अमृतसर में मेडिकल स्टोर पर NCB की रेड:घंटों खंगाले रिकॉर्ड, ट्रामाडोल गोलियों की बरामदगी की चर्चा से हड़कंप

अमृतसर में मेडिकल स्टोर पर NCB की रेड:घंटों खंगाले रिकॉर्ड, ट्रामाडोल गोलियों की बरामदगी की चर्चा से हड़कंप

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने गुरुवार को अमृतसर के छेहरटा स्थित राय मेडिकल स्टोर पर छापेमारी की। यह कार्रवाई नशे के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत की गई। NCB टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के मेडिकल स्टोर पर पहुंचकर कई घंटों तक दवाइयों के स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की। कार्रवाई के दौरान टीम ने मेडिकल स्टोर से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ट्रामाडोल (Tramadol) गोलियों की बरामदगी की भी चर्चा है, हालांकि NCB ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। टीम इस बात की जांच कर रही है कि क्या ट्रामाडोल और अन्य नियंत्रित दवाओं की आपूर्ति निर्धारित नियमों के विपरीत की जा रही थी। पंजाब में ट्रामाडोल को लेकर पहले भी कई बड़े खुलासे हुए हैं। वर्ष 2018 में ट्रामाडोल को NDPS कानून के तहत नियंत्रित मन:प्रभावी पदार्थ (Psychotropic Substance) घोषित किया गया था। इसके बाद से NCB और पंजाब पुलिस लगातार इसके अवैध कारोबार पर शिकंजा कस रही हैं। NCB ने करोड़ों रुपए की गोलियां जब्त की पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान अमृतसर और आसपास के क्षेत्रों में ट्रामाडोल तस्करी से जुड़े कई बड़े नेटवर्क सामने आए हैं। NCB और अन्य एजेंसियों ने करोड़ों रुपये मूल्य की ट्रामाडोल एवं अल्प्राजोलम गोलियां जब्त करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में यह भी सामने आया था कि कुछ दवा कारोबारी और फर्जी मेडिकल नेटवर्क इन दवाओं को अवैध रूप से बाजार में पहुंचाने में शामिल थे। इसी साल अमृतसर में ट्रामाडोल सप्लाई चेन के खिलाफ हुई कार्रवाई में हजारों गोलियां बरामद की गई थीं। इस जांच का दायरा पंजाब से लेकर उत्तराखंड, दिल्ली और अन्य राज्यों तक फैला था। कई फार्मा कंपनियों, डिस्ट्रीब्यूटरों और मेडिकल एजेंसियों के रिकॉर्ड भी खंगाले गए थे। छेहरटा स्थित राय मेडिकल स्टोर पर हुई ताजा रेड को भी इसी बड़े अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार NCB अब जब्त किए गए दस्तावेजों और कंप्यूटर रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाएगी कि दवाओं की खरीद-बिक्री का पूरा नेटवर्क क्या था और कहीं नियंत्रित दवाओं को अवैध रूप से बाजार में तो नहीं पहुंचाया जा रहा था।

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