Thyroid symptoms: आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में थायरॉइड (Thyroid) की बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि इसके शुरुआती लक्षण इतने आम होते हैं कि लोग इन्हें समझ ही नहीं पाते। जैसे- अगर वजन बढ़ रहा है, तो हमें लगता है कि हमने ज्यादा खा लिया होगा। अगर हर वक्त थकान रहती है, तो हमें लगता है कि काम के प्रेशर की वजह से ऐसा हो रहा है।
लेकिन सरकारी अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉक्टर राजेश कुमार का कहना है कि जब हमारे शरीर में थायरॉइड की गड़बड़ी होती है, तो शरीर पहले से ही कई तरह के इशारे देने लगता है। अगर हम इन इशारों को सही समय पर पहचान लें, तो इस बीमारी को आसानी से संभाल सकते हैं। आइए समझते हैं कि थायरॉइड के लक्षण क्या हैं और आपको इसकी जांच कब करानी चाहिए।
क्या होता है थायरॉइड?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, थायरॉइड हमारे गले में सामने की तरफ तितली के आकार का एक छोटा सा हिस्सा होता है। यहां से कुछ जरूरी केमिकल्स (हार्मोन्स) निकलते हैं। जब यह हिस्सा जरूरत से कम या ज्यादा केमिकल बनाने लगता है, तब थायरॉइड की बीमारी बनती है। जब यह कम केमिकल बनाता है, तो शरीर सुस्त पड़ जाता है और वजन बढ़ने लगता है और जब यह ज्यादा केमिकल बनाने लगता है, तो शरीर बहुत तेजी से काम करने लगता है और वजन घटने लगता है।
नेशनल इंस्टीटूट्स ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव किडनी डिजीज के अनुसार, अगर आप को थायरॉइड की परेशानी है, तब भी आप एक बिल्कुल स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती हैं। इसके लिए समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से अपना थायरॉइड टेस्ट कराते रहें।
शरीर देता है ये संकेत?
- अचानक वजन का बढ़ना या घटना।
- दिनभर थकान और सुस्ती रहना।
- गले में सूजन आना।
- पीरियड्स की गड़बड़ी (महिलाओं में)।
- बालों का झड़ना और रूखी त्वचा।
- जल्दी चिड़चिड़ा होना या मूड बदलना।
- बहुत ज्यादा ठंड या गर्मी लगना।
कब जरूरी है थायरॉइड की जांच?
- थायरॉइड के लक्षण आपको अपने शरीर में पिछले कुछ हफ्तों से लगातार दिख रहे हों।
- आपके घर में पहले से ही किसी को (जैसे मम्मी, पापा या बहन को) थायरॉइड की बीमारी रही हो।
- जो महिलाएं बच्चा प्लान कर रही हैं या प्रेग्नेंट हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह पर यह टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
- अगर आपकी उम्र 30 साल से ऊपर हो चुकी है, तो साल में एक बार यह जांच करा लेना अच्छा रहता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


