Rectal Cancer in Young Adults: अमेरिका में एक चिंताजनक ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है, युवा लोगों, खासकर मिलेनियल्स में Rectal Cancer के मामले और इससे होने वाली मौतें तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टर और रिसर्चर्स इसे एक बड़ी हेल्थ वॉर्निंग मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यही रफ्तार रही, तो 2035 तक यह बीमारी Colon Cancer से भी ज्यादा जानलेवा बन सकती है, खासकर युवाओं में।
युवाओं में तेजी से बढ़ रहे केस
हाल ही में Digestive Disease Week में पेश हुई रिसर्च के मुताबिक, 20 से 44 साल के लोगों में रेक्टल कैंसर के मामले कोलन कैंसर के मुकाबले 2 से 3 गुना तेजी से बढ़ रहे हैं। American Cancer Society का अनुमान है कि 2026 में करीब 1.58 लाख नए कोलोरेक्टल कैंसर के केस सामने आएंगे और 55 हजार से ज्यादा मौतें होंगी, जिनमें बड़ी संख्या 65 साल से कम उम्र के लोगों की होगी।
आखिर युवाओं में क्यों बढ़ रहा खतरा?
डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर युवा इतने ज्यादा प्रभावित क्यों हो रहे हैं। पहले इस तरह के कैंसर को बढ़ती उम्र और जेनेटिक्स से जोड़ा जाता था, लेकिन अब कई युवा मरीजों में कोई साफ कारण नजर नहीं आता। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कुछ संभावित वजहें हो सकती हैं:
खराब डाइट, खासकर प्रोसेस्ड फूड और मीठे पेय
- गट हेल्थ (आंतों के बैक्टीरिया) में बदलाव
- लंबे समय तक बैठे रहने की आदत
- मोटापा और लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्याएं
- पर्यावरण से जुड़े कारण
हालांकि अभी तक कोई एक पक्की वजह सामने नहीं आई है, जो इसे और ज्यादा चिंताजनक बनाती है।
डॉक्टरों ने बताया मेडिकल क्राइसि
ऑन्कोलॉजिस्ट्स इसे एक मेडिकल क्राइसिस मान रहे हैं। क्योंकि ज्यादातर युवा मरीजों में यह बीमारी काफी देर से पकड़ी जाती है। आंकड़ों के मुताबिक, 50 साल से कम उम्र के करीब 75% मरीजों का डायग्नोसिस तब होता है जब कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है। कई मामलों में लक्षण दिखने और जांच होने के बीच 7 महीने तक की देरी हो जाती है।
इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें
रेक्टल कैंसर के लक्षण शुरुआत में हल्के हो सकते हैं, लेकिन इन्हें अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है:
- मल में खून आना
- टॉयलेट की आदतों में अचानक बदलाव
- बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होना
- पेट दर्द या सूजन
- बिना वजह वजन कम होना या थकान
समय पर जांच है सबसे बड़ा बचाव
डॉक्टर सलाह देते हैं कि आम लोगों को 45 साल की उम्र से कैंसर स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए। लेकिन अगर कम उम्र में भी ऐसे लक्षण दिखें या परिवार में कैंसर का इतिहास हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


