक्षक शर्मा ने उनसे 2000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। मनोज मिश्रा ने 5 जून 2014 को उप जिलाधिकारी भीटी को प्रार्थना पत्र दिया था। उप जिलाधिकारी ने राजस्व निरीक्षक शर्मा को पुलिस टीम के साथ चक मार्ग की नाप करने का आदेश दिया। रिश्वत मांगे जाने पर मनोज मिश्रा ने एंटी करप्शन विभाग में शिकायत दर्ज कराई। एंटी करप्शन टीम ने 25 जून 2014 को शर्मा को रिश्वत की धनराशि के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। मामले के विवेचक दिलीप सिंह ने राजस्व निरीक्षक राम जियावन शर्मा (जोगापुर-अकबरपुर निवासी) के विरुद्ध आरोप पत्र एंटी करप्शन कोर्ट गोरखपुर भेजा था। इस मामले में लगभग एक दशक बाद फैसला आया है, जिसकी पत्रावली बाद में सुनवाई के लिए अयोध्या स्थानांतरित की गई थी।


