‘जिन पेपर लीक के आरोपियों को मैंने जेल भिजवाया था। उन्हीं के बीच हमें बंद कर दिया गया। मुझे हर समय यही डर लगता था कि जिनको मेरी वजह से जेल हुई, वो लोग कहीं मेरे ऊपर ही हमला न करवा दें’। TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा की वैकेंसी की मांग को लेकर 8 मई को पटना में हुए बड़े आंदोलन के बाद पुलिस ने दिलीप कुमार समेत 3 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आंदोलन में हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे थे। आंदोलन के बाद छात्र नेता दिलीप करीब 16 दिन तक जेल में रहे। जिसके बाद वह अब बाहर आ चुके हैं। उन्होंने भास्कर से बातचीत में जेल के अंदर बिताए हर दिन की कहानी बताई।…पढ़ें दिलीप कुमार का इंटरव्यू… ‘थाने की सलाखों के पीछे बीती पहली रात’ छात्र नेता दिलीप कुमार ने बताया, गिरफ्तारी के बाद सबसे पहले मुझे गांधी मैदान थाने के हाजत में रखा गया। उस रात किसी को नींद नहीं आई। लोहे की सलाखों के पीछे बैठकर बार-बार यही सवाल मन में आ रहा था कि आखिर गलती क्या थी। शिक्षक भर्ती की मांग करना क्या इतना बड़ा अपराध था कि जेल भेज दिया गया। जेल के अंदर हर चेहरा किसी अधूरे सपने जैसा था उन्होंने कहा, ‘9 मई को जेल पहुंचने के बाद वहां का माहौल बिल्कुल अलग था। दिन में किसी तरह समय कट जाता था, लेकिन रात होते ही हमारे साथ जो कुछ अभ्यर्थी थे, किसी को अपने घर की याद आती थी, तो कोई मां को याद करके रोता था, कोई अपने छोटे भाई की चिंता करता था। शुरुआती कुछ दिन सामान्य बीते। सभी अभ्यर्थी एक-दूसरे को हिम्मत देते थे। कोई कहता कि सरकार जल्द भर्ती निकालेगी। कोई उम्मीद देता कि आंदोलन रंग लाएगा, लेकिन 20 मई की सुबह सब कुछ बदल गया। हमें बहुत पीटा गया। लाठियां हाथों पर पड़ीं, पीठ पर पड़ीं, कमर पर पड़ीं। दर्द से कई छात्र चीख पड़े, लेकिन वहां किसी की आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। उस वक्त सिर्फ एक ही बात कही जा रही थी कि जेल के अंदर रहकर बाहर आंदोलन करवाया जा रहा है। उसी दिन पटना में TRE-4 अभ्यर्थियों ने फिर प्रदर्शन किया था’। पिटाई के बाद जिस सेल में भेजा गया, वहां हर पल जान का डर आगे छात्र नेता ने बताया, लाठीचार्ज के बाद मुझे और बाकी 3 अभ्यर्थियों को अलग-अलग सेल में बंद कर दिया गया। पहले अकेले रखा गया, फिर शाम होते-होते ऐसे बैरक में भेज दिया गया। मेरी वजह से कई पेपर लीक करने वाले जेल में बंद थे। उनके साथ ही हमें बंद कर दिया गया था। अब जेल में ऐसा कोई व्यक्ति हो जो आपकी वजह से जेल गया हो, इसके कारण मुझे हर पल डर लगा रहता था कि कहीं कोई हमला न कर दे। रातभर आंख खुली रहती थी। हल्की सी आवाज आने पर भी डर लगता था। दो दिनों तक ठीक से खाना तक नहीं खाया गया’। हजारों अभ्यर्थियों की भीड़ नहीं, हजारों सपनों का आंदोलन था दिलीप कुमार का कहना है कि अभ्यर्थी वही मांग रहे थे, जो सरकार और आयोग पहले कह चुके थे। 46 हजार पदों पर भर्ती की बात खुद विभाग की तरफ से कही गई थी। फिर भी जब वैकेंसी नहीं आई तो छात्र सड़क पर उतर गए। लेकिन आंदोलन के बदले उन्हें जेल मिली, लाठियां मिलीं और डर से भरी रातें मिलीं। अब हर साल होगी 20 हजार शिक्षकों की भर्ती मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राज्य में अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति होगी। इसके अंतर्गत हर साल कम-से-कम 20 हजार शिक्षकों की बहाली की जाएगी। इसके लिए हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद तय है कि TRE 4 की नियुक्ति प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू हो जाएंगी। ‘जिन पेपर लीक के आरोपियों को मैंने जेल भिजवाया था। उन्हीं के बीच हमें बंद कर दिया गया। मुझे हर समय यही डर लगता था कि जिनको मेरी वजह से जेल हुई, वो लोग कहीं मेरे ऊपर ही हमला न करवा दें’। TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा की वैकेंसी की मांग को लेकर 8 मई को पटना में हुए बड़े आंदोलन के बाद पुलिस ने दिलीप कुमार समेत 3 अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आंदोलन में हजारों की संख्या में अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे थे। आंदोलन के बाद छात्र नेता दिलीप करीब 16 दिन तक जेल में रहे। जिसके बाद वह अब बाहर आ चुके हैं। उन्होंने भास्कर से बातचीत में जेल के अंदर बिताए हर दिन की कहानी बताई।…पढ़ें दिलीप कुमार का इंटरव्यू… ‘थाने की सलाखों के पीछे बीती पहली रात’ छात्र नेता दिलीप कुमार ने बताया, गिरफ्तारी के बाद सबसे पहले मुझे गांधी मैदान थाने के हाजत में रखा गया। उस रात किसी को नींद नहीं आई। लोहे की सलाखों के पीछे बैठकर बार-बार यही सवाल मन में आ रहा था कि आखिर गलती क्या थी। शिक्षक भर्ती की मांग करना क्या इतना बड़ा अपराध था कि जेल भेज दिया गया। जेल के अंदर हर चेहरा किसी अधूरे सपने जैसा था उन्होंने कहा, ‘9 मई को जेल पहुंचने के बाद वहां का माहौल बिल्कुल अलग था। दिन में किसी तरह समय कट जाता था, लेकिन रात होते ही हमारे साथ जो कुछ अभ्यर्थी थे, किसी को अपने घर की याद आती थी, तो कोई मां को याद करके रोता था, कोई अपने छोटे भाई की चिंता करता था। शुरुआती कुछ दिन सामान्य बीते। सभी अभ्यर्थी एक-दूसरे को हिम्मत देते थे। कोई कहता कि सरकार जल्द भर्ती निकालेगी। कोई उम्मीद देता कि आंदोलन रंग लाएगा, लेकिन 20 मई की सुबह सब कुछ बदल गया। हमें बहुत पीटा गया। लाठियां हाथों पर पड़ीं, पीठ पर पड़ीं, कमर पर पड़ीं। दर्द से कई छात्र चीख पड़े, लेकिन वहां किसी की आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। उस वक्त सिर्फ एक ही बात कही जा रही थी कि जेल के अंदर रहकर बाहर आंदोलन करवाया जा रहा है। उसी दिन पटना में TRE-4 अभ्यर्थियों ने फिर प्रदर्शन किया था’। पिटाई के बाद जिस सेल में भेजा गया, वहां हर पल जान का डर आगे छात्र नेता ने बताया, लाठीचार्ज के बाद मुझे और बाकी 3 अभ्यर्थियों को अलग-अलग सेल में बंद कर दिया गया। पहले अकेले रखा गया, फिर शाम होते-होते ऐसे बैरक में भेज दिया गया। मेरी वजह से कई पेपर लीक करने वाले जेल में बंद थे। उनके साथ ही हमें बंद कर दिया गया था। अब जेल में ऐसा कोई व्यक्ति हो जो आपकी वजह से जेल गया हो, इसके कारण मुझे हर पल डर लगा रहता था कि कहीं कोई हमला न कर दे। रातभर आंख खुली रहती थी। हल्की सी आवाज आने पर भी डर लगता था। दो दिनों तक ठीक से खाना तक नहीं खाया गया’। हजारों अभ्यर्थियों की भीड़ नहीं, हजारों सपनों का आंदोलन था दिलीप कुमार का कहना है कि अभ्यर्थी वही मांग रहे थे, जो सरकार और आयोग पहले कह चुके थे। 46 हजार पदों पर भर्ती की बात खुद विभाग की तरफ से कही गई थी। फिर भी जब वैकेंसी नहीं आई तो छात्र सड़क पर उतर गए। लेकिन आंदोलन के बदले उन्हें जेल मिली, लाठियां मिलीं और डर से भरी रातें मिलीं। अब हर साल होगी 20 हजार शिक्षकों की भर्ती मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राज्य में अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति होगी। इसके अंतर्गत हर साल कम-से-कम 20 हजार शिक्षकों की बहाली की जाएगी। इसके लिए हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद तय है कि TRE 4 की नियुक्ति प्रक्रिया भी जल्द ही शुरू हो जाएंगी।


