“मुजफ्फरपुर का दादरपुर कब गिरेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यहां लीपापोती की जाती है। बालू में थोड़ा सा सिमेंट मिला कर ढक दिया गया है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और कई लोगों की मौत हो सकती है। घटना हो जाने के बाद प्रशासन की नींद खुलती है। यहां नया पुल बनना चाहिए।” ये कहना मुजफ्फरपुर के रहने वाले दीनबंधु कुमार का है। दरअसल, भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के गिरने के बाद पुलों के जर्जर संरचनाओं को लेकर सवाल उठ रहे है। इसी बीच आईआईटी पटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में राज्य के कुल नौ पुलों को खतरे की श्रेणी में रखा गया है। इनमें मुजफ्फरपुर के दो महत्वपूर्ण पुल—बूढ़ी गंडक नदी पर बना दादर पुल और माड़ीपुर रेल ओवरब्रिज भी शामिल हैं। आईआईटी पटना की टीम की ओर से किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में इन पुलों की स्थिति को गंभीर बताया गया है। इसके बाद लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत और मजबूती का काम नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब दादर पुल के बारे में जानिए… मुजफ्फरपुर को दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई इलाकों से जोड़ने वाला दादर पुल करीब 40 साल पुराना है। यह पुल रोजाना 20-30 हजार छोटे-बड़े गाड़ी के आवागमन का मुख्य माध्यम माना जाता है। यही वजह है कि इसे उत्तर बिहार की “लाइफलाइन” भी कहा जाता है। आईआईटी पटना की रिपोर्ट के अनुसार पुल के कई हिस्सों में सरिया बाहर निकल आए हैं। गार्डर कमजोर हो चुके हैं और कई जगहों पर रेलिंग भी टूट चुकी है। विशेषज्ञों ने पुल की तत्काल मरम्मत और संरचनात्मक मजबूती की जरूरत बताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से पुल की हालत खराब है, लेकिन सिर्फ जांच और निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति होती रही है। रोजाना भारी वाहनों के दबाव के कारण पुल की स्थिति और खराब होती जा रही है। 13 साल पहले टूटा था माड़ीपुर रेल ओवरब्रिज, एक बार फिर खतरे के संकेत रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित करीब 55 साल पुराने माड़ीपुर रेल ओवरब्रिज की स्थिति को भी चिंताजनक बताया गया है। यह पुल शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है और दिनभर हजारों गाड़ी यहां से गुजरते हैं। बता दें कि साल 2013 में इसी पुल का एक हिस्सा अचानक गिर गया था, जिसके बाद इसकी मरम्मत कर यातायात फिर से शुरू कराया गया था। अब एक बार फिर आईआईटी की रिपोर्ट ने इसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने पुलों की नियमित तकनीकी जांच और समय-समय पर मजबूतीकरण बेहद जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में गंभीर हादसे हो सकते हैं। स्थानीय लोग बोले- डर लगता है कहीं हादसा ना हो जाए दादर इलाके के निवासी दीनबंधु कुमार ने कहा कि हर बार पुलों की जांच तो होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं दिखता।बिहार में पिछले कुछ साल में पुलों के गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन उससे भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। स्थानीय निवासी दीपक कुमार रजक ने कहा कि पुलों की हालत लगातार खराब हो रही है और लोग डर के साए में सफर करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से तत्काल मरम्मत काम शुरू कराने की मांग की। साथ ही कहा कि मैं ये नहीं चाहता हूं कि यहां भागलपुर जैसी स्थिति हो जाए। आईआईटी पटना की रिपोर्ट आने के बाद अब राज्य सरकार और पथ निर्माण विभाग पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जर्जर पुलों की पहचान कर सिर्फ रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल्द कार्रवाई जरूरी है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत, भार नियंत्रण और सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, तो मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। मरम्मत के लिए फाइबर तकनीक का किया जाएगा उपयोग बता दें कि पिछले दिनों पुल निर्माण, पथ निर्माण विभाग व आइआइटी पटना की टीम ने संयुक्त रूप से आरओबी और पुल का निरीक्षण किया था। दोनों पुलों की शीघ्र मरम्मत कराने की रिपोर्ट दी गई है। पुल निर्माण निगम ने करीब 4.50 करोड़ से आरओबी व चार करोड़ रुपये से दादर पुल के मरम्मत का प्राक्कलन तैयार कर मुख्यालय को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा है। वरीय परियोजना अभियंता आलोक कुमार ने बताया स्वीकृति मिलते ही मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा। आइआइटी पटना की टीम ने आरओबी व पुल से भारी गाड़ी का रूट डायवर्ट करने का सुझाव दिया था। “मुजफ्फरपुर का दादरपुर कब गिरेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। यहां लीपापोती की जाती है। बालू में थोड़ा सा सिमेंट मिला कर ढक दिया गया है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है और कई लोगों की मौत हो सकती है। घटना हो जाने के बाद प्रशासन की नींद खुलती है। यहां नया पुल बनना चाहिए।” ये कहना मुजफ्फरपुर के रहने वाले दीनबंधु कुमार का है। दरअसल, भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के गिरने के बाद पुलों के जर्जर संरचनाओं को लेकर सवाल उठ रहे है। इसी बीच आईआईटी पटना की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में राज्य के कुल नौ पुलों को खतरे की श्रेणी में रखा गया है। इनमें मुजफ्फरपुर के दो महत्वपूर्ण पुल—बूढ़ी गंडक नदी पर बना दादर पुल और माड़ीपुर रेल ओवरब्रिज भी शामिल हैं। आईआईटी पटना की टीम की ओर से किए गए स्ट्रक्चरल ऑडिट में इन पुलों की स्थिति को गंभीर बताया गया है। इसके बाद लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत और मजबूती का काम नहीं किया गया, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अब दादर पुल के बारे में जानिए… मुजफ्फरपुर को दरभंगा समेत उत्तर बिहार के कई इलाकों से जोड़ने वाला दादर पुल करीब 40 साल पुराना है। यह पुल रोजाना 20-30 हजार छोटे-बड़े गाड़ी के आवागमन का मुख्य माध्यम माना जाता है। यही वजह है कि इसे उत्तर बिहार की “लाइफलाइन” भी कहा जाता है। आईआईटी पटना की रिपोर्ट के अनुसार पुल के कई हिस्सों में सरिया बाहर निकल आए हैं। गार्डर कमजोर हो चुके हैं और कई जगहों पर रेलिंग भी टूट चुकी है। विशेषज्ञों ने पुल की तत्काल मरम्मत और संरचनात्मक मजबूती की जरूरत बताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से पुल की हालत खराब है, लेकिन सिर्फ जांच और निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति होती रही है। रोजाना भारी वाहनों के दबाव के कारण पुल की स्थिति और खराब होती जा रही है। 13 साल पहले टूटा था माड़ीपुर रेल ओवरब्रिज, एक बार फिर खतरे के संकेत रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन के पास स्थित करीब 55 साल पुराने माड़ीपुर रेल ओवरब्रिज की स्थिति को भी चिंताजनक बताया गया है। यह पुल शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है और दिनभर हजारों गाड़ी यहां से गुजरते हैं। बता दें कि साल 2013 में इसी पुल का एक हिस्सा अचानक गिर गया था, जिसके बाद इसकी मरम्मत कर यातायात फिर से शुरू कराया गया था। अब एक बार फिर आईआईटी की रिपोर्ट ने इसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने पुलों की नियमित तकनीकी जांच और समय-समय पर मजबूतीकरण बेहद जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में गंभीर हादसे हो सकते हैं। स्थानीय लोग बोले- डर लगता है कहीं हादसा ना हो जाए दादर इलाके के निवासी दीनबंधु कुमार ने कहा कि हर बार पुलों की जांच तो होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं दिखता।बिहार में पिछले कुछ साल में पुलों के गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन उससे भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया। स्थानीय निवासी दीपक कुमार रजक ने कहा कि पुलों की हालत लगातार खराब हो रही है और लोग डर के साए में सफर करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से तत्काल मरम्मत काम शुरू कराने की मांग की। साथ ही कहा कि मैं ये नहीं चाहता हूं कि यहां भागलपुर जैसी स्थिति हो जाए। आईआईटी पटना की रिपोर्ट आने के बाद अब राज्य सरकार और पथ निर्माण विभाग पर दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जर्जर पुलों की पहचान कर सिर्फ रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जल्द कार्रवाई जरूरी है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत, भार नियंत्रण और सुरक्षा उपाय लागू नहीं किए गए, तो मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। मरम्मत के लिए फाइबर तकनीक का किया जाएगा उपयोग बता दें कि पिछले दिनों पुल निर्माण, पथ निर्माण विभाग व आइआइटी पटना की टीम ने संयुक्त रूप से आरओबी और पुल का निरीक्षण किया था। दोनों पुलों की शीघ्र मरम्मत कराने की रिपोर्ट दी गई है। पुल निर्माण निगम ने करीब 4.50 करोड़ से आरओबी व चार करोड़ रुपये से दादर पुल के मरम्मत का प्राक्कलन तैयार कर मुख्यालय को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा है। वरीय परियोजना अभियंता आलोक कुमार ने बताया स्वीकृति मिलते ही मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा। आइआइटी पटना की टीम ने आरओबी व पुल से भारी गाड़ी का रूट डायवर्ट करने का सुझाव दिया था।


